वैश्विक मुद्रा बाजारों में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूरो और जापानी येन की विनिमय दर में मिला-जुला रुख देखने को मिला। यूरो जापानी येन के मुकाबले लगभग 177.60 के आसपास सपाट स्थिति में कारोबार कर रहा है। हालांकि, यह स्तर पिछले कारोबारी सत्र में दर्ज किए गए 176.66 के दस महीने से अधिक के निचले स्तर के बेहद नजदीक है। बाजार में इस जोड़ी पर लगातार दबाव बना हुआ है, क्योंकि निवेशकों का ध्यान आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक रणनीतियों पर टिका हुआ है।
टोक्यो में सितंबर की महंगाई ने पकड़ी रफ्तार
जापानी मुद्रा ने शुक्रवार को अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले व्यापक रूप से बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया। जापान की राजधानी टोक्यो के सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़े अनुमान से कहीं अधिक मजबूत दर्ज किए गए। ताजा फलों जैसे ताजे खाद्य पदार्थों को छोड़कर टोक्यो का मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह आंकड़ा विश्लेषकों के 2.4 प्रतिशत के अनुमान और अगस्त के 1.8 प्रतिशत के पिछले आंकड़े दोनों से काफी अधिक है।
इसी तरह हेडलाइन मुद्रास्फीति की दर भी तेज गति से बढ़ते हुए 2.7 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अगस्त महीने में यह आंकड़ा 1.9 प्रतिशत पर था। महंगाई के इन मजबूत आंकड़ों ने बाजार में यह उम्मीद काफी बढ़ा दी है कि बैंक ऑफ जापान (BoJ) आने वाले समय में अपनी ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने की दिशा में तेजी से कदम उठा सकता है। केंद्रीय बैंक के आक्रामक रुख की इन्हीं संभावनाओं ने येन को अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में खास मजबूती दी है।
फ्रांस के बॉन्ड यील्ड और राजकोषीय घाटे की चुनौतियां
यूरोपीय क्षेत्र में मुद्रा के मोर्चे पर चिंताएं बनी हुई हैं। फ्रांस के बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने यूरो पर भारी दबाव बनाए रखा है। सार्वजनिक वित्त और बजट संतुलन को लेकर बढ़ते सवालों के जवाब में फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने बजट को दोबारा पटरी पर लाने की प्रतिबद्धता जताई है। सरकारी योजना के तहत फ्रांस का लक्ष्य अपने बजट घाटे को अगले वर्ष के आर्थिक उत्पादन के 5 प्रतिशत के लक्ष्य से घटाकर 2029 तक यूरोपीय संघ द्वारा तय 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर लाना है। हालांकि, बॉन्ड बाजार में बढ़ते प्रतिफल के कारण यूरोपीय साझा मुद्रा को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है।
मुद्रा बाजार का मिजाज और अमेरिकी डॉलर की स्थिति
विदेशी मुद्रा बाजार में आज विभिन्न मुद्राओं के बीच आपसी उतार-चढ़ाव काफी दिलचस्प रहा। प्रमुख मुद्राओं की सूची में जापानी येन ने सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया और यह अमेरिकी डॉलर के सामने सबसे अधिक बढ़त हासिल करने में सफल रहा। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों के कारण पैदा हुई मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं ने भी मुद्राओं के रुख को प्रभावित किया है। इन चिंताओं ने अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर कटौती के दावों को कुछ हद तक सीमित कर दिया है, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर लगभग 17 महीने के उच्चतम स्तर के करीब अपनी मजबूती बनाए रखने में कामयाब रहा।
अन्य प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़ियों का प्रदर्शन
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों में भी हलचल देखी गई
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD): यह जोड़ी नई बिकवाली के दबाव में आकर 0.6900 के स्तर की ओर फिसल गई, जो जुलाई की शुरुआत के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रातभर आई गिरावट के बावजूद तेल आधारित महंगाई चिंताओं से मजबूत हुए अमेरिकी डॉलर ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को पछाड़ दिया।
- अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY): यह जोड़ी 158.00 के करीब स्थिर बनी रही, जो इसके साप्ताहिक दायरे का ऊपरी छोर है। टोक्यो में महंगाई के तीखे आंकड़ों के बाद भी अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने इस जोड़ी को समर्थन दिया। डॉलर को भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और तेल से जुड़ी महंगाई की चिंताओं से लगातार सहारा मिल रहा है।
- सोने की चाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैर-उपज वाले सोने की कीमतें सुस्त रुख के साथ लगभग 4,150 डॉलर के दायरे में कारोबार करती दिखीं। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई गिरावट के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बने तनाव और डॉलर के मजबूत बने रहने से सर्राफा बाजार में सतर्कता का माहौल बना रहा।
आगामी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी नजरें
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों के ट्रेडर अब आने वाले बड़े वृहद आर्थिक आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। विशेष रूप से यूरोजोन के एचआईसीपी मुद्रास्फीति आंकड़े और अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार (Nonfarm Payrolls) आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होंगे। अमेरिकी नौकरियों के आंकड़े यह संकेत देंगे कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अख्तियार करता है। तब तक मुद्रा बाजारों में सतर्कता और उतार-चढ़ाव का दौर बने रहने की संभावना है।



















