वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय प्रमुख केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों को लेकर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। यूरो मनी मार्केट में ट्रेडर्स और निवेशक यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी द्वारा पहले लागू की जा चुकी दो दरों की बढ़ोतरी के बाद अब चार अतिरिक्त बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं। बाजार की यह आक्रामक सोच नीति निर्माताओं की वास्तविक योजना से काफी आगे निकलती दिख रही है। राबोबैंक के सीनियर मैक्रो स्ट्रैटेजिस्ट बास वैन गेफेन के अनुसार, निवेशक केंद्रीय बैंक की प्रतिक्रिया प्रणाली को परख रहे हैं, जबकि ईसीबी की प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लेगार्ड बाजार की इन गणनाओं की खुलकर पुष्टि करने से बच रही हैं। सामने आई सूचनाओं से संकेत मिलता है कि अगला नीतिगत कदम अक्टूबर के बजाय दिसंबर में उठाए जाने की संभावना अधिक है, जिससे तुरंत होने वाली आक्रामक सख्ती के दांव कुछ हद तक धीमे पड़े हैं।
केंद्रीय बैंकों की मुश्किल और महंगाई का वास्तविक दबाव
बास वैन गेफेन का मानना है कि दर बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण वित्तीय स्थितियों में आने वाली स्वाभाविक सख्ती से नीति निर्माताओं को शायद कोई खास ऐतराज न हो, लेकिन बाजार इस बार केंद्रीय बैंकों की सोच से कहीं ज्यादा आगे निकल चुके हैं। केंद्रीय बैंक इस समय लगातार अनिश्चितता के बीच महंगाई को काबू करने और आर्थिक विकास दर को बचाने के दोहरे संकट से जूझ रहे हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति में अभी और तेजी आने की पूरी आशंका है। इसके बावजूद मौजूदा मूल्य दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति में आई रुकावटों और झटकों की वजह से हैं, और अभी तक ऐसे कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं जिनसे यह साबित हो सके कि महंगाई व्यापक अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में फैल रही है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती से एशियाई बाजार प्रभावित
वैश्विक करेंसी बाजार में अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों से उपजी महंगाई की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में गहराते तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को और बढ़ा दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अमेरिकी-ईरान तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर का रिजर्व करेंसी दर्जा मजबूत हुआ है।
इस मजबूत डॉलर के प्रभाव से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर लगातार दबाव देखा जा रहा है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD लगातार तीसरे दिन मंदी के रुख के साथ कारोबार करता दिखा और 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के नजदीक पहुंच गया। जोखिम से जुड़े संपत्तियों पर बिकवाली का यह दबाव स्पष्ट नजर आ रहा है।
येन की चाल और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY बुधवार को एशियाई सत्र में 155.00 के पार निकलकर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे ही बनी रही, क्योंकि फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले तेजड़ियों ने सतर्कता बरती।
जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से भी अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की है। इस व्यवस्था ने जापानी येन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बना दिया था। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने महंगाई से लड़ने के लिए अपनी ब्याज दरों में आक्रामक रूप से बढ़ोतरी की, वहीं जापान लंबे समय तक दुनिया का सबसे अलग देश बना रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह नीति में फिर से सख्ती किए जाने की संभावनाओं के चलते, यह सस्ता फंडिंग वाला दौर एक नए चरण में प्रवेश करता नजर आ रहा है।
सोने की चाल और फेडरल रिजर्व के आंकड़े
कमोडिटी बाजार में सोने ने यूरोपीय सत्र के पहले भाग में मामूली इंट्राडे बढ़त दर्ज की, लेकिन इसमें आगे खरीदारी का उत्साह नहीं दिखा और भाव 4,350 डॉलर प्रति औंस से नीचे ही बने रहे। अमेरिकी डॉलर में दो सप्ताह के उच्चतम स्तर से आई हल्की मुनाफावसूली ने सोने को थोड़ा सहारा जरूर दिया, लेकिन केंद्रीय बैंक के बड़े फैसलों को देखते हुए ट्रेडर्स किसी भी दिशा में बड़े सौदे करने से बच रहे हैं और किनारे रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बाजार का मुख्य ध्यान अब फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले पर टिका है। इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले आए अमेरिकी अगस्त नौकरियों के आंकड़ों ने उम्मीद से अधिक मजबूती दिखाई थी, जिसने ब्याज दर बाजारों में तेज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को फिर से हवा दी थी। हालांकि, इसके बाद जारी हुए अमेरिकी अगस्त सीपीआई महंगाई के आंकड़ों ने नीतिगत दृष्टिकोण के लिए अधिक निर्णायक भूमिका निभाई है।



















