अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने सोमवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान जोरदार वापसी दर्ज की। पिछले कारोबारी सत्र में लगभग 4 प्रतिशत की तीव्र गिरावट का सामना करने के बाद, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल सुधरकर 99.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की कीमतें अब लगभग चार महीने के उच्चतम स्तर की ओर बढ़ रही हैं। इस अचानक आई तेजी का मुख्य कारण सऊदी अरब में एक विशाल तेल पाइपलाइन पर हुआ ड्रोन हमला है, जिसके बाद प्रशासन को इस अहम मार्ग से तेल का प्रवाह तत्काल रोकना पड़ा है।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद होने से वैश्विक आपूर्ति पर असर
सऊदी अरब ने अपने अहम बुनियादी ढांचे पर हुए ड्रोन हमलों के बाद एहतियाती कदम उठाते हुए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का परिचालन पूरी तरह रोक दिया है। यह पाइपलाइन गुरुवार को हुए हमलों के तुरंत बाद बंद कर दी गई थी। ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह मार्ग इसलिए बेहद संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना सऊदी अरब के आंतरिक इलाकों से कच्चे तेल को सीधे लाल सागर के बंदरगाहों तक पहुंचाता है। अधिकारियों ने अब तक इस बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है कि इस मार्ग पर सामान्य कामकाज कब से बहाल हो पाएगा।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पूरे सऊदी अरब में फैली हुई है और इसकी क्षमता प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल कच्चा तेल परिवहन करने की है। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज के समुद्री मार्ग पर नियंत्रण को लेकर गतिरोध बना हुआ है, तब तक मध्य पूर्व से सुरक्षित तेल प्रवाह जारी रखने में इस पाइपलाइन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है। इसके अचानक बंद होने से उन वैकल्पिक मार्गों पर भारी दबाव आ गया है जो संघर्ष प्रभावित समुद्री रास्तों को बाईपास करते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर कूटनीतिक बातचीत स्थगित
पाइपलाइन बंद होने के साथ-साथ क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान निकालने के प्रयास भी थम गए हैं। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी के विवरण के अनुसार, ईरान और कई खाड़ी देशों के बीच एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर स्थापित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित बातचीत को स्थगित कर दिया गया है। इस योजना का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। इस प्रस्ताव को लेकर सऊदी अरब ने अपनी चिंताएं जताई थीं, जबकि बहरीन ने इस बातचीत में शामिल होने से पूरी तरह इनकार कर दिया था।
ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन से जुड़े एलियास हद्दाद ने चेतावनी दी है कि ब्रेंट क्रूड में हालिया उछाल के बाद भले ही कुछ नरमी दिखी हो, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम तेल की कीमतों में किसी भी बड़ी और टिकाऊ गिरावट को रोके रखेंगे। उनका मानना है कि ईरान के पास 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले दबाव बनाए रखने और रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान पहुंचाने के पूरे कारण मौजूद हैं। ऐसे में विश्लेषकों का अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली कोई भी राहत भरी गिरावट बहुत छोटी और सीमित साबित होगी।
कच्चे तेल के प्रमुख प्रकार और डब्ल्यूटीआई की विशेषताएं
डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकने वाले प्रमुख कच्चे तेलों में से एक है। इसका पूरा नाम वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट है, जो ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ दुनिया के तीन सबसे बड़े तेल प्रकारों में शामिल है। अपने अपेक्षाकृत कम घनत्व और कम सल्फर मात्रा के कारण इसे बाजार में 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड भी कहा जाता है। यह एक उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल है, जिसे रिफाइन करना आसान होता है।
डब्ल्यूटीआई की आपूर्ति मुख्य रूप से अमेरिका में होती है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है। कुशिंग को तेल उद्योग में दुनिया का पाइपलाइन चौराहा माना जाता है। वैश्विक वित्तीय बाजारों और मीडिया में डब्ल्यूटीआई की कीमतों को कच्चे तेल के एक प्रमुख बेंचमार्क के तौर पर लगातार कोट किया जाता है।
तेल की कीमतों को तय करने वाले प्रमुख आर्थिक कारक
अन्य संपत्तियों की तरह, कच्चे तेल की कीमतों का निर्धारण भी मूल रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करता है। वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी आने पर कच्चे तेल की खपत और मांग बढ़ती है, जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ती है, तो मांग घटने से कीमतें गिरती हैं। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों में अचानक तेज उछाल ला सकते हैं।
अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी डब्ल्यूटीआई के भाव को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। चूंकि कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है। डॉलर के मजबूत होने पर तेल खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
इन्वेंट्री आंकड़े और तेल के दाम
अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा हर हफ्ते जारी की जाने वाली तेल इन्वेंट्री रिपोर्ट डब्ल्यूटीआई की कीमतों को गहराई से प्रभावित करती हैं। तेल भंडारों में होने वाले बदलाव आपूर्ति और मांग के रुझान को दर्शाते हैं। यदि इन्वेंट्री में गिरावट आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है और कीमतें ऊपर जाती हैं। दूसरी ओर, भंडारों में वृद्धि अधिक आपूर्ति का संकेत देती है, जिससे कीमतें नीचे आ सकती हैं।
एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को प्रकाशित करता है, जबकि सरकारी एजेंसी ईआईए अपनी रिपोर्ट बुधवार को सामने लाती है। लगभग 75 प्रतिशत मौकों पर इन दोनों रिपोर्टों के आंकड़े एक दूसरे से 1 प्रतिशत के दायरे में ही रहते हैं। हालांकि, ईआईए एक सरकारी संस्था होने के कारण वित्तीय बाजार उसके आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय मानते हैं।
ओपेक और ओपेक प्लस का बाजार पर नियंत्रण
ओपेक यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है। यह समूह साल में दो बार होने वाली बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा सामूहिक रूप से तय करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटा कम करने का निर्णय लेता है, तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके उलट, जब यह समूह उत्पादन बढ़ाता है, तो आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में नरमी आती है। ओपेक प्लस एक विस्तृत मंच है जिसमें 10 अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश भी शामिल हैं, जिनमें रूस सबसे प्रमुख सदस्य है।
मुद्रा और कमोडिटी बाजार पर भू-राजनीतिक असर
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने और होर्मुज में संघर्ष की स्थिति पैदा होने से वित्तीय बाजारों के अन्य वर्गों में भी हलचल तेज हुई है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) सप्ताह की शुरुआत में कमजोरी के साथ 0.7100 के मध्य स्तरों पर कारोबार करता रहा। अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के चलते फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं और सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग ने इस जोड़ी पर दबाव बनाया, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक से जुड़ी सख्त नीति की उम्मीदें नुकसान को सीमित रखने में मदद कर सकती हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) सात महीने के निचले स्तर के पास स्थिर बना हुआ है। व्यापारी बुधवार को आने वाले अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के फैसले और शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं। जापानी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की उम्मीदें येन को समर्थन दे रही हैं, जबकि डॉलर को भू-राजनीतिक जोखिमों से सहारा मिल रहा है।
सोने के बाजार में भी सुस्ती देखी गई। सोना शुक्रवार के निचले स्तरों से मामूली सुधार के बाद 4,300 डॉलर से नीचे के दायरे में सीमित रहा। केंद्रीय बैंकों की आगामी बैठकों से पहले निवेशक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को मजबूत किया है, जिससे बिना ब्याज वाली इस पीली धातु की बढ़त सीमित हो गई है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान की है, जिससे सोने में खरीदारी की गति सुस्त बनी हुई है।


















