सितंबर महीने के अंतिम कारोबारी दिनों में सोने के बाजार में तेज हलचल और भारी उठापटक देखने को मिल रही है। हालिया गिरावट के बाद पीली धातु 3,940 डॉलर प्रति औंस के अपने वार्षिक निचले दायरे के करीब फिसल गई थी। हालांकि, बुधवार को अमेरिकी कारोबारी सत्र की शुरुआत में सोने को एक त्वरित सहारा मिला और इसका भाव उछलकर लगभग 4,220 डॉलर के स्तर तक जा पहुंचा। लेकिन यह तेजी अधिक समय तक टिक नहीं पाई और मुनाफावसूली व डॉलर की मजबूती के चलते भाव तेजी से गिरकर लाल निशान में फिसल गया। बाद में यह गिरावट थमी और सर्राफा बाजार में भाव 4,150 डॉलर के करीब स्थिर होने की कोशिश करता दिखा, जबकि ताजा कारोबारी सत्र में सोना लगभग 4,180 डॉलर पर कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर
सोने की कीमतों में आए इस अचानक उछाल और उसके बाद दर्ज हुई गिरावट के पीछे संयुक्त राज्य अमेरिका से आए प्रमुख आर्थिक संकेतकों की अहम भूमिका रही है। हालिया आंकड़ों ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर की आगामी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं को काफी कमजोर कर दिया है। सप्ताह की शुरुआत में जहां फेड द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना 70 प्रतिशत से ऊपर मानी जा रही थी, वहीं नए आर्थिक आंकड़े आने के बाद यह घटकर सीधे 40 प्रतिशत के आसपास रह गई है।
अमेरिका में जारी हुए आर्थिक विकास, महंगाई और रोजगार से जुड़े सभी आंकड़े सकारात्मक दिशा की ओर संकेत कर रहे हैं। वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर के संशोधित अनुमान को पहले के 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.2 प्रतिशत कर दिया गया है। रोजगार के मोर्चे पर निजी क्षेत्र की स्थिति भी मजबूत दिखी, जहां एडीपी रोजगार परिवर्तन रिपोर्ट के अनुसार महीने के दौरान 90 हजार नए रोजगार सृजित हुए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि फेडरल रिजर्व का पसंदीदा महंगाई पैमाना, पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई प्राइस इंडेक्स, अगस्त महीने में उम्मीद से अधिक नरम रहा और 3.4 प्रतिशत पर टिका रहा। महंगाई में इस नरमी ने सर्राफा बाजार को शुरुआत में तेजी का ईंधन प्रदान किया।
ट्रेजरी यील्ड और मजबूत डॉलर बना सोने की राह में रोड़ा
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी रुकने की संभावनाओं के बावजूद सोने के सामने सबसे बड़ी अड़चन अमेरिकी ऋण बाजार से आ रही है। अमेरिका के 10-वर्षीय ट्रेजरी नोट पर यील्ड कई दशकों के नए उच्च स्तर 5.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अमेरिकी सरकार के लगातार बढ़ते विशाल कर्ज का अर्थ है कि बाजार में ट्रेजरी बॉन्ड की आपूर्ति लगातार बनी हुई है। इन बॉन्डों को खरीदने के लिए निवेशकों को अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होती है, जिसके चलते ग्रीनबैक यानी डॉलर इंडेक्स मजबूत बना हुआ है और वह सोने पर भारी पड़ रहा है।
चूंकि सोना अपने धारकों को कोई निश्चित ब्याज या नियमित यील्ड नहीं देता, इसलिए बॉन्ड यील्ड के 5.30 प्रतिशत के शिखर पर बने रहने से सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर और बॉन्ड अधिक आकर्षक विकल्प बन जाते हैं। यही वजह रही कि सोने ने 4,200 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार बनाई गई अपनी शुरुआती बढ़त को गंवा दिया और डॉलर के संभलने के साथ नीचे की ओर फिसल गया।
तकनीकी संरचना और दीर्घकालिक रुझान के मायने
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो निकट अवधि में सोने का रुझान कमजोर और दबाव में नजर आ रहा है, लेकिन लंबी अवधि के परिदृश्य में यह काफी स्थिर है और इसका जोखिम ऊपर की दिशा की ओर मुड़ा हुआ दिखाई देता है। मासिक चार्ट पर नजर डालें तो एक्सएयू/यूएसडी एक बुलिश 20-महीने के सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए से ऊपर लगातार ऊंचे निचले स्तर दर्ज कर रहा है, जो कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए एक बेहद सकारात्मक तकनीकी संकेत माना जाता है।
दैनिक तकनीकी पैमानों के अनुसार, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 34 के स्तर पर मौजूद है, जो बाजार के लगभग ओवरसोल्ड जोन के करीब होने की पुष्टि करता है। एमएसीडी सूचकांक -55.44 पर है जो इसके -26.03 के सिग्नल लाइन से नीचे बना हुआ है और इसका हिस्टोग्राम -29.41 पर नकारात्मक बना हुआ है। इसके अलावा 20-दिवसीय ईएमए 4,337 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,359 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,438 डॉलर पर स्थित हैं। साथ ही 50-दिवसीय एसएमए 4,363 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,555 डॉलर पर हैं, जहां 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे आने से तकनीकी डेथ क्रॉस बना हुआ है। बॉलिंगर बैंड्स 4,170 डॉलर से 4,557 डॉलर के दायरे में हैं जिसका मध्य बिंदु 4,364 डॉलर है। मौजूदा दैनिक स्तरों पर 4,203 डॉलर का पिवट स्तर महत्वपूर्ण है, जिसके ऊपर 4,228 डॉलर और 4,276 डॉलर पर रेसिस्टेंस तथा 4,155 डॉलर और 4,130 डॉलर पर सपोर्ट स्तर बने हुए हैं, जबकि इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,821 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच है।
मध्य पूर्व का तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य और कच्चे तेल की चाल
आने वाले दिनों में सोने का भाग्य मुख्य रूप से मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक संघर्ष और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर करेगा। हालांकि यह क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता नजर आ रहा है, लेकिन वैश्विक बाजारों को इस बात से थोड़ी राहत मिल रही है कि रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाला व्यापारिक जहाजों का आवागमन युद्ध-पूर्व स्तर के लगभग 80 प्रतिशत तक वापस आ चुका है। इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव और अधिक नहीं भड़कता, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने की पूरी संभावना है।
इसके अलावा अमेरिका में मध्यावधि चुनाव बेहद नजदीक हैं। ऐसी राजनीतिक परिस्थितियों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कम से कम अगले दो महीनों तक कोई भी कड़ा या जोखिम भरा कदम उठाए जाने की संभावना बहुत कम है। जब तक भू-राजनीतिक चिंताएं बनी रहेंगी, अमेरिकी डॉलर को सोने के मुकाबले आगे बढ़ने का अवसर मिलता रहेगा। लेकिन जैसे ही कच्चे तेल के दाम नीचे आएंगे और मध्य पूर्व में तनाव कम होगा, बाजी पूरी तरह से सोने के पक्ष में पलट सकती है।
वैश्विक मुद्राओं और अन्य वित्तीय बाजारों की स्थिति
बुधवार के कारोबारी सत्र में केवल सोना ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा और डिजिटल एसेट बाजारों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी एशियाई सत्र के दौरान 0.6950 के करीब दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त माह के अंतर्निहित सीपीआई आंकड़े उम्मीद से कमजोर आने से रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें ठंडी पड़ गईं, वहीं चीन के पीएमआई आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कोई सहारा नहीं मिला।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 157.00 के नीचे बना रहा। बैंक ऑफ जापान द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की संभावनाओं और सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को समर्थन दिया, जिससे जापान के कमजोर फैक्ट्री उत्पादन और खुदरा बिक्री के आंकड़ों का असर सीमित रहा। यूरोपीय मुद्रा यूरो की बात करें तो यूरो/यूएसडी 1.1312 के स्तर तक गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया, जो जनवरी के 1.2082 के उच्च स्तर से काफी नीचे है। यूरो में यह कमजोरी मजबूत अमेरिकी डॉलर, वैश्विक अनिश्चितता और यूरोप के ऊर्जा संकट के कारण आई है, हालांकि यूरोजोन में महंगाई का नया झटका यूरो को अस्थायी सहारा दे सकता है। उधर क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन संघर्ष करते हुए 83,000 डॉलर के तत्काल सपोर्ट स्तर को बचाने में जुटा रहा, जबकि एथेरियम 2,600 डॉलर के निचले और 2,700 डॉलर के ऊपरी स्तर के बीच सीमित रहा, और रिपल 1.50 डॉलर के पास मंडराता रहा।



















