भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय अक्टूबर बैठक का आज समापन हो रहा है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे इस महत्वपूर्ण नीतिगत समीक्षा के निर्णयों का आधिकारिक ऐलान करेंगे। वित्तीय बाजारों, बैंकिंग क्षेत्र और आम कर्जदारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव करता है या फिर मौजूदा रुख को बरकरार रखता है।
वर्तमान ब्याज दरें और तटस्थ रुख का दौर
केंद्रीय बैंक की प्रमुख नीतिगत दर यानी रेपो रेट इस समय 5.25% पर बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इससे पहले जून और अगस्त की बैठकों में दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। इसके साथ ही नीतिगत रुख भी तटस्थ रखा गया है। वित्तीय विश्लेषक और अर्थशास्त्री इस घटनाक्रम को बेहद करीब से देख रहे हैं कि क्या मौद्रिक नीति समिति दरों को यथावत रखने के सिलसिले को जारी रखेगी, अपने रुख में कोई बदलाव करेगी या फिर दरों में वृद्धि का कोई चौंकाने वाला कदम उठाएगी।
नीतिगत निर्णय के साथ-साथ केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि के संशोधित अनुमान भी पेश किए जाएंगे। अनुमानों के मुताबिक मुख्य मुद्रास्फीति के अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही के दौरान अपने चरम स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के अनुमान आने वाले समय के लिए व्यापक आर्थिक दिशा तय करेंगे।
त्योहारी सीजन में कर्ज और जमा दरों पर असर
त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ आने वाला यह नीतिगत फैसला आम लोगों के गृह ऋण, वाहन ऋण और अन्य कर्जों की मासिक किस्तों यानी ईएमआई को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। यदि समिति दरों को स्थिर रखती है, तो कर्जदारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर यदि कोई आश्चर्यजनक बढ़ोतरी होती है, तो बैंकों द्वारा उधारी और जमा दोनों दरों में वृद्धि की जा सकती है। इसके अलावा शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार भी इस घोषणा के आधार पर अपनी दिशा तय करेंगे।
अगस्त बैठक के प्रमुख आर्थिक आंकड़े और अनुमान
अगस्त में आयोजित पिछली बैठक में मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया था। उस फैसले के तहत स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी एसडीएफ दर को 5.00% पर बरकरार रखा गया था। इसके साथ ही मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ दर और बैंक दर दोनों को 5.50% पर निर्धारित किया गया था।
आर्थिक वृद्धि और महंगाई के मोर्चे पर केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान व्यक्त किया था। उसी बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित सीपीआई मुद्रास्फीति 5.0% रहने का अनुमान लगाया गया था, जिसमें तीसरी तिमाही के दौरान मुद्रास्फीति के 5.9% पर रहने की संभावना दर्ज की गई थी। अब बाजार इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या अक्टूबर की समीक्षा में इन पुराने आंकड़ों में कोई संशोधन किया जाएगा।















