हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे एक यात्री विमान के भीतर जब अचानक चीख-पुकार मच जाए और कमान संभालने वाले कैप्टन पर ही जानलेवा वार हो जाए, तो किसी भी इंसान के होश उड़ सकते हैं। फ्लाईदुबई की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान में ठीक ऐसा ही खौफनाक मंजर देखने को मिला। तेल अवीव की तरफ जा रहे इस विमान के कॉकपिट में ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने अचानक मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर घातक हमला कर दिया। 170 से अधिक मुसाफिरों की जान जोखिम में थी और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की खतरनाक साजिश रची गई थी। लेकिन इस अप्रत्याशित संकट के बीच विमान में सवार यात्रियों और एक साहसी डेंटिस्ट ने मिलकर इस खौफनाक वारदात को एक हैरतअंगेज बचाव अभियान में बदल दिया।
कॉकपिट में चीखें और मुसाफिरों का त्वरित एक्शन
विमान जब उड़ान पर था, तभी कॉकपिट के भीतर से असामान्य आवाजें और तीखी चीखें सुनाई देने लगीं। इन डरावनी आवाजों को सुनकर केबिन में बैठे लोग सतर्क हो गए। इज़राइल में रहने वाले जॉर्जियाई मूल के डेंटिस्ट डॉ. शुता मुसाएव बिना किसी हिचकिचाहट के फौरन आगे बढ़े। उनके जेहन में उस नाजुक मोड़ पर सिर्फ एक ही सवाल कौंध रहा था कि इस जानलेवा हालात में सभी यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
जब वे कॉकपिट के पास पहुंचे, तो नजारा दहला देने वाला था। कैप्टन स्मित मच्छार जमीन पर गिरे हुए थे और उनके शरीर से लगातार खून बह रहा था। उसी दौरान यानीव हायुन नाम के एक अन्य मुसाफिर ने अद्भुत बहादुरी दिखाई। उन्होंने संदिग्ध हमलावर को खींचकर कॉकपिट से बाहर किया और नियंत्रण खो रहे विमान को सीधा कर संभाला। इसके तुरंत बाद उड़ान में मौजूद तीसरे पायलट ने पूरी कमान अपने हाथों में ले ली, जिससे प्लेन पर नियंत्रण बहाल हो सका।
45 मिनट तक बर्फ और टी-शर्ट से खून थामने की जद्दोजहद
हमलावर पर काबू पाने और उसे बाहर निकालने के बाद डॉ. शुता मुसाएव का पूरा ध्यान फर्श पर पड़े जख्मी कैप्टन की ओर मुड़ा। स्मित मच्छार के सिर, गर्दन और दोनों हाथों पर गहरे और गंभीर घाव थे, जहां से बेतहाशा खून बह रहा था। तेल अवीव के दक्षिण में स्थित होलोन से उस भयावह घटना को याद करते हुए डेंटिस्ट ने बताया कि कैप्टन के सिर और बाएं हाथ से खून का फव्वारा जैसा छूट रहा था।
शुरुआत में खून के तेज बहाव को रोकने के लिए एक टी-शर्ट का सहारा लिया गया और घावों पर तेज दबाव बनाया गया। लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि सिर्फ कपड़े से खून का बहना बंद नहीं हो रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डेंटिस्ट ने केबिन क्रू और स्टीवर्ड्स से बर्फ के पैकेट मांगे। कई आइस पैक्स का इंतजाम किया गया। जैसे ही डेंटिस्ट घाव की स्थिति देखने के लिए टी-शर्ट हटाते, खून फिर से तेजी से बहने लगता था। इस वजह से उन्होंने लगातार 45 मिनट तक बर्फ की थैलियों से घावों पर हल्का दबाव बनाए रखा ताकि शरीर से सारा खून न निकल जाए।
प्लीज सोइए मत, हमें आपकी जरूरत है: कैप्टन को होश में रखने की कोशिश
गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के चलते कैप्टन मच्छार की चेतना धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी थी। उन्हें होश में बनाए रखना जिंदगी और मौत के बीच का सबसे बड़ा फैसला था। डॉ. मुसाएव ने उन्हें जगाए रखने के लिए लगातार बातें करना शुरू किया। उन्होंने कैप्टन से बार-बार कहा कि वे अपनी आंखें खुली रखें, सोएं बिल्कुल नहीं क्योंकि इस वक्त सबको उनकी जरूरत है।
डॉक्टर ने उनसे उनके निजी जीवन से जुड़े सवाल पूछे, जैसे उनके कितने बच्चे हैं और उन बच्चों के नाम क्या हैं। डॉक्टर लगातार भरोसा दिलाते रहे कि डरने की कोई बात नहीं है, वे सकुशल अपने परिवार के पास लौटेंगे और विमान बहुत जल्द सुरक्षित जमीन पर उतरने वाला है। दर्द से कराहते हुए पायलट ने अपना नाम और उम्र बताई। उन्होंने साझा किया कि वे मूल रूप से भारत से हैं और वर्तमान में दुबई में रहते हैं। कैप्टन लगातार दर्द से राहत की गुहार लगा रहे थे और कह रहे थे कि वे यहां मरना नहीं चाहते। उन्हें अपने हाथों में तेज जलन और असामान्य गर्मी महसूस हो रही थी, जबकि डॉक्टर उन्हें हिम्मत बंधाते रहे।
गिरती पल्स और नीले पड़ते होंठ: जब वक्त तेजी से बीत रहा था
कॉकपिट में मची इस भयानक अफरातफरी के दौरान कैप्टन मच्छार ने एक पल यह महसूस किया था कि विमान तेजी से नीचे की तरफ जा रहा है। गिरते विमान को बचाने के लिए उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की एक आखिरी जद्दोजहद भी की थी। फर्श पर लेटे-लेटे उनकी शारीरिक स्थिति अचानक तेजी से बिगड़ने लगी।
एक समय ऐसा आया जब कैप्टन की पल्स बेहद धीमी पड़ गई और नब्ज लगभग गायब होने लगी। चिकित्सीय सूझबूझ दिखाते हुए डॉ. मुसाएव ने तुरंत पायलट के दोनों पैरों को ऊपर की तरफ उठाया। पैरों को ऊपर उठाने से रक्तसंचार सुधरा और उनकी पल्स वापस सामान्य होने लगी। लेकिन कुछ ही देर में जब डेंटिस्ट ने गौर किया कि कैप्टन के होंठ नीले पड़ने लगे हैं, तो खतरे की घंटी बज गई। उन्होंने तुरंत स्टीवर्ड्स से कहा कि विमान को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द लैंड कराना होगा, क्योंकि घायल कैप्टन के पास अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है।
पेनकिलर देने से इनकार और सावधानी भरा फैसला
घटना के बाद सामने आए वीडियो फुटेज में घायल कैप्टन दर्द निवारक दवा यानी पेनकिलर की मांग करते हुए दिख रहे हैं। हालांकि, डॉ. मुसाएव ने बेहद सख्त मेडिकल फैसला लेते हुए उन्हें कोई भी गोली या दवा देने से साफ मना कर दिया। उन्होंने केवल थोड़ा-थोड़ा पानी ही पायलट को पिलाया।
डेंटिस्ट का मानना था कि अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में किसी भी तरह की दवा देना या मरीज के शरीर को हिलाना-डुलाना जानलेवा साबित हो सकता था, जिससे आंतरिक या बाहरी ब्लीडिंग दोबारा भड़क सकती थी। स्टीवर्ड्स उन्हें दर्द की दवा देना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर ने अपनी असहमति जताई और जोखिम लेने से इनकार कर दिया। वे लगातार कैप्टन की सांसों, पल्स, बातचीत और होंठों के रंग पर बारीक नजर बनाए रहे।
सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग और डॉक्टरों को सुपुर्दगी
विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब की जमीन पर उतारा गया। आपात लैंडिंग होने तक सतर्क मुसाफिरों की एक छोटी टोली पूरे विमान में इस आशंका से तलाशी लेती रही कि कहीं केबिन में कोई अन्य हमलावर या संदिग्ध तो छिपा नहीं है। विमान के रनवे पर रुकते ही जमीन पर मौजूद मेडिकल टीम को घायल पायलट सौंप दिया गया।
कैप्टन मच्छार को एम्बुलेंस और डॉक्टरों के हवाले करते वक्त डॉ. मुसाएव ने उनसे कहा कि उनका वक्त अच्छा रहेगा और सब कुछ ठीक हो जाएगा। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने यात्रियों के दिमाग पर गहरा असर छोड़ा। डेंटिस्ट ने बताया कि इस खौफनाक मंजर के बाद आने वाले कई दिनों तक वे और उनकी पत्नी गहरे मानसिक आघात और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस के दौर से गुजरे।
कर्म का चक्र: उन्होंने हमारी जान बचाई, हमने उनकी
इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए डॉ. मुसाएव ने कैप्टन स्मित मच्छार को असली नायक करार दिया। उन्होंने कहा कि कैप्टन ने अपने पराक्रम से सभी मुसाफिरों की रक्षा की और वे इसके लिए उनके हमेशा आभारी रहेंगे। डेंटिस्ट ने इसे कर्म का एक अनूठा चक्र बताया, जहां पायलट ने विमान में सवार सैकड़ों जिंदगियां बचाईं और बदले में यात्रियों ने एकजुट होकर उस बहादुर पायलट की सांसें बचा लीं।























