वैश्विक इक्विटी बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में आई हालिया गिरावट के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार पर इसका असर फिलहाल काफी सीमित दिखाई दिया है। सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर ने दोबारा रफ्तार पकड़ी है और हाल के चुनावी घटनाक्रमों के बाद आई शुरुआती गिरावट की पूरी भरपाई कर ली है। निवेशक और मुद्रा कारोबारी अब व्यापक व्यापक-आर्थिक परिस्थितियों, केंद्रीय बैंकों के रुख और आने वाले प्रमुख आंकड़ों के आधार पर अपनी रणनीतियां तय कर रहे हैं। इस बदलते वित्तीय परिदृश्य में जोखिम भरी संपत्तियों से पूंजी निकलकर पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रही है।
इक्विटी बाजार में बिकवाली और डॉलर इंडेक्स की चाल
प्रौद्योगिकी और विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली का दौर देखने को मिला, जिससे सामान्य वित्तीय बाजारों में घबराहट का माहौल बना। हालांकि, इस बिकवाली का विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार पर पड़ने वाला असर अप्रत्याशित रूप से धीमा रहा है। मुद्रा बाजार में डॉलर इंडेक्स ने अपनी उन तमाम कमजोरियों को पीछे छोड़ दिया है, जो अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणामों की घोषणा के बाद दर्ज की गई थीं। उस समय डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत प्रदर्शन के बाद डॉलर पर दबाव बना था, लेकिन बदलते समीकरणों ने इसे एक बार फिर बढ़त की स्थिति में ला खड़ा किया है।
चालू वर्ष के दौरान अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मुख्य रूप से दो प्रमुख कारकों से समर्थन मिला था। इनमें पहला कारक ऊर्जा की ऊंची कीमतें थीं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग को मजबूत बनाए रखा। दूसरा प्रमुख आधार अमेरिकी जोखिम भरी संपत्तियों के लिए विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड मांग का होना था। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा कीमतों और विदेशी निवेश प्रवाह के ये दोनों प्रेरक कारक विपरीत दिशा में मुड़ते हैं, तो आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर के कमजोर पड़ने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वित्तीय स्थितियां
मुद्रा के भविष्य की दिशा तय करने में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की नीतियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। वित्तीय बाजारों में तरलता की स्थिति लगातार सख्त हो रही है। यदि वित्तीय परिस्थितियां इसी प्रकार और अधिक कड़ी होती चली गईं, तो फेडरल रिजर्व के लिए दिसंबर की बैठक में पूर्व नियोजित योजना के अनुसार ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करना कठिन हो सकता है। ब्याज दरों में वृद्धि रुकने अथवा योजना टलने की स्थिति अमेरिकी डॉलर के लिए गिरावट का नया जोखिम पैदा कर सकती है।
इसके साथ ही अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट भी निवेशकों के ध्यान के केंद्र में बनी हुई है। बॉन्ड यील्ड के दो महीने के निचले स्तर तक फिसलने से डॉलर की आक्रामक बढ़त पर कुछ हद तक ब्रेक लगा है। बॉन्ड बाजार में यील्ड का गिरना यह दर्शाता है कि भविष्य में उधारी लागत और आर्थिक विकास की रफ्तार को लेकर बाजार में चिंताएं मौजूद हैं, जिससे डॉलर के तेजड़ियों को सतर्क रुख अपनाना पड़ रहा है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर दबाव और हलचल
डॉलर की मजबूती और इक्विटी बाजारों की उथल-पुथल का सीधा प्रभाव दुनिया की प्रमुख मुद्राओं पर देखा गया है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर शुक्रवार के कारोबारी सत्र में तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नरम मौद्रिक रुख और इक्विटी बाजारों में भारी बिकवाली ने जोखिम के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर भारी दबाव डाला। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई मंदी ने इस जोड़ी में होने वाले नुकसान को सीमित रखा, क्योंकि कारोबारी नए रुख के लिए आगामी रोजगार आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में एशियाई सत्र के दौरान दर्ज किए गए साप्ताहिक निचले स्तर से मामूली उछाल देखा गया। इस जोड़ी में तेजी की गुंजाइश सीमित प्रतीत हो रही है, क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और ईरान युद्ध की स्थिति में तनाव कम होने की उम्मीदों ने डॉलर की स्थिति को कमजोर किया है। इसके अलावा, बैंक ऑफ जापान का सख्त मौद्रिक दृष्टिकोण और जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप का जोखिम येन को मजबूती प्रदान कर रहा है, जिससे डॉलर की बढ़त पर लगाम लगी हुई है।
सोने की कीमतों में सुधार और मासिक रोजगार रिपोर्ट
कीमती धातुओं के बाजार में भी डॉलर की चाल का स्पष्ट असर दिखाई दिया है। सोने की कीमतों ने अपने दो सप्ताह के उच्च स्तर से शुरू हुई गिरावट को आगे बढ़ाया और शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भाव 4,050 डॉलर के स्तर से नीचे आ गए। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के सितंबर के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर से उबरने के कारण सोने पर यह दबाव बना है। हालांकि, कारोबारी किसी भी बड़े दिशात्मक सौदे में प्रवेश करने से पहले अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल यानी रोजगार के मासिक विवरण का इंतजार कर रहे हैं, जिससे सोने में और अधिक गिरावट सीमित रही है।
इससे पूर्व, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक बढ़त के बाद डॉलर के कमजोर पड़ने पर सोने की कीमतें 4,000 डॉलर के पार निकल गई थीं। पूरे वर्ष के दौरान सोने में आने वाली हर तेजी को भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा है। बाजार प्रतिभागी अब शुक्रवार को जारी होने वाली गैर-कृषि रोजगार रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सोने की हालिया चाल एक टिकाऊ ब्रेकआउट का संकेत है या फिर केवल एक अस्थायी उछाल भर है।



















