अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में इस समय भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों को लेकर असमंजस का माहौल बना हुआ है। इसी खींचतान के बीच अमरीकी डॉलर के मुकाबले स्विस फ्रैंक (USD/CHF) यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में 0.8090 के आसपास स्थिर बना हुआ है। एक तरफ जहां मध्य पूर्व में अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और आर्थिक टकराव के कारण निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश माने जाने वाले स्विस फ्रैंक (CHF) की तरफ बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ अमरीकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने अमरीकी डॉलर (USD) को मजबूती प्रदान की है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार USD/CHF जोड़ी 0.8091 के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.8099 से 0.10% की मामूली गिरावट दर्शाती है। बाजार प्रतिभागी अब अमरीका के आगामी महंगाई आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं, जो मुद्रा जोड़ों की अगली चाल तय करेंगे।
मध्य पूर्व में बढ़ा सैन्य व आर्थिक तनाव, सेफ-हेवन संपत्तियों की मांग तेज
वैश्विक बाजार में स्विस फ्रैंक की मौजूदा मजबूती का मुख्य कारण मध्य पूर्व में ईरान और अमरीका के बीच गहराता संकट है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए सैन्य हमलों के बाद ईरान ने अमरीका को 'आर्थिक युद्ध' की चेतावनी दी है। इसके अलावा ईरान द्वारा अमरीकी युद्धपोतों पर उन्नत मिसाइलें दागने के दावों ने वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों को काफी बढ़ा दिया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या अनिश्चितता का माहौल बनता है, तो दुनिया भर के निवेशक जोखिम भरे परिसंपत्तियों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित वित्तीय ठिकानों में लगाते हैं। स्विट्जरलैंड की राजनीतिक तटस्थता, मजबूत आर्थिक आधार और विशाल केंद्रीय बैंक भंडार के कारण स्विस फ्रैंक को दुनिया की सबसे सुरक्षित मुद्राओं (सेफ-हेवन) में गिना जाता है। यही वजह है कि जारी तनाव के बीच स्विस फ्रैंक को निचले स्तरों पर मजबूत समर्थन मिल रहा है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और अमरीकी महंगाई आंकड़ों पर निवेशकों की नजर
अमरीकी डॉलर की तरफ देखें तो निवेशकों के बीच फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की उम्मीदें तेज हो गई हैं। CME FedWatch Tool के आंकड़ों के मुताबिक, व्यापारी अगले सप्ताह होने वाली फेड की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी की 60.6% संभावना देख रहे हैं। इस दर वृद्धि की प्रत्याशा ने अमरीकी डॉलर को टूटने से बचाया है। हालांकि, बाजार की असली दिशा अमरीका से जारी होने वाले आगामी उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों से तय होगी। यदि अमरीकी मुद्रास्फीति के आंकड़े अनुमान से अधिक गर्म या ऊंचे रहते हैं, तो यह फेड को अपनी सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के लिए बाध्य करेगा। ऐसी स्थिति में अमरीकी डॉलर को स्विस फ्रैंक के मुकाबले अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है और USD/CHF की कीमतों में उछाल आ सकता है।
USD/CHF का तकनीकी विश्लेषण: मुख्य सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
दैनिक चार्ट और तकनीकी संकेतकों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि USD/CHF का रुझान निकट अवधि में मामूली रूप से सकारात्मक (बुलिश) बना हुआ है। यह मुद्रा जोड़ी वर्तमान में अपने बॉलिंजर बैंड के मध्य स्तर 0.8075/0.8076 से ऊपर कारोबार कर रही है और इसे 0.8000 पर स्थित 100-दिवसीय मूविंग एवरेज का मजबूत समर्थन प्राप्त है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स RSI(14) फिलहाल 52 के स्तर पर मंडरा रहा है, जो यह संकेत देता है कि बाजार में आक्रामक खरीदारी के बजाय एक क्रमिक और स्थिर तेजी की गति बनी हुई है। तकनीकी दृष्टिकोण से ऊपरी स्तरों पर पहला मुख्य प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) 0.8175 पर स्थित ऊपरी बॉलिंजर बैंड के पास है, जबकि R1 0.8115 और R2 0.8140 पर तकनीकी बाधाएं मौजूद हैं। इसके विपरीत, नीचे की ओर पहला तात्कालिक सहारा (सपोर्ट) 0.8075/0.8072 (S1) पर है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है तो 0.8053 (S2), 0.8000 का 100-दिवसीय मूविंग एवरेज और 0.7980/0.7977 पर स्थित निचला बॉलिंजर बैंड एक मजबूत मांग क्षेत्र का निर्माण करते हैं, जब तक यह क्षेत्र सुरक्षित है,USD/CHF की संरचना सुदृढ़ बनी रहेगी।
स्विस फ्रैंक की संरचनात्मक विशेषताएं, इतिहास और यूरो से गहरा संबंध
स्विस फ्रैंक (CHF) स्विट्जरलैंड की आधिकारिक मुद्रा है और यह दुनिया की सबसे अधिक कारोबार वाली शीर्ष 10 मुद्राओं में शामिल है। इसका दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम स्विट्जरलैंड की अपनी अर्थव्यवस्था के कुल आकार से भी काफी अधिक है। स्विस फ्रैंक का मूल्य मुख्य रूप से वैश्विक बाजार की धारणा, स्विट्जरलैंड के आर्थिक स्वास्थ्य और स्विस नेशनल बैंक (SNB) के कदमों से तय होता है। इतिहास पर नजर डालें तो साल 2011 से 2015 के बीच स्विस फ्रैंक को यूरो (EUR) के साथ एक निश्चित विनिमय दर (पेग) पर बांध दिया गया था। हालांकि, 2015 में जब SNB ने इस पेग को अचानक हटाया, तो स्विस फ्रैंक के मूल्य में 20% से अधिक का जोरदार उछाल आया, जिससे वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया था। भले ही अब यह पेग प्रभावी नहीं है, लेकिन स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था यूरोपीय संघ पर अत्यधिक निर्भर होने के कारण आज भी स्विस फ्रैंक का यूरो के साथ 90% से अधिक का सीधा और मजबूत संबंध देखा जाता है।
स्विस नेशनल बैंक (SNB) की मौद्रिक नीति और आर्थिक कारक
स्विस नेशनल बैंक (SNB) अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में वर्ष में केवल चार बार (हर तिमाही में एक बार) अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा के लिए बैठक करता है। SNB का मुख्य लक्ष्य वार्षिक मुद्रास्फीति दर को 2% से नीचे बनाए रखना है। जब स्विट्जरलैंड में महंगाई इस लक्ष्य से ऊपर जाती है या भविष्य में इसके बढ़ने का जोखिम होता है, तो SNB अपनी नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर स्विस फ्रैंक के लिए सकारात्मक होती हैं क्योंकि वे निवेशकों को बेहतर रिटर्न देती हैं। इसके विपरीत, दरों में कटौती से फ्रैंक कमजोर होता है। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड के आर्थिक आंकड़े जैसे कि चालू खाता अधिशेष, जीडीपी वृद्धि दर, बेरोजगारी दर और उपभोक्ता विश्वास सूचकांक भी मुद्रा की चाल निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की स्थिति: येन, ऑसी डॉलर, सोना और तेल
वैश्विक वित्तीय बाजारों के अन्य हिस्सों में भी व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD 0.7200 के ऊपर बना हुआ है, जो 14 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा चालू माह में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, USD/JPY छह महीने के निचले स्तर 153.50 के आसपास कारोबार कर रहा है। जापान में वेतन वृद्धि के मजबूत आंकड़ों और दूसरी तिमाही के संशोधित जीडीपी आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगले सप्ताह ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को पुख्ता कर दिया है, जिससे जापानी येन में तेजी आई है। इसी बीच, सुरक्षित निवेश मांग के कारण सोने की कीमतों में भी दो दिनों की गिरावट के बाद सुधार देखा गया है। कमोडिटी बाजार में, भले ही कच्चे तेल की कीमतें स्थिर दिख रही हों, लेकिन अमरीकी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल क्रैक स्प्रेड हाल ही में $100 प्रति बैरल के पार निकलकर $102.00 के नए इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो रिफाइनिंग मार्जिन और ईंधन की मांग में मजबूती का संकेत देता है।



















