वैश्विक ऊर्जा बाजार में अचानक पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव ने मुद्रा बाजार के समीकरणों को हिला दिया है। सऊदी अरब के एक प्रमुख बुनियादी तेल ढांचे पर ड्रोन स्ट्राइक के बाद जबसे मुख्य पाइपलाइन को एहतियातन बंद किया गया है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के भाव चार महीने के उच्चतम स्तर के करीब जा पहुंचे हैं। पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े निर्यातक होने के नाते इस तेजी का सीधा फायदा कनाडाई डॉलर को मिला है, जिसने अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले हालिया गिरावट के सिलसिले को थाम दिया है।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमला और आपूर्ति संकट
सऊदी अरब के तेल तंत्र पर हाल ही में हुए ड्रोन हमले ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाइपास करने वाले एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग को बाधित कर दिया है। गुरुवार को हुए इस हमले के तुरंत बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से होने वाले तेल प्रवाह को पूरी तरह निलंबित कर दिया। सऊदी प्रशासन की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पाइपलाइन का सामान्य परिचालन दोबारा कब से शुरू हो पाएगा। क्षेत्रीय व्यापार गलियारों को लेकर बातचीत में हो रही देरी और इस मार्ग के बंद रहने से वैश्विक बाजारों में ईंधन की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।
मुद्रा विनिमय दर पर असर और तकनीकी स्तर
इस आपूर्ति संकट के बीच सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/सीएडी विनिमय दर में पिछले तीन दिनों से जारी तेजी पर ब्रेक लग गया और यह 1.3870 के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई दी। हालांकि तकनीकी चार्ट्स पर मुद्रा जोड़ी अब भी कड़े प्रतिरोध का सामना कर रही है। दैनिक चार्ट पर 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए 1.3913 पर एक मजबूत ऊपरी बाधा बना हुआ है। जब तक यह स्तर पार नहीं होता, तब तक तेजी का बड़ा दायरा सीमित रहेगा। नीचे की ओर नौ-दिवसीय ईएमए 1.3842 पर तत्काल सहारा दे रहा है, जिसके टूटने पर बिकवाली का दबाव गहरा सकता है। इस बीच 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 49 पर दर्ज हुआ है, जो न तो अत्यधिक खरीद और न ही बिकवाली का संकेत देते हुए तटस्थ गति का इशारा कर रहा है।
अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
कनाडाई डॉलर को मिले तात्कालिक लाभ के बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आक्रामक रुख इस जोड़ी को फिर से उछाल सकता है। अमेरिका के लेबर स्टैटिस्टिक्स ब्यूरो द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई में मासिक आधार पर 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही बारह महीनों की वार्षिक महंगाई दर 3.4% पर पहुंच गई है, जो विश्लेषकों के अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप है। खाद्य और ऊर्जा की अस्थिर कीमतों को अलग रखने वाला कोर सीपीआई मासिक आधार पर 0.3% बढ़ा, जो पिछले 0.2% और विश्लेषकों के 0.2% के अनुमान से ज्यादा गर्म साबित हुआ है।
इन मजबूत महंगाई आंकड़ों के बाद बाजार में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें अचानक बढ़ गई हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े दर्शाते हैं कि आगामी बुधवार की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी किए जाने की संभावना अब लगभग 87% तक पहुंच चुकी है, जो केवल एक सप्ताह पहले 59% थी। स्कॉटियाबैंक के विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच अल्पकालिक ब्याज दर अंतर कुछ स्थिरता प्रदान कर रहा है, जिससे कनाडाई डॉलर को थोड़े समय के लिए एक स्थिर आधार मिलता रहेगा।
कनाडाई अर्थव्यवस्था, बैंक ऑफ कनाडा और कच्चे तेल का अंतर्संबंध
कनाडाई डॉलर की विनिमय दर कई बुनियादी आर्थिक घटकों पर टिकी होती है। कनाडा के कुल निर्यात में पेट्रोलियम का हिस्सा सबसे विशाल है, जिसके चलते तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर सीधे इस मुद्रा के मूल्य पर पड़ता है। जब तेल महंगा होता है, तो कनाडा का व्यापार संतुलन अनुकूल होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे कुल मुद्रा मांग में इजाफा होता है। इसके अलावा देश का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, रोजगार रिपोर्ट, विनिर्माण और सेवा पीएमआई जैसे वृहद आर्थिक संकेतक भी मुद्रा की दशा तय करते हैं।
देश का केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ कनाडा वाणिज्यिक बैंकों के लिए उधारी दरों का निर्धारण करता है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य मुद्रास्फीति को 1% से 3% के दायरे में नियंत्रित रखना है। आधुनिक अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह सुगम होने के कारण जब महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं। ऊंची दरों से आकर्षित होकर वैश्विक निवेशक अधिक पूंजी लगाते हैं, जिससे कनाडाई डॉलर की मांग में उछाल आता है। केंद्रीय बैंक मात्रात्मक सख्ती या ढील के जरिए भी साख की स्थिति को नियंत्रित करता है, जो मुद्रा की ताकत पर सीधा असर डालती है।
लाइव कमोडिटी बाजार का हाल
वर्तमान में कमोडिटी एक्सचेंज पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स (सीएल=एफ) की कीमतें 100.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही हैं, जो पिछले बंद 101.91 डॉलर से 1.58% की गिरावट दिखा रही हैं। पिछले 52 हफ्तों के दौरान कच्चे तेल ने 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर का दायरा तय किया है। दैनिक तकनीकी चार्ट पर 14-दिवसीय आरएसआई 64 के स्तर पर चल रहा है, जबकि एमएसीडी 5.12 पर बना हुआ है जो सिग्नल लाइन 4.34 से ऊपर 0.78 के सकारात्मक हिस्टोग्राम के साथ मजबूती प्रदर्शित कर रहा है। मूविंग एवरेजेस में 20-दिवसीय ईएमए 94.81 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 89.11 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 79.29 डॉलर पर स्थित हैं। ट्रेडिंग के लिए पिवट बिंदु 100.99 डॉलर पर है, जहां पहला रेजिस्टेंस 102.79 डॉलर और दूसरा 105.28 डॉलर पर है, जबकि सपोर्ट 98.50 डॉलर और 96.70 डॉलर पर आंका गया है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और सोने पर भू-राजनीति का प्रभाव
मध्य पूर्व में भड़के भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज क्षेत्र में टकराव का व्यापक असर अन्य संपत्तियों पर भी देखा जा रहा है। सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शुरुआती कारोबार में दबाव में रहा और शुक्रवार के निचले स्तर 0.7100 के मध्य दायरे में आ गया। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर सात महीने के निचले स्तर के आसपास सीमित दायरे में रहा, क्योंकि व्यापारी बुधवार को फेडरल रिजर्व और शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच पीली धातु यानी सोना भी 4,300 डॉलर प्रति औंस से नीचे के स्तरों से हल्की बढ़त लेने के बाद सुस्त दिखा, क्योंकि अमेरिकी ब्याज दर बढ़ोतरी के अंदेशे और ईरान-अमेरिका तनाव ने गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के आकर्षण को सीमित रखा है।


















