हाथ से बने कालीनों के सबसे बड़े केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश के भदोही शहर में 50वें इंटरनेशनल कारपेट एक्सपो की शुरुआत हो चुकी है। भदोही स्थित कारपेट एक्सपो मार्ट में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का मुख्य उद्देश्य हस्तनिर्मित कालीनों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। मिर्जापुर और भदोही क्षेत्र दुनिया भर में सबसे अधिक हस्तनिर्मित कालीन तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। इस भव्य आयोजन में दुनिया के करीब 65 देशों से 450 से अधिक विदेशी खरीदार हिस्सा लेने पहुंचे हैं, जिससे स्थानीय उद्योगपतियों और निर्यातकों में व्यापार वृद्धि को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
विदेशी खरीदारों की पहली पसंद बनी कश्मीरी सिल्क और मिर्जापुर दरी
इस चार दिवसीय प्रदर्शनी में देश भर के प्रमुख कालीन उत्पादक केंद्रों से बेहतरीन उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। आयोजन स्थल पर कश्मीरी सिल्क कालीन और मिर्जापुर की पारंपरिक दरी विदेशी आयातकों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। श्रीनगर, दिल्ली, पानीपत, जयपुर, आगरा तथा मिर्जापुर-भदोही के निर्माता और निर्यातक अपने विशिष्ट गलीचे और कालीन लेकर यहां पहुंचे हैं। अलग-अलग राज्यों से आए विविध डिजाइनों और पारंपरिक बुनाई शैलियों को देखकर अंतरराष्ट्रीय खरीदार बड़े पैमाने पर ऑर्डर देने में रुचि दिखा रहे हैं।
एशिया का सबसे बड़ा हस्तनिर्मित कालीन मेला और ब्रिक्स देशों की भागीदारी
कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के वाइस प्रेसिडेंट असलम महबूब के अनुसार, यह आयोजन केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में हस्तनिर्मित कालीन का सबसे बड़ा व्यापारिक मेला है। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर भी हैंडमेड श्रेणी में इससे बड़ा एक्सपो कहीं आयोजित नहीं होता। इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसका आयोजन सीधे उस उत्पादन केंद्र में हो रहा है जहां ये कालीन बुने जाते हैं। इस ऐतिहासिक 50वें संस्करण के लिए 65 देशों से 400 से 450 विदेशी खरीदारों ने पंजीकरण कराया था। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी किए जाने के उपलक्ष्य में विशेष प्रबंध किए गए हैं, जिसके तहत ब्रिक्स समूह से जुड़े 106 खरीदारों ने पंजीकरण कराया है।
कारोबारी चक्र और व्यापारिक प्रक्रिया की समझ
कालीन कारोबार के संचालन चक्र पर प्रकाश डालते हुए असलम महबूब ने बताया कि इस उद्योग का व्यावसायिक चक्र सामान्यतः छह से नौ महीने की अवधि का होता है। मेले के दौरान आने वाले विदेशी आयातक नमूनों का चयन करते हैं और सैंपलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले दो से पांच महीनों में वास्तविक सौदे धरातल पर उतरते हैं। मेले के चौथे दिन इसके औपचारिक समापन के अवसर पर सभी प्रतिभागियों और खरीदारों को फीडबैक फॉर्म वितरित किए जाते हैं। इन्हीं प्रपत्रों से संकलित आंकड़ों के आधार पर कुल व्यापारिक सौदों और कारोबार की अंतिम गणना की जाती है। देश भर के गलीचा उत्पादक केंद्रों जैसे पानीपत, जयपुर, कश्मीर और दिल्ली से आए निर्यातकों के साथ विदेशी आयातकों की यह बैठक दीर्घकालिक निर्यात समझौतों की नींव रखती है।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच एक्सपो का सफल आयोजन
वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार कई तरह की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। असलम महबूब ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय टैरिफ, युद्ध के प्रभाव, कच्चे माल की बढ़ती लागत तथा परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है। दुनिया भर में जारी इस तरह के संकटपूर्ण माहौल के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मेले का सफल संचालन करना आयोजकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इन सभी बाधाओं को आसानी से पार कर लिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि कालीन उद्योग के सामने आ रही इन व्यावहारिक दिक्कतों और चुनौतियों के समाधान के लिए भारत सरकार निरंतर आवश्यक कदम उठाएगी।




















