घरेलू सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की चमक फीकी पड़ती दिखी। दुनिया भर के बुलियन बाजार में भारी बिकवाली के दबाव के चलते भारत में भी सोने के दाम लगातार गिर रहे हैं। स्पॉट गोल्ड फिसलकर 4,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया, तो स्पॉट चांदी भी 62 डॉलर प्रति औंस के नीचे लुढ़क गई। दोनों कीमती धातुओं में 1 से 2 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख माना जा रहा है। ब्याज दरें ऊंची बने रहने की उम्मीदों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते से मिल रहे सहारे को पीछे छोड़ दिया है।
फेड के फैसले ने बढ़ाया दबाव
अपनी हालिया पॉलिसी बैठक में फेड के अधिकारियों ने ब्याज दरों को यथावत रखा, लेकिन साथ ही आगे दरें बढ़ाने के पक्ष में बढ़ते झुकाव के संकेत भी दिए। नए फेड प्रमुख केविन वॉर्श ने कीमतों में स्थिरता लौटाने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। इसी बीच वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत में हुई प्रगति से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आवाजाही बढ़ी है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर दबाव कम हुआ और महंगाई का जोखिम घटा है।
सोने पर बिकवाली का दबाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज गिरावट आई। पोर्टफोलियो में कहीं और हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए निवेशकों ने अपनी बुलियन होल्डिंग घटा दी, जिससे सोने पर और दबाव पड़ा।
MCX पर सोना-चांदी का हाल
MCX पर सोना 1,44,667 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा, जिसमें 1,862 रुपये यानी 1.3 फीसदी की तेज गिरावट रही। यह धातु अपने इंट्राडे निचले स्तर 1,44,114 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गई।
चांदी ने शुरुआती कारोबार में करीब 3,500 रुपये टूटने के बाद कुछ नुकसान की भरपाई कर ली। खबर लिखे जाने तक MCX पर चांदी 2,24,741 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी, जो 0.5 फीसदी नीचे रही। शुरुआती घंटी में चांदी 2,21,658 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर को छू चुकी थी।
स्पॉट मार्केट में सात महीने का निचला स्तर
स्पॉट गोल्ड करीब 1.12 फीसदी गिरकर 4,070 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गया और 4,100 डॉलर का स्तर तोड़ते हुए सात महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया। दूसरी ओर स्पॉट चांदी फेड की सख्त नीति की आशंका के बीच करीब 1 फीसदी टूटी। सोने के उलट चांदी छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है।
मजबूत डॉलर इंडेक्स ने भी बुलियन की कीमतों पर दबाव बनाए रखा। बाजार आगे ब्याज दरें बढ़ने की आशंका को भी भांप रहा है, जबकि अमेरिका और ईरान की बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता ने धारणा को सतर्क रखा है।
क्रूड ऑयल और होर्मुज की भूमिका
अमेरिकी WTI क्रूड ऑयल भी करीब 1 फीसदी टूटा। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच आगे बढ़ता शांति समझौता, होर्मुज जलडमरूमध्य से बढ़ता परिवहन और मध्य पूर्व संघर्ष में पूर्ण शांति की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन का कहना है कि उसे ऐसे सुरक्षा आश्वासन मिले हैं जिनसे सैकड़ों जहाज होर्मुज के रास्ते फारस की खाड़ी से बाहर निकल सकते हैं, क्योंकि हजारों नाविकों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं। आईईए के अनुसार जून की शुरुआत में यूएई का तेल निर्यात फिर बढ़कर संघर्ष से पहले के स्तर के करीब 85 फीसदी तक पहुंच गया, जिसमें पाइपलाइन, स्टोरेज सुविधाओं और वैकल्पिक शिपिंग रूट का सहारा मिला।
आगे क्या रहेगी चाल
अब बाजार की नजरें अगले हफ्ते आने वाले अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो सोने और डॉलर को नई दिशा दे सकते हैं। LKP सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, नजदीकी अवधि में सोना 1,44,500 से 1,48,500 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकता है।













