नए हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छी नहीं रही। सोमवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और बीएसई सेंसेक्स 450 अंक टूटकर खुला। इसके बाद बिकवाली और तेज हुई तो इंडेक्स 468 अंक लुढ़ककर 77,683 के स्तर पर आ गया। दूसरी तरफ निफ्टी 50 भी 126.50 अंक की गिरावट के साथ 24,207 पर खुला।
बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह विदेशों से मिल रहे कमजोर संकेत और दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। इसी माहौल में निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में सतर्क रुख अपनाया और मुनाफावसूली की।
सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, छोटे शेयर भी लुढ़के
गिरावट का असर केवल दिग्गज कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी दिखी। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप 0.02 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 0.09 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इसका मतलब यह रहा कि छोटे और मझोले शेयरों में भी खरीदारों की दिलचस्पी कम रही।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टर के लिहाज से देखें तो सबसे ज्यादा चोट निजी बैंकों को लगी। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी बैंक इंडेक्स पर भी बिकवाली का दबाव साफ दिखा। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में कमजोरी अक्सर पूरे बाजार का मूड तय करती है, इसलिए इनकी गिरावट ने सूचकांकों को और नीचे खींचा।
बाजार पर क्यों बना हुआ है दबाव
पिछले कुछ हफ्तों से घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। कभी सेंसेक्स और निफ्टी जोरदार तेजी के साथ खुलते हैं, तो कभी वैश्विक संकेतों की वजह से लाल निशान में चले जाते हैं। खबरों के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे कारक भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं, जिसके चलते बाजार में बार-बार गिरावट देखने को मिल रही है।

















