चीन के केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने नए कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीनी युआन के लिए दैनिक संदर्भ दर 6.7698 तय की है। यह दर शुक्रवार को निर्धारित 6.7743 के स्तर से थोड़ी मजबूत है, हालांकि यह रॉयटर्स के 6.7083 के अनुमान से कमजोर दर्ज की गई है। केंद्रीय बैंक द्वारा तय की जाने वाली यह दर मुद्रा बाजार में युआन के दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा तय करती है और इसे चीनी अर्थव्यवस्था के नीतिगत रुख का अहम संकेत माना जाता है।
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की नीतियां और संस्थागत ढांचा
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के प्रमुख मौद्रिक नीतिगत लक्ष्यों में कीमतों की स्थिरता बनाए रखना, विनिमय दर को स्थिर रखना और समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देना शामिल है। इसके साथ ही बैंक वित्तीय सुधारों को लागू करने, विशेष रूप से घरेलू वित्तीय बाजार के विकास और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खोलने की दिशा में काम करता है। संस्थागत स्तर पर यह बैंक किसी पश्चिमी केंद्रीय बैंक की तरह पूरी तरह स्वायत्त निकाय नहीं है, बल्कि यह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार के स्वामित्व में आता है।
बैंक के संचालन और नीतिगत दिशा पर स्टेट काउंसिल के अध्यक्ष द्वारा नामित चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कमेटी सचिव का निर्णायक प्रभाव होता है। वर्तमान में पैन गोंगशेंग केंद्रीय बैंक के गवर्नर और पार्टी कमेटी सचिव दोनों अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस दोहरे नेतृत्व की वजह से मौद्रिक नीतियों और सरकारी प्राथमिकताओं के बीच सीधा समन्वय बना रहता है।
मौद्रिक नीति के साधन और बेंचमार्क दरें
पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में चीनी केंद्रीय बैंक अपने व्यापक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मौद्रिक नीति उपकरणों के एक विस्तृत सेट का इस्तेमाल करता है। इनमें मुख्य रूप से सात दिवसीय रिवर्स रेपो रेट, मीडियम-टर्म लेंडिंग फैसिलिटी, विदेशी मुद्रा बाजार में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप और बैंकों के लिए रिजर्व रिक्वायरमेंट रेश्यो शामिल हैं। इन तमाम साधनों के बीच लोन प्राइम रेट चीन की मुख्य बेंचमार्क ब्याज दर के तौर पर काम करती है।
लोन प्राइम रेट में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर बाजार में वाणिज्यिक ऋणों, बंधक कर्जों और बचत पर मिलने वाले ब्याज को तय करता है। इस बेंचमार्क दर को समायोजित करके चीनी केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा रेनमिनबी की विनिमय दरों को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित और संचालित करता है।
चीन में निजी बैंकिंग का विस्तार
चीन के वित्तीय तंत्र में सरकारी बैंकों का भारी दबदबा रहा है, लेकिन देश में 19 निजी बैंक भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। हालांकि यह संख्या पूरे वित्तीय तंत्र की तुलना में काफी छोटा हिस्सा है, लेकिन डिजिटल और खुदरा वित्तपोषण में इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। इन निजी संस्थाओं में अग्रणी डिजिटल ऋणदाता वीबैंक और माईबैंक हैं, जिन्हें तकनीकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों टेनसेंट और आंट ग्रुप का समर्थन प्राप्त है।
चीनी सरकार ने साल 2014 में घरेलू निजी पूंजी से पूरी तरह वित्तपोषित ऋणदाताओं को देश के इस राज्य-प्रधान वित्तीय क्षेत्र में परिचालन शुरू करने की औपचारिक मंजूरी दी थी। तब से ये डिजिटल मंच छोटे व्यवसायों और आम उपभोक्ताओं को तेजी से वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने में जुटे हैं।
डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में सुस्ती
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी ने नए सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की है। यह जोड़ी शुक्रवार के निचले स्तरों के करीब 0.7100 के मध्य दायरे में कारोबार करती दिखाई दी। अमेरिकी डॉलर को मजबूत सीपीआई आंकड़ों से बल मिला है, जिसने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दांव को फिर से हवा दे दी है।
इसके अलावा मध्य पूर्व में गहराते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई झड़पों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को और बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सख्त नीतिगत रुख की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में संभावित भारी गिरावट को सीमित करने का काम कर रही हैं।
बैंक ऑफ जापान और फेड बैठक से पहले येन सीमित दायरे में
अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन जोड़ी पिछले मंगलवार को छुए गए अपने सात महीने के निचले स्तर के पास कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रही है। बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति के फैसले और शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की नीतिगत घोषणा से पहले ज्यादातर ट्रेडर्स सतर्क होकर किनारे बैठ गए हैं।
जापानी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की तेज गति की संभावनाओं से जापानी येन को समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर अमेरिकी फेड की सख्त दर नीतियों की संभावना और भू-राजनीतिक जोखिम अमेरिकी डॉलर को मजबूत बनाए हुए हैं, जिससे इस करेंसी जोड़ी में सप्ताह की शुरुआत में सीमित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
सोने की कीमतों पर मौद्रिक फैसलों और डॉलर का दबाव
सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें शुक्रवार को 4,300 डॉलर प्रति औंस से नीचे के स्तरों से आई हल्की रिकवरी को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। वैश्विक केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों से पहले सोने का कारोबार बेहद शांत और सुस्त रुख के साथ शुरू हुआ है। अमेरिका के हालिया मुद्रास्फीति आंकड़ों ने सितंबर में फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाओं को मजबूती दी है, जिससे बिना ब्याज वाली इस पीली धातु की बढ़त थम गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव सुरक्षित विकल्प के तौर पर अमेरिकी डॉलर को लगातार सहारा दे रहा है। इस मजबूत डॉलर के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के खरीदार बैकफुट पर बने हुए हैं और कीमतों में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिल रहा है।



















