वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में चीनी मुद्रा युआन को लेकर सकारात्मक रुख देखने को मिल रहा है। वित्तीय रणनीतिकारों सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, चीनी युआन में आने वाले वर्षों के दौरान क्रमिक मजबूती का रुख बना रह सकता है। इस अनुमान के तहत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले युआन की विनिमय दर वर्ष 2026 के अंत तक 6.62 और वर्ष 2027 के अंत तक 6.46 तक पहुंच सकती है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा हाल ही में तय की जा रही दैनिक फिक्सिंग दरों में मजबूती का जो रुझान दिखा है, वह यह संकेत देता है कि नीति निर्माता चीनी मुद्रा में बढ़ोतरी को लेकर पहले से अधिक लचीला रुख अपना रहे हैं, भले ही इस मजबूती की गति संतुलित रहने की उम्मीद है।
युआन की मजबूती के प्रमुख कारक और संभावित चुनौतियां
व्यापक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की तेजी के बावजूद चीनी मुद्रा का लचीलापन यह दर्शाता है कि बाजार का रुझान युआन में बढ़त की ओर अधिक झुका हुआ है। यह स्थिति आने वाले समय में मुद्रा में और सुधार की उम्मीदों को बल देती है। रणनीतिकारों का मानना है कि युआन की यह मजबूत राह 2027 तक जारी रह सकती है, जिसे अमेरिकी डॉलर की मजबूती में धीरे-धीरे आने वाली नरमी का सहारा मिलेगा। बीच-बीच में मुद्रा में कुछ समय के लिए ठहराव या समेकन की स्थिति भी बन सकती है।
हालांकि, इस मजबूत परिदृश्य के सामने कई संभावित जोखिम भी मौजूद हैं। यदि अमेरिकी डॉलर में अचानक नई तेजी आती है, चीन की घरेलू आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ती है या केंद्रीय बैंक अपनी फिक्सिंग नीति की दिशा बदलता है, तो युआन की बढ़त की रफ्तार धीमी हो सकती है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, जापानी येन और ईरान कूटनीति का असर
वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों में भी सोमवार को महत्वपूर्ण गतिविधियां दर्ज की गईं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी ने सोमवार को एशियाई सत्र की अपनी गिरावट से वापसी की। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत को लेकर बनी नई उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और जोखिम से जुड़ी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को समर्थन मिला। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के हाजिर भाव पिछले गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे बने हुए हैं, क्योंकि निवेशक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले से पहले नए सौदे करने से बच रहे हैं।
वहीं, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी ने नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में सकारात्मक बढ़त हासिल की। बैंक ऑफ जापान की बैठक के बाद शुक्रवार को 157.00 से नीचे के निचले स्तर पर जाने के बाद यह जोड़ी उबरने में सफल रही। एशियाई सत्र के दौरान गति बढ़ने से भाव 158.00 के आसपास पहुंच गए। खास बात यह रही कि जापान की वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी के बावजूद येन पर दबाव बना रहा और डॉलर में बढ़त जारी रही।
सोने में सुधार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के संकेत
अमेरिकी कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में भी सुधार का सिलसिला आगे बढ़ा। अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़ी सकारात्मक खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने कीमती धातु को सहारा दिया। सोना शुक्रवार को 3,870 डॉलर के अपने नए वार्षिक निचले स्तर को छूने और अक्टूबर महीने में 6.87 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज करने के बाद वापसी करने में कामयाब रहा। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने का यह उछाल पूरी तरह आश्वस्त करने वाला नहीं है, क्योंकि बुनियादी आर्थिक परिस्थितियां टिकाऊ सुधार पर लगातार सवाल खड़े कर रही हैं।
उधर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर विरोधाभासी संकेत मिले हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था 3.4 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। वहीं नैस्डैक ने मार्च 2025 के बाद से अक्टूबर में अपना सबसे खराब मासिक प्रदर्शन दर्ज किया। बाजार अब केवल विकास को समर्थन देने वाले पूंजीगत व्यय को पुरस्कृत नहीं कर रहा है। निवेशक अब बारीकी से यह परख रहे हैं कि क्या यह पूंजीगत खर्च नकदी प्रवाह और पूंजी की लागत से अधिक रिटर्न उत्पन्न कर सकता है।

















