अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के बीच भारतीय इक्विटी बाजार वैश्विक पूंजी के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनकर उभरा है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया के वित्तीय बाजारों में मची खलबली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक एक बार फिर भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर पूंजी का निवेश कर रहे हैं। लंबे समय तक बिकवाली के रुख पर कायम रहने वाले विदेशी निवेशकों ने हालिया कारोबारी सप्ताह के सभी पांचों सत्रों में जमकर लिवाली की। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों की तरफ से भारतीय शेयरों में कुल 45,960 करोड़ रुपये का भारी निवेश दर्ज किया गया, जबकि दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों ने रिकॉर्ड स्तरों पर मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
विदेशी निवेशकों की जोरदार वापसी और रिकॉर्ड खरीदारी
विदेशी निवेशकों की यह हालिया खरीदारी वित्तीय विश्लेषकों के लिए भी बेहद उल्लेखनीय मानी जा रही है। बजाज ब्रोकिंग के रिसर्च विभाग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पबित्रो मुखर्जी के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने लगातार दूसरे सप्ताह अपनी शुद्ध खरीदारी का क्रम बरकरार रखा है। इससे पूर्व विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार दस हफ्तों तक भारतीय बाजार से अपनी पूंजी बाहर निकाल रहे थे और शुद्ध बिकवाल की भूमिका में थे। सबसे अहम तथ्य यह सामने आया है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा केवल एक सप्ताह के भीतर झोंकी गई 45,960 करोड़ रुपये की यह रकम अक्टूबर के पूरे महीने में की गई 45,162 करोड़ रुपये की कुल निकासी से भी अधिक रही। इस आक्रामक पूंजी प्रवाह ने घरेलू बाजार की तरलता और निवेशकों के मनोबल को अप्रत्याशित सहारा प्रदान किया है।
घरेलू निवेशकों का मुनाफावसूली पर जोर
विदेशी पूंजी के इस आक्रामक प्रवाह के विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पूरे सप्ताह सतर्क रुख अपनाते हुए बिकवाली की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस कारोबारी सप्ताह में कुल 24,197 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। इसके साथ ही घरेलू निवेशकों की पिछले ग्यारह हफ्तों से लगातार जारी खरीदारी का दौर भी थम गया। बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि सूचकांकों में आई तेज और तीव्र बढ़त को भुनाने के लिए घरेलू फंड्स और वित्तीय संस्थानों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने का फैसला लिया।
संस्थागत स्तर पर शुद्ध पूंजी प्रवाह का आकलन करें तो इस सप्ताह भारतीय इक्विटी बाजार में कुल 21,764 करोड़ रुपये की सकारात्मक तरलता दर्ज की गई। इस शुद्ध प्रवाह ने घरेलू सूचकांकों की तेजी को स्थिरता और गति दोनों दी। सप्ताह के अंतिम दो कारोबारी दिनों, विशेष रूप से गुरुवार और शुक्रवार को, संस्थागत गतिविधियां चरम पर रहीं। इन दो दिनों के भीतर ही विदेशी निवेशकों ने 28,724 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड खरीदारी कर डाली, जिसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 16,413 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपनी स्थिति हल्की की।
सेंसेक्स और निफ्टी में रिकॉर्ड उछाल के प्रमुख कारण
विदेशी पूंजी के जबर्दस्त समर्थन के बल पर भारतीय शेयर बाजार ने लगातार सातवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की, जिसे बीते तीन वर्षों की सबसे लंबी निरंतर तेजी के रूप में देखा जा रहा है। शुक्रवार के सत्र में विशेष तौर पर बैंकिंग क्षेत्र और उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों वाली कंपनियों के शेयरों में जोरदार लिवाली देखी गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 1,718.01 अंक अथवा 2.17 प्रतिशत की छलांग लगाकर 81,028.02 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर एनएसई निफ्टी 493.75 अंक यानी 2.01 प्रतिशत की उछाल के साथ 25,030.35 के स्तर को छूने में सफल रहा।
यह कारोबारी हफ्ता भारतीय बाजार के इतिहास के सबसे मजबूत साप्ताहिक उछालों में शामिल हो गया, जहां दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने 8.5 प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक बढ़त हासिल की। बाजार की इस शानदार रैली के पीछे विदेशी निवेशकों की वापसी के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण कारक रहे। कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणाम अनुमान से बेहतर रहे, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी देखी गई, सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी आई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई। इसके अलावा खरीदारी केवल कुछ भारी वजन वाले शेयरों तक सीमित न रहकर पूरे बाजार में फैली, जिससे छोटे और मझोले निवेशकों में भी व्यापक भरोसा लौटा।
आगामी सप्ताह और नए संवत की चुनौतियां व संभावनाएं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आगे आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। घरेलू संस्थानों ने जिस तरह हालिया उछाल में बड़े पैमाने पर अपने मुनाफे को भुनाया है, उसे देखते हुए तेजी के इस क्रम को जारी रखने के लिए विदेशी नकदी का प्रवाह बने रहना अनिवार्य होगा। नए संवत वर्ष की शुरुआत बाजार के लिए काफी अनुकूल और सकारात्मक वातावरण में हो रही है। आने वाला सप्ताह छुट्टियों के कारण कम कारोबारी दिनों वाला रहेगा, जिसकी औपचारिक शुरुआत रविवार को आयोजित होने वाले विशेष मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र से होगी। जानकारों का आकलन है कि अगर विदेशी निवेशकों की यह आक्रामक लिवाली बनी रही और अंतरराष्ट्रीय संकेत सहयोगी रहे, तो घरेलू शेयर बाजार आने वाले दिनों में और भी नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।



















