यूरोपीय ट्रेडिंग सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर ने अपनी शुरुआती गिरावट से उबरते हुए शानदार वापसी की है और 98.95 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त हासिल की है। ग्रीनबैक में यह तेजी अमेरिका के मजबूत नॉन-फार्म पेरोल आंकड़ों के सामने आने के बाद देखने को मिली है, जिसने फेडेरल रिजर्व की ओर से सख्त मौद्रिक नीति जारी रहने की उम्मीदों को नया जीवन दिया है। अब वैश्विक निवेशकों की निगाहें इस सप्ताह जारी होने वाले महत्वपूर्ण महंगाई आंकड़ों पर टिकी हैं। बृहस्पतिवार को जारी होने वाला प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और शुक्रवार को आने वाला कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 16 सितंबर को होने वाली फेडेरल रिजर्व की नीतिगत बैठक से पहले महंगाई की स्थिति को स्पष्ट करेंगे। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 98.86 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो इसके 52 सप्ताह के निचले स्तर 95.55 और ऊपरी स्तर 101.80 के दायरे में है।
फेडेरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाएं और महंगाई का दृष्टिकोण
कॉमर्सबैंक की एक शोध टिप्पणी के अनुसार, उम्मीद से बेहतर आए अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने वित्तीय बाजारों में सितंबर में फेडेरल रिजर्व द्वारा दर बढ़ोतरी की संभावनाओं को फिर से जगा दिया है। बैंक के विश्लेषकों ने उल्लेख किया कि वायदा बाजारों के आंकड़ों के मुताबिक, 16 सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की संभावना बढ़कर 62% हो गई है, जो रोजगार रिपोर्ट जारी होने से पहले महज 51% दर्ज की गई थी। रोजगार बाजार की मजबूती यह संकेत देती है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मांग अभी भी काफी बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक को दरों में ढील देने में सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
दूसरी ओर, डॉयचे बैंक के वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि चालू सप्ताह के मुद्रास्फीति आंकड़े फेडेरल रिजर्व के आगामी फैसले की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। शुक्रवार को जारी होने वाली अगस्त महीने की CPI रिपोर्ट और उससे ठीक एक दिन पहले आने वाले PPI आंकड़े केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति निर्माताओं के लिए आखिरी प्रमुख आर्थिक इनपुट होंगे। डॉयचे बैंक के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगस्त में हेडलाइन महंगाई दर में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। उनके अनुमान के अनुसार, अगस्त का मुख्य CPI आंकड़ा मासिक आधार पर +0.38% रह सकता है, जो पिछले महीने दर्ज किए गए +0.07% की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, कोर CPI के +0.21% रहने की उम्मीद है, जो पिछले +0.22% के मुकाबले काफी स्थिर और नियंत्रित स्थिति को दर्शाता है।
तकनीकी विश्लेषण: प्रतिरोध स्तर और चार्ट इंडिकेटर्स
दैनिक चार्ट पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स स्पॉट वर्तमान में 98.97 के स्तर के करीब बना हुआ है। अल्पकालिक चार्ट संरचना यह दर्शाती है कि इंडेक्स अभी भी मंदी के दबाव में है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण तकनीकी रुकावटों के नीचे कारोबार कर रहा है। डॉलर इंडेक्स के लिए पहला बड़ा प्रतिरोध 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 99.37 पर स्थित है, जबकि 61.8% फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 99.21 पर बना हुआ है। जब तक इंडेक्स इन दोनों स्तरों से नीचे बना रहता है, तब तक तेजी की संभावनाएं सीमित दिखाई देती हैं।
तकनीकी संकेतकों में, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 41 के आसपास बना हुआ है, जो न्यूट्रल 50 रेखा से नीचे है। RSI की यह स्थिति यह स्पष्ट करती है कि बाजार में खरीदारी की गति फिलहाल कमजोर है और डॉलर ऊपरी प्रतिरोध क्षेत्र से नीचे ही समेकित हो रहा है। लाइव तकनीकी संकेतकों के मुताबिक, MACD हिस्टोग्राम 0.02 पर बना हुआ है, जो मामूली तेजी का संकेत देता है, जबकि 50-दिवसीय EMA 99.75 और 200-दिवसीय EMA 99.29 पर मौजूद हैं। दैनिक चार्ट पर 98.56 के स्तर पर मजबूत समर्थन और 100.08 के आसपास प्रतिरोध रेखा देखी जा रही है।
मुद्रा बाजार में नॉन-फार्म पेरोल की अहम भूमिका
विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारियों के लिए अमेरिका की मासिक रोजगार रिपोर्ट को सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक माना जाता है। हर महीने के पहले शुक्रवार को जारी होने वाले इन आंकड़ों में नए रोजगार के सृजन की संख्या दर्ज की जाती है, जिसका सीधा संबंध अमेरिकी अर्थव्यवस्था के समग्र प्रदर्शन से होता है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडेरल रिजर्व का मुख्य दायित्व पूर्ण रोजगार और मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। इसी कारण से श्रम बाजार में होने वाले किसी भी बदलाव को नीतिगत फैसले लेते समय गहराई से जांचा जाता है, जिसका सीधा असर अमेरिकी डॉलर की विनिमय दरों पर पड़ता है।
यद्यपि बाजार विशेषज्ञ विभिन्न अग्रिम संकेतकों के आधार पर पेरोल के अनुमान तैयार करते हैं, फिर भी नॉन-फार्म पेरोल (NFP) के आंकड़े अक्सर अनपेक्षित परिणाम देकर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा करते हैं। जब वास्तविक आंकड़े अनुमान से बेहतर आते हैं, तो यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है और डॉलर में तेजी लाने का काम करता है।
अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़े: AUD/USD, USD/JPY और सुरक्षित संपत्तियां
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की हलचल का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी साफ देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD की जोड़ी 0.7200 के स्तर से ऊपर बनी रही, जो 14 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। जापानी येन में आई तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है, जिससे फेडेरल रिजर्व की सख्त रुख की उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव से मिलने वाला समर्थन बेअसर हो गया। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा चालू माह के अंत में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मजबूत संभावना ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि, चीन के मिश्रित व्यापार संतुलन आंकड़ों ने इस तेजी को एक सीमित दायरे में बांध रखा है।
USD/JPY जोड़ी के मामले में, यह छह महीने के निचले स्तर 152.89 से सुधरकर यूरोपीय सत्र के दौरान 154.00 का स्तर फिर से छूने में सफल रही। इसके बावजूद, इस जोड़ी में और बढ़त की गुंजाइश सीमित दिखती है, क्योंकि जापान में वेतन वृद्धि के सकारात्मक आंकड़े और दूसरी तिमाही के GDP में हुआ संशोधन बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगले सप्ताह ब्याज दरें बढ़ाने के दांव को मजबूत कर रहे हैं। यही कारण है कि जापानी येन लगातार मजबूत स्थिति में बना हुआ है।
सुरक्षित संपत्ति माने जाने वाले सोने के बाजार की बात करें तो यूरोपीय सत्र की शुरुआत में सोना अपने दैनिक दायरे के निचले स्तर पर वापस आ गया है, हालांकि यह अभी भी $4,400 प्रति औंस के निशान से ऊपर टिका हुआ है। अमेरिकी डॉलर में हल्की नरमी सोने को सहारा दे रही है, लेकिन फेडेरल रिजर्व की दरों में वृद्धि की उम्मीदें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं डॉलर को भी मजबूती दे रही हैं, जिससे बिना प्रतिफल वाली धातु सोने की तेजी पर अंकुश लगा हुआ है।
ऊर्जा बाजार: डीजल फ्यूचर्स में रिकॉर्ड स्प्रेड
कच्चे तेल का बाजार पिछले कुछ महीनों की तुलना में स्थिर नजर आ रहा है, लेकिन डीजल का बाजार बिल्कुल अलग संकेत दे रहा है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड के बीच के अंतर को दर्शाता है, हाल ही में इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया। यह इंट्राडे कारोबार के दौरान $102.00 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। डीजल स्प्रेड में आया यह उछाल वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव और आपूर्ति श्रृंखला में बनी बाधाओं को उजागर करता है, जिसका आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों और समग्र मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है।



















