अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में चांदी की चाल इस समय महत्वपूर्ण दोराहे पर खड़ी दिखाई दे रही है। अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक यानी पीसीई के ताजा आंकड़ों में महंगाई की रफ्तार धीमी दर्ज होने के बाद भी कीमती धातुओं को एकतरफा राहत नहीं मिल पाई है। मुद्रास्फीति के दबाव में नरमी आने से नीतिगत ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावनाओं को झटका लगा है, जिससे चांदी 61 डॉलर प्रति औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रही है। इसके बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के दशकों के उच्च स्तर पर पहुंचने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते सफेद धातु के सामने व्यापक अड़चनें खड़ी हैं।
महंगाई के नरम आंकड़े और ब्याज दरों की बदली संभावनाएं
अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो बाजार के 0.4 प्रतिशत के अनुमान से कम रही। खाद्य और ऊर्जा की अस्थिर कीमतों को अलग रखने वाले कोर पीसीई सूचकांक में केवल 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि विश्लेषक 0.3 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद लगाए बैठे थे। सालाना आधार पर देखें तो हेडलाइन पीसीई मुद्रास्फीति धीमी होकर 3.4 प्रतिशत पर आ गई, जो 3.7 प्रतिशत के पूर्व अनुमान से काफी नीचे है। इसके अतिरिक्त सरकार के वार्षिक संशोधन के तहत जुलाई के कोर आंकड़े को भी 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3.0 प्रतिशत कर दिया गया है।
इन नरम आंकड़ों का सीधा असर वित्तीय बाजारों की सोच पर पड़ा है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े दर्शाते हैं कि केंद्रीय बैंक द्वारा अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की बाजार संभावना अब घटकर लगभग 38 प्रतिशत रह गई है। पीसीई आंकड़े सार्वजनिक होने से पहले यह संभावना करीब 51 प्रतिशत पर चल रही थी। कई वित्तीय कारोबारी अब फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि की उम्मीद को 28 अक्टूबर से खिसकाकर 9 दिसंबर पर ले गए हैं। अब समूचे बाजार का ध्यान शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल यानी एनएफपी रोजगार रिपोर्ट पर केंद्रित हो गया है। आम सहमति का अनुमान है कि सितंबर माह में 90,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं और बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है।
ट्रेजरी यील्ड और ऊर्जा बाजार से बढ़ता दबाव
ब्याज दरों में ठहराव की बढ़ती उम्मीदों के बावजूद सुरक्षित समझी जाने वाली परिसंपत्तियों के लिए आगे की राह आसान नहीं है। अमेरिकी बेंचमार्क ट्रेजरी यील्ड कई दशकों के रिकॉर्ड स्तरों के करीब टिकी हुई है। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.298 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी हुई है, जबकि 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड लगभग 4 आधार अंक चढ़कर 5.633 प्रतिशत पर पहुंच गई। ऊर्जा की कीमतों में उछाल के कारण लंबे समय तक मुद्रास्फीति बने रहने की आशंकाएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, जिससे निवेशकों को डर है कि मौद्रिक नीति अधिक समय तक सख्त रह सकती है। चूंकि चांदी एक बिना ब्याज या लाभांश देने वाली परिसंपत्ति है, इसलिए बॉन्ड यील्ड में मजबूती सीधे तौर पर इसे रखने की अवसर लागत को बढ़ा देती है।
कच्चे तेल की बढ़ती लागत ने भी उत्पादन और परिवहन खर्च बढ़ाकर व्यापक आर्थिक चिंताओं को हवा दी है। इसके साथ ही वाशिंगटन और तेहरान के बीच भू-राजनीतिक खींचतान जस की तस बनी हुई है। मध्य पूर्व के समुद्री जलमार्गों से तेल प्रवाह में सुधार के कुछ संकेत जरूर दिखे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच आधिकारिक वार्ता में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो सकी है। दोनों ही सरकारें रणनीतिक समुद्री जलमार्ग पर अपने नियंत्रण का दावा कर रही हैं। किसी औपचारिक समझौते के अभाव में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर बाजार में सतर्कता बनी हुई है, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा रखा हुआ है।
मूल्य निर्धारण के पारंपरिक और आधुनिक कारक
वित्तीय इतिहास में चांदी हमेशा से मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अपनी भूमिका निभाती आई है। भले ही सोने की तुलना में इसका व्यापारिक दायरा अलग दिखता हो, लेकिन पोर्टफोलियो में विविधता लाने और उच्च मुद्रास्फीति से बचाव के लिए निवेशक इसका भरपूर उपयोग करते हैं। बाजार सहभागी भौतिक सिक्कों और सिल्लियों के रूप में खरीदारी कर सकते हैं या फिर अंतरराष्ट्रीय कीमतों को ट्रैक करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ के जरिए निवेश कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर में मूल्य वर्गित होने के कारण चांदी की चाल डॉलर इंडेक्स के उतार-चढ़ाव से बहुत गहराई से जुड़ी है। जब भी डॉलर मजबूत होता है, विदेशी खरीदारों के लिए यह धातु महंगी हो जाती है, जबकि डॉलर की कमजोरी इसके भाव को पंख लगाने का काम करती है।
सोने के साथ इसका सह-संबंध भी व्यापारिक रणनीतियों का एक बड़ा आधार है। आमतौर पर जब सोना नई ऊंचाइयां छूता है, तो सुरक्षित निवेश मांग के सहारे चांदी भी उसी दिशा में कदम बढ़ाती है। विश्लेषक दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन को समझने के लिए गोल्ड/सिल्वर रेशियो यानी स्वर्ण-रजत अनुपात पर पैनी नजर रखते हैं। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। जब यह अनुपात बहुत अधिक हो जाता है, तो बाजार इसे चांदी के अवमूल्यन या सोने के अत्यधिक महंगे होने का संकेत मानता है। इसके विपरीत अनुपात में तेज गिरावट सोने को चांदी की तुलना में सस्ता दर्शा सकती है।
औद्योगिक खपत और वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी
चांदी केवल एक निवेश धातु नहीं है, बल्कि आधुनिक उद्योगों के लिए एक अनिवार्य कच्चा माल भी है। सभी धातुओं में तांबे और सोने से भी अधिक विद्युत चालकता होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सौर ऊर्जा उपकरणों में चांदी की व्यापक खपत होती है। खनन आपूर्ति की बात करें तो जमीन से निकलने वाली चांदी की मात्रा सोने की तुलना में कहीं अधिक है, और रिसाइक्लिंग दरें भी आपूर्ति को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि औद्योगिक मांग में किसी भी प्रकार का इजाफा कीमतों को तत्काल सहारा देता है, जबकि औद्योगिक मंदी कीमतों को नीचे धकेल देती है।
वैश्विक स्तर पर तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं चांदी की मांग को दिशा देती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं में इसका भारी उपयोग करते हैं। खासकर चीन के विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति वैश्विक खपत का रुझान तय करती है। दूसरी तरफ, भारत में आभूषणों, धार्मिक प्रचलनों और व्यक्तिगत उपयोग के लिए चांदी की भारी घरेलू मांग रहती है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों के संतुलन में अत्यंत निर्णायक भूमिका निभाती है।
अन्य मुद्राओं और धातुओं का ताजा परिदृश्य
मुद्रा और जिंस बाजारों में अन्य प्रमुख संपत्तियों में भी उठापटक साफ देखी जा रही है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.6900 के मध्य स्तर पर दो महीने के निचले स्तर के पास कंसोलिडेट करती दिखी। अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से सिकुड़कर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इस गिरावट का मुद्रा जोड़ी पर सीमित असर हुआ। उधर डॉलर की व्यापक मजबूती के बीच यूएसडी/जेपीवाई 158.00 से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर पर कारोबार कर रहा है। जापानी केंद्रीय बैंक की संभावित सख्ती और टोक्यो के हस्तक्षेप के जोखिमों पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती भारी पड़ रही है।
सोने की बात करें तो बुधवार को 4,200 डॉलर के स्तर पर खारिज होने के बाद यह 4,150 डॉलर के करीब गिरावट रोकने की जद्दोजहद कर रहा है। वहीं यूरो बनाम डॉलर की जोड़ी बुधवार को 1.1312 तक गिरने के बाद मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के आसपास फंसी हुई है, जो जनवरी के 1.2082 के उच्च स्तर से काफी नीचे है। आने वाले दिनों में रोजगार के आंकड़े और फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं के आधिकारिक बयान ही यह साफ करेंगे कि 61 डॉलर के ऊपर टिकी चांदी अपनी तेजी को आगे बढ़ा पाएगी या यील्ड का बढ़ता दबाव इसे नए सुधार की तरफ धकेल देगा।



















