AI ट्रेड को लेकर नए सिरे से उठे शक और तेज होते भू-राजनीतिक तनाव पिछले हफ्ते आमने-सामने आ गए, और इसका असर यह हुआ कि दुनिया भर के ज्यादातर शेयर बाजार फिसल गए। डॉयचे बैंक के रणनीतिकारों के मुताबिक इस बिकवाली के पीछे एक साथ तीन दबाव काम कर रहे थे। पहला, कच्चे तेल और गैस की चढ़ती कीमतें। दूसरा, अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता टकराव। और तीसरा, यह सवाल कि क्या AI की तेजी अपने ऊंचे वैल्यूएशन को आगे भी सही ठहरा पाएगी। सबसे भारी चोट चिप बनाने वाली कंपनियों को लगी, जिसने फिली सेमीकंडक्टर इंडेक्स को बेयर मार्केट में धकेल दिया, वहीं अमेरिका से लेकर टोक्यो तक के प्रमुख सूचकांक भी लाल निशान में बंद हुए। यूरोप के बाजार तुलना में ज्यादा टिके रहे, और सोमवार सुबह भू-राजनीतिक जोखिम बने रहने के बावजूद शेयर फ्यूचर्स हल्की बढ़त के साथ चल रहे थे।
सबसे बड़ी मार चिप शेयरों पर
नुकसान सबसे गहरा सेमीकंडक्टर सेक्टर में दिखा। फिली सेमीकंडक्टर इंडेक्स पूरे हफ्ते में 9.97% टूटा, जिसमें अकेले शुक्रवार की 1.63% की गिरावट भी शामिल है। यह पिछले साल लिबरेशन डे टैरिफ के ऐलान वाले हफ्ते के बाद इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही। यह गिरावट इतनी गहरी थी कि इंडेक्स आधिकारिक तौर पर बेयर मार्केट में चला गया। 22 जून को दर्ज अपने रिकॉर्ड क्लोजिंग स्तर से यह अब तक 20.23% नीचे आ चुका है। यही वह मोड़ है जहां निवेशकों का भरोसा सबसे तेजी से डगमगाया, क्योंकि AI की पूरी कहानी में चिप कंपनियां ही सबसे आगे रही हैं।
वॉल स्ट्रीट और टोक्यो भी पीछे-पीछे
चिप शेयरों की यह कमजोरी बाकी बाजारों तक भी फैली। एसएंडपी 500 पूरे हफ्ते में 1.55% गिरा, जिसमें शुक्रवार की 1.01% की गिरावट शामिल है। जापान का निक्केई 6.44% लुढ़का, जो लिबरेशन डे वाले हफ्ते के बाद इसका सबसे खराब प्रदर्शन रहा। यानी एशिया और अमेरिका, दोनों जगह निवेशकों ने जोखिम से हाथ खींचे।
यूरोप ने संभाला मोर्चा
इस पूरे माहौल में यूरोपीय शेयर सबसे मजबूत नजर आए। स्टॉक्स 600 शुक्रवार को 0.34% गिरने के बावजूद पूरे हफ्ते में 0.07% ऊपर बंद हुआ। यही वजह है कि रणनीतिकार यूरोप को इस दौर में अपेक्षाकृत टिकाऊ बता रहे हैं।
ईरान पर हमलों से कच्चा तेल उछला
भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा। सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड 2.45% चढ़कर 90.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह उछाल ईरान के खिलाफ अमेरिका की लगातार नौवीं रात की सैन्य कार्रवाई के बाद आया। दिलचस्प यह रहा कि इस तनाव के बावजूद अमेरिकी फ्यूचर्स ने अच्छा प्रदर्शन किया, एसएंडपी फ्यूचर्स 0.15% और नैस्डैक फ्यूचर्स 0.47% ऊपर चल रहे थे।
क्रिप्टो में एथेरियम आगे, पर तेजी कमजोर
क्रिप्टो बाजार में एथेरियम ने पिछले हफ्ते दूसरों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया और बिटकॉइन, XRP तथा सोलाना जैसे बड़े नामों को पीछे छोड़ते हुए दोहरे अंक में बढ़त दर्ज की। यह बढ़त पिछले हफ्ते से बुधवार तक बनी रही, जिसके बाद गुरुवार को पूरा बाजार करेक्शन में आ गया। हालांकि सतह के नीचे के आंकड़े बताते हैं कि एथेरियम की यह मजबूती अभी नाजुक बनी हुई है, और इसे टिकाऊ मानना जल्दबाजी होगी।
अपग्रेड के बाद कार्डानो में ठहराव
कार्डानो (ADA) एक हल्के सुधार के बाद करीब 0.165 डॉलर पर ठहर गया। इसके ठीक पहले शनिवार को वैन रॉसम हार्ड फोर्क लागू हुआ, जो कार्डानो का पहला ऐसा प्रोटोकॉल अपग्रेड है जिसे पूरी तरह ऑनचेन गवर्नेंस के जरिए मंजूरी मिली। इस अपग्रेड के साथ प्रोटोकॉल वर्जन 11 आया, जिसका मकसद स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट की लागत कम करना है। ताज़ा बाजार आंकड़ों के मुताबिक ADA फिलहाल करीब 0.1714 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 0.1660 डॉलर से 3.26% ऊपर है। इसका 14 दिन का RSI 53 पर है, यानी न ओवरबॉट न ओवरसोल्ड, और कीमत बॉलिंजर बैंड के भीतर बनी हुई है। बीते 52 हफ्तों में यह सिक्का 0.1387 डॉलर से 0.6052 डॉलर के दायरे में रहा है।
महंगाई में नरमी से थोड़ी राहत
बाजार के लिए एक राहत भरी खबर महंगाई के मोर्चे से आई। जून का CPI महीने-दर-महीने 0.4% गिरा, जो अप्रैल 2020 के बाद किसी एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे सालाना महंगाई दर मई के 4.2% से घटकर 3.5% पर आ गई और लगातार तीन महीने से चली आ रही तेजी का सिलसिला थम गया। कोर कीमतें महीने भर में एक जगह टिकी रहीं और सालाना आधार पर घटकर 2.6% पर आ गईं। खास बात यह रही कि दोनों ही आंकड़े बाजार के अनुमान से कम रहे, जो आगे राहत की उम्मीद जगाते हैं।



















