शेयर बाजार में सोमवार को चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा और दोपहर 12 बजे सेंसेक्स 572 अंक की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहा था। कई दिग्गज शेयर खरीदारों की राह देखते नजर आए, लेकिन इसी कमजोर माहौल में स्मॉलकैप कंपनी एलीटकॉन इंटरनेशनल का शेयर किसी रॉकेट की तरह भागा। कारोबार के दौरान यह 11.08% की जोरदार छलांग लगाकर ₹19.85 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि समाचार लिखे जाने तक यह ₹18 के आसपास कारोबार कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि यही शेयर पिछले एक साल से पूरी तरह ठंडा पड़ा था और निवेशकों की जेब पर लगातार चोट कर रहा था।
एक साल तक निवेशकों को रुलाता रहा शेयर
इस अचानक आई तेजी को समझने के लिए इसके हालिया रिकॉर्ड पर नजर डालना जरूरी है। बीते एक महीने में एलीटकॉन इंटरनेशनल का शेयर 32% गिर चुका है। तीन महीने के दायरे में देखें तो इसने निवेशकों को 58% का नुकसान कराया, वहीं पिछले छह महीनों में इसकी कीमत 75% तक लुढ़क गई। सालभर का हिसाब और भी डरावना है, इस दौरान शेयर 85% टूट चुका है। कंपनी के शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर ₹422.65 रहा है, जबकि 52 हफ्ते का सबसे निचला स्तर ₹17.29 दर्ज किया गया है। यानी अपने शिखर से यह शेयर बुरी तरह पिट चुका है और मौजूदा उछाल एकदम निचले स्तरों से आई है।
तेजी की असली वजह, सेबी से मिली राहत
शेयर में आई इस तूफानी तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह कंपनी को बाजार नियामक सेबी से मिली राहत है। अब तक कंपनी के बैंक खातों के इस्तेमाल पर पाबंदियां लगी हुई थीं, जिससे उसका कामकाज ठप पड़ा था। अब सेबी ने बैंकों को स्पष्टीकरण भेज दिया है। एलीटकॉन इंटरनेशनल के मुताबिक, इस स्पष्टीकरण के बाद कोटक महिंद्रा बैंक ने कंपनी के खातों पर लगी रोक और प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खातों से रोक हटते ही कंपनी के अटके हुए भुगतान, कर्मचारियों की सैलरी और रोजमर्रा के कारोबारी काम दोबारा पटरी पर लौट सकेंगे, और इसी उम्मीद ने शेयर में जान फूंक दी।
30 मार्च को आया था सेबी का आदेश
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 30 मार्च 2026 को हुई थी, जब सेबी ने एलीटकॉन इंटरनेशनल, इसके प्रमोटर और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ एकपक्षीय अंतरिम आदेश जारी किया था। इस आदेश के बाद कुछ पक्षों के बैंक खातों से रकम निकालने पर, कुछ शर्तों के साथ, रोक लगा दी गई थी। हालांकि सेबी ने साफ किया था कि आदेश में दर्ज उसकी टिप्पणियां फिलहाल सिर्फ प्रथम दृष्टया आधार पर हैं। मामले की जांच और उससे जुड़ी कार्यवाही अब भी जारी है और इस पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। यही वजह है कि खातों पर से रोक हटने की खबर निवेशकों के लिए इतनी बड़ी राहत बनकर आई।



















