न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वैश्विक मंच पर एकत्र हुए विश्व नेताओं के बीच एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची सानाए और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक शिखर बैठक में हिस्सा लेकर दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा साझेदारी को नई गति देने पर जोर दिया। इस बैठक के दौरान व्यापार, तकनीक और वैश्विक कूटनीति के कई अहम आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को लेकर खुली और स्पष्ट चर्चा भी शामिल रही।
रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग और सात साल का निवेश रिकॉर्ड
इस उच्चस्तरीय संवाद में प्रधानमंत्री ताकाइची सानाए ने दोनों देशों के मजबूत वित्तीय संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जापान पिछले लगातार सात वर्षों से अमेरिका में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक बना हुआ है। दोनों नेताओं ने आने वाले वर्षों में भी आपसी आर्थिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में विशेष रूप से भविष्य की तकनीकों और आर्थिक सुरक्षा के आधार स्तंभों पर जोर दिया गया। ताकाइची सानाए के अनुसार, दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, सेमीकंडक्टर निर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के क्षेत्र में सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है। दोनों पक्षों का मानना है कि आधुनिक तकनीकी दौर में इन महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा और नवाचार द्विपक्षीय साझेदारी की रीढ़ हैं।
मुद्रा बाजार की चाल और जापानी येन की स्थिति
राजनयिक स्तर पर जारी इस संवाद के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी हलचल दर्ज की गई। यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) मुद्रा जोड़ी दैनिक कारोबार में 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 157.55 के स्तर पर दर्ज की गई। इसके साथ ही एशियाई कारोबारी सत्र में यह जोड़ी 157.00 के मध्य स्तर के करीब मंडराती रही, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के बेहद निकट है।
जापानी येन (JPY) विश्व स्तर पर सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली प्रमुख मुद्राओं में शामिल है। इसका बाजार मूल्य मुख्य रूप से जापानी अर्थव्यवस्था के समग्र प्रदर्शन, बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियों, जापानी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच के अंतर और व्यापारियों के बीच बाजार में जोखिम उठाने की धारणा पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक रूप से येन को एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के रूप में भी देखा जाता है। जब वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता या तनाव बढ़ता है, तब निवेशक स्थिरता और विश्वसनीयता के कारण जापानी मुद्रा की ओर रुख करते हैं, जिससे अन्य जोखिम भरी मुद्राओं की तुलना में येन को मजबूती मिलती है।
बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति और नीतिगत बदलाव
बैंक ऑफ जापान (BoJ) के प्राथमिक जनादेश में मुद्रा नियंत्रण एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, जिसके चलते उसके नीतिगत फैसले सीधे तौर पर येन की दिशा तय करते हैं। बैंक ऑफ जापान कभी-कभी मुद्रा बाजारों में सीधे हस्तक्षेप भी करता रहा है, जिसका उद्देश्य आमतौर पर येन के मूल्य को घटाना रहा है। हालांकि, अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की राजनीतिक चिंताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ऐसे सीधे हस्तक्षेपों से अक्सर बचता है।
वर्ष 2013 से 2024 के दशक के दौरान बैंक ऑफ जापान ने अत्यंत ढीली मौद्रिक नीति (अल्ट्रा-लूज मॉनेटरी पॉलिसी) का पालन किया। इस दीर्घकालिक रुख के कारण बैंक ऑफ जापान और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व, के बीच नीतिगत अंतर काफी बढ़ गया था। इस नीतिगत विचलन ने 10-वर्षीय अमेरिकी और जापानी सरकारी बॉन्ड के यील्ड अंतर को काफी चौड़ा कर दिया, जिससे जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को लगातार बढ़त मिली और येन में गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, वर्ष 2024 में बैंक ऑफ जापान ने इस अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला किया। हाल ही में बैंक ऑफ जापान ने अपनी सामान्यीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय बाजार की हफ्तों पुरानी अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप रहा। यद्यपि नीति को सामान्य करने के इस कदम ने येन को एक बुनियादी सहारा प्रदान किया है, लेकिन केंद्रीय बैंक के अपेक्षाकृत नरम रुख वाले ब्याज दर वृद्धि दृष्टिकोण के चलते येन पर दबाव भी बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के कारण डॉलर मजबूत बना हुआ है, हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने डॉलर की अतिरिक्त बढ़त को सीमित कर रखा है।
एशियाई सत्र में अन्य वैश्विक बाजारों और मुद्राओं का रुख
एशियाई कारोबारी सत्र में केवल जापानी येन ही नहीं, बल्कि अन्य संपत्तियों और प्रमुख मुद्रा जोड़ियों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा गया और बुधवार के सत्र में यह 0.7100 के स्तर का परीक्षण करती नजर आई। ऑस्ट्रेलिया के ताजा पीएमआई (PMI) आंकड़ों ने दिखाया कि वहां विनिर्माण क्षेत्र संकुचन में फिसल गया है, जबकि सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर लगातार दूसरे महीने धीमी रही है। इन कमजोर आर्थिक आंकड़ों और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर नीचे की ओर दबाव बढ़ाया।
कमोडिटी बाजार की बात करें तो सोने की कीमतों में भी नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा गया। एशियाई बाजार में बुधवार को सोना 4,350 डॉलर के करीब संघर्ष करता नजर आया, जिससे पहले के 4,300 डॉलर से नीचे के स्तर से आई तेजी का कुछ हिस्सा वापस कम हो गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित बैठक से पहले निवेशक और व्यापारी सोने में नई दिशात्मक स्थिति बनाने से बचते दिखाई दिए। इसके अलावा, बाजारों ने अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं के दौर के पूरा होने पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी।
वैश्विक मैक्रो स्थितियां और पूंजीगत लागत
व्यापक आर्थिक परिदृश्य में कई अन्य वित्तीय कारक भी सक्रिय हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े पूंजीगत व्यय (AI capex) ने फेडरल रिजर्व के मुद्रास्फीति अनुमानों में जगह बना ली है, जिससे अक्टूबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावना आधी-आधी संभावना से भी आगे बढ़ गई है। इसके अलावा, बजट पेश होने से पहले ब्रिटेन का वित्तीय हेडरूम आधा रह गया है और फ्रांसीसी क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (CDS) 2020 के बाद के सबसे व्यापक स्तर पर पहुंच गए हैं। न्यूयॉर्क में ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान की उपस्थिति के साथ खाड़ी देशों के लिए समय तय रहा, जबकि कोई ईरानी द्विपक्षीय बैठक निर्धारित नहीं रही। इन परिस्थितियों के बीच बाजार ने अलग-अलग पूंजीगत लागतों पर समान तकनीकी विकास का मूल्यांकन किया है।



















