होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमला, 2 नाविक लापता और 23 को बचाया गयाअमेरिकी बॉन्ड यील्ड और महंगाई के दबाव से चांदी में फिसलन, कच्चा तेल उछलने से ब्याज दर बढ़ने की आशंकालाइका की वाइल्डवुड का आखिरी ट्रेलर रिलीज, 15 साल के इंतजार के बाद स्टॉप मोशन फैंटेसी 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आएगीनए नेतृत्व की दौड़ तेज होने पर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में उछाल, दो वरिष्ठ नाम आगेपश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव के बीच कच्चा तेल 99 डॉलर के पार निकलाअमेरिकी डॉलर के मुकाबले कैनेडियन डॉलर दबाव में, 50-दिवसीय ईएमए पर कड़ा इम्तिहानब्रिटेन के रोजगार आंकड़ों के बाद जापानी येन के मुकाबले कमजोर पड़ा ब्रिटिश पाउंडफेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सोने में दबाव, 4,260 डॉलर के स्तर पर फिसली कीमतेंझारखंड में 12 साल चला 20 एकड़ का झगड़ा और 13 मुकदमों का बोझ, अधिकारी की मध्यस्थता से भाइयों ने गले मिलकर खत्म की तकरारगंगटोक से डियर गणेश चतुर्थी बंपर लॉटरी के नतीजे होंगे जारी, टिकटधारकों के लिए इनाम और क्लेम की पूरी प्रक्रिया
रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा उपायों से रुपये में तेज गिरावट का खतरा घटा, डॉलर की मांग बरकरारबाज़ार
19 सित॰ 2026, 4:33 pm (18 मिनट पहले)· 0

रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा उपायों से रुपये में तेज गिरावट का खतरा घटा, डॉलर की मांग बरकरार

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित कदमों से 136 अरब डॉलर की आमद दर्ज की गई है, जिससे रुपये को भारी गिरावट से सहारा मिला है लेकिन डॉलर की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घरेलू मुद्रा को मजबूती देने के उद्देश्य से जून 2026 में घोषित किए गए विदेशी मुद्रा उपायों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन कदमों के तहत एफसीएनआर (बी) जमा योजनाओं सहित विभिन्न माध्यमों से आकर्षित डॉलर की राशि 31 अगस्त तक 136 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच चुकी है। विदेशी पूंजी का यह प्रवाह लगातार जारी रहने की संभावना है। इस भारी आमद को देखते हुए रिजर्व बैंक द्वारा एफसीएनआर (बी) सुविधा को निर्धारित समय से पहले समाप्त करने का निर्णय पूरी तरह तार्किक दिखाई देता है।

विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और नकदी प्रबंधन

विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार की कार्यप्रणाली के अनुसार जब तक केंद्रीय बैंक प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप नहीं करता, तब तक कोई स्पॉट विदेशी मुद्रा लेनदेन घटित नहीं होता। यही मुख्य कारण रहा कि शुरुआत में डॉलर और रुपये की विनिमय दर में तत्काल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। भारी डॉलर प्रवाह ने केंद्रीय बैंक को रुपये की कमजोरी से निपटने के लिए कहीं अधिक वित्तीय क्षमता प्रदान की है। इसके साथ ही इस विदेशी पूंजी आमद ने अपनी अलग तरह की चुनौतियां भी पैदा की हैं, जिनमें रुपये की घरेलू तरलता का प्रबंधन करना सबसे प्रमुख विषय बनकर उभरा है।

ये भी पढ़ें

रुपये की दिशा और डॉलर की लगातार मांग

विदेशी मुद्रा के दृष्टिकोण से किए गए विस्तृत विश्लेषण के अनुसार केंद्रीय बैंक के इन नीतिगत हस्तक्षेपों ने रुपये में किसी अचानक और अत्यंत तीव्र अवमूल्यन के जोखिम को काफी हद तक घटा दिया है। इसके बावजूद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सकल वापसी और शेयर बाजार में प्राथमिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ की मजबूत पाइपलाइन की वजह से डॉलर की बुनियादी मांग काफी मजबूत बनी हुई है। डॉलर की इसी सतत मांग के कारण आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले रुपये की दर में ऊपर की ओर रुझान जारी रहने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।

वैश्विक मुद्रा बाजारों में उतार चढ़ाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर का दबदबा अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव बना रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र में 0.7150 के स्तर से नीचे दबाव में रहा, जो पिछले कारोबारी दिन दर्ज किए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के काफी करीब है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की आगामी बैठक और कच्चे तेल से जुड़े मुद्रास्फीति के जोखिमों के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनी हुई है। इस स्थिति ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है और संबंधित मुद्रा जोड़े पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा अगस्त महीने के मिले-जुले चीनी आर्थिक गतिविधि आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दिया।

डॉलर के मुकाबले जापानी येन की चाल

दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन का युग्म मंगलवार की शुरुआत में 155.00 के स्तर की ओर लगातार बढ़ता हुआ देखा गया। वैश्विक मुद्रा कारोबारी इस सप्ताह होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकों के परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और तेल जनित महंगाई के खतरों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है, जिससे डॉलर को व्यापक समर्थन मिला है। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक सामान्यीकरण के रास्ते पर अधिक आक्रामक रुख अपनाने की संभावना येन को समर्थन दे सकती है, जिससे डॉलर और येन की विनिमय दर की तेजी सीमित हो सकती है।

सोने की कीमतों पर फेडरल रिजर्व की बैठक का असर

कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों को एशियाई सत्र की हल्की बढ़त का लाभ उठाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। सोने का भाव पिछले कारोबारी सत्र में छूए गए एक महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर रहा। यह कीमती धातु फिलहाल 4,300 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े से ठीक नीचे कारोबार कर रही है। वैश्विक वित्तीय बाजारों के प्रतिभागी दो दिवसीय नीतिगत बैठक के शुरू होने से पहले सतर्क रुख अपनाते हुए किनारे बैठना पसंद कर रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं में सीमित दायरे में कारोबार देखा जा रहा है।

सवाल-जवाब

रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा उपायों के तहत 31 अगस्त तक कितने डॉलर आए?
विभिन्न सुविधाओं और एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से 31 अगस्त तक कुल 136 अरब डॉलर की राशि आकर्षित हुई है।
आरबीआई ने एफसीएनआर (बी) सुविधा को समय से पहले क्यों बंद किया?
अत्यधिक मात्रा में पूंजी प्रवाह आने के बाद घरेलू रुपये की तरलता का प्रबंधन करने के उद्देश्य से इस सुविधा को समय से पहले बंद किया गया।
रुपये में तेज गिरावट का जोखिम कम होने के बाद भी डॉलर क्यों मजबूत हो सकता है?
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वापसी और मजबूत आईपीओ पाइपलाइन के कारण बाजार में डॉलर की बुनियादी मांग लगातार बनी हुई है।
वैश्विक बाजार में सोने की कीमत किस स्तर पर कारोबार कर रही है?
सोने की कीमत अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ठीक नीचे चल रही है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की स्थिति क्या है?
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7150 से नीचे दबाव में बना हुआ है, जबकि डॉलर और जापानी येन का युग्म 155.00 के स्तर की ओर बढ़ रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp