अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कैनेडियन डॉलर और अमेरिकी डॉलर के बीच का मुकाबला एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों मुद्राओं को प्रभावित करने वाले अलग-अलग कारक आपस में टकरा रहे हैं। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन USD/CAD जोड़ी में किसी स्पष्ट दिशा का अभाव दिखा और यह एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होती रही। एक तरफ जहां अमेरिकी डॉलर में नरमी का रुख बना हुआ था, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आई तेज गिरावट ने कैनेडियन डॉलर की बढ़त पर पानी फेर दिया। कारोबारी सत्र के दौरान यह मुद्रा जोड़ी 1.3975 के आसपास मंडराती रही, जबकि बीते शुक्रवार को इसने 1.3941 का स्तर छुआ था जो 16 सितंबर के बाद का सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया था।
राजनयिक हलचलों से कच्चे तेल के बाजार में तेज गिरावट
ऊर्जा बाजार में सोमवार को उस समय बिकवाली का भारी दबाव देखा गया जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद को लेकर सकारात्मक खबरें सामने आईं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के एक बयान के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता ने सरकार को वार्ताओं के संदर्भ में कुछ विशिष्ट अधिकार प्रदान किए हैं। यह जानकारी सामने आने के तुरंत बाद ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम होने लगीं।
कूटनीतिक घटनाक्रमों से पहले यह बात भी सामने आई थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ कूटनीतिक रास्तों को कुछ और समय देने के पक्ष में हैं। इन दोनों घटनाक्रमों के मेल ने तेल व्यापारियों को सतर्क कर दिया और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का भाव दिन के दौरान 5% से अधिक फिसलकर 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। चूंकि कनाडा दुनिया भर में कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा निर्यातक देश है, इसलिए उसकी घरेलू मुद्रा, जिसे वित्तीय हलकों में लूनी भी कहा जाता है, तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति असाधारण रूप से संवेदनशील रहती है। तेल में आई इस ताजा कमजोरी ने कैनेडियन डॉलर की स्थिति को कमजोर कर दिया।
बैंक ऑफ कनाडा का सख्त मौद्रिक रुख भी नहीं दे पाया सहारा
आमतौर पर केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी घरेलू मुद्रा को मजबूत करती है, लेकिन मौजूदा माहौल में तेल की बिकवाली इस समर्थन पर भारी पड़ गई। पिछले ही हफ्ते बैंक ऑफ कनाडा (BoC) ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर में 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि करते हुए इसे 2.50% के स्तर पर पहुंचा दिया था। इसके साथ ही बैंक के नीति निर्माताओं ने यह स्पष्ट संकेत भी दिया कि आने वाले समय में दरों में और इजाफे का रास्ता पूरी तरह खुला हुआ है।
कनाडाई नीति निर्माताओं की सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा की ऊंची लागतों को लेकर बनी हुई है। उन्हें आशंका है कि ऊर्जा के ऊंचे दाम व्यापक स्तर पर अर्थव्यवस्था में महंगाई को और भड़का सकते हैं। हालांकि बैंक के इस सख्त और आक्रामक रुख के बावजूद, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में आई तेज गिरावट ने लूनी पर इतना दबाव डाला कि केंद्रीय बैंक की दर वृद्धि का असर बाजार में दबकर रह गया। आने वाले शुक्रवार को जारी होने वाले रोजगार आंकड़े और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे ही अब इस जोड़ी की अगली दिशा तय करेंगे।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले डॉलर इंडेक्स में सावधानी
अमेरिकी मुद्रा में कमजोरी का एक बड़ा कारण मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को लेकर कारोबारियों का सतर्क रुख है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापता है, 101.68 के आसपास कारोबार करता दिखा। हालांकि यह अपने दिन के निचले स्तर 101.44 से थोड़ा संभला, फिर भी दिन के हिसाब से इसमें 0.28% की गिरावट दर्ज की गई।
ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के रणनीतिकारों का आकलन है कि सट्टेबाजी के बाजार इस समय डेमोक्रेटिक पार्टी की पूरी तरह से जीत की संभावना को आगे रख रहे हैं। पॉलीमार्केट और कल्शी जैसे सट्टेबाजी मंच इस परिणाम की संभावना लगभग 70% आंक रहे हैं। रणनीतिकारों का मानना है कि यदि डेमोक्रेट्स दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत शांत और सीमित रह सकती है, क्योंकि इस नतीजे की काफी हद तक पहले से उम्मीद की जा रही है। इसके विपरीत, ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन ने चेतावनी दी है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी सीनेट पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रहती है, तो यह बाजार के लिए एक बड़ा आश्चर्य होगा और इससे वित्तीय बाजारों में भारी अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की बनावट और राजनीतिक महत्व
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव देश के संघीय चुनाव होते हैं जो किसी भी राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे सफर पर आयोजित किए जाते हैं। इन चुनावों में मतदाता प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के सभी 435 सदस्यों का चुनाव करते हैं। इसके अलावा सीनेट के करीब एक-तिहाई सदस्यों का चयन होता है, और कई राज्यों में गवर्नर तथा अन्य राज्य व स्थानीय स्तर के अधिकारियों के लिए भी मतदान किया जाता है।
निर्धारित संघीय नियमों के अनुसार यह चुनाव दिवस नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार यानी मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को तय है। कई राज्यों में डाक द्वारा मतदान और समय से पहले मतदान (अर्ली वोटिंग) की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। ये चुनाव बेहद निर्णायक होते हैं क्योंकि इनसे यह तय होता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बाकी बचे दो वर्षों के दौरान अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों पर किस राजनीतिक दल का दबदबा रहेगा। जिस पार्टी के पास बहुमत होता है, वही विधायी एजेंडा तय करती है, संसदीय समितियों के प्रमुखों का चयन करती है और सीनेट में जजों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों की पुष्टि पर नियंत्रण रखती है। हालांकि, इन चुनावों से राष्ट्रपति का पद नहीं बदलता, क्योंकि राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्येक चार वर्ष में होता है और अगला राष्ट्रपति चुनाव नवंबर 2028 में होगा। ऐतिहासिक रूप से मध्यावधि चुनावों को मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी पर जनमत संग्रह माना जाता है, जिसमें सत्ताधारी पार्टी अक्सर निचले सदन में सीटें गंवाती रही है।
वित्तीय बाजारों पर चुनावी नतीजों और बंटी हुई संसद का असर
मुद्रा बाजार के अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिकी डॉलर पर पड़ने वाला प्रभाव बहुत लंबे समय तक चलने वाले रुझान के बजाय मामूली और अल्पकालिक होगा। दोनों सदनों में अलग-अलग पार्टियों के नियंत्रण वाली बंटी हुई कांग्रेस को सबसे संभावित परिदृश्य माना जा रहा है और बाजार ने काफी हद तक इसे अपनी कीमतों में शामिल भी कर लिया है। चुनाव नतीजों पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स अधिक तीव्र प्रतिक्रिया दे सकती हैं। यदि कोई ऐसा चुनावी परिणाम सामने आता है जिससे राजकोषीय प्रोत्साहन की उम्मीदें बढ़ती हैं, तो ट्रेजरी यील्ड्स और अमेरिकी डॉलर दोनों को सहारा मिल सकता है। दूसरी तरफ, यदि राजनीतिक गतिरोध के चलते नए सरकारी खर्चों पर लगाम लगती है, तो यील्ड्स और डॉलर दोनों नीचे की ओर फिसल सकते हैं। इसके अलावा, सरकारी फंडिंग और ऋण सीमा (डेट सीलिंग) को लेकर होने वाले टकराव अल्पकालिक रूप से डॉलर को सुरक्षित निवेश के तौर पर मजबूती दे सकते हैं। हालांकि छह से बारह महीने के व्यापक नजरिए से देखें तो चुनावी नतीजों की तुलना में अमेरिकी आर्थिक वृद्धि और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियां ज्यादा निर्णायक साबित होती हैं।
अमेरिकी शेयर बाजार का इतिहास बताता है कि मध्यावधि चुनावों से पहले शेयर अक्सर कमजोर रहते हैं और नतीजों के बाद उनमें जोरदार तेजी देखने को मिलती है। 1950 के बाद के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर मध्यावधि चुनाव के 12 महीने बाद एसएंडपी 500 इंडेक्स हमेशा ऊंचे स्तर पर बंद हुआ है। पूरे 19 में से 19 मौकों पर बाजार ने औसतन लगभग 15% का लाभ दर्ज किया है। विश्लेषक इस ऐतिहासिक उछाल का श्रेय चुनावी नतीजों के सामने आने के बाद अनिश्चितता के खत्म होने को देते हैं। हालांकि अतीत का प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता, और कुछ रणनीतिकारों का यह भी कहना है कि 2026 में शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन इस लंबे सिलसिले की कड़ी परीक्षा ले सकता है। ऐतिहासिक रूप से बाजारों ने बंटी हुई सरकार का स्वागत किया है क्योंकि विधायी गतिरोध के कारण करों, खर्चों और नियमों में अचानक बड़े बदलाव की गुंजाइश कम हो जाती है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति के दौर में जब कांग्रेस विभाजित रही है, तब एसएंडपी 500 ने मध्यावधि के बाद के वर्षों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। हालांकि फंडिंग की समयसीमा, कर्ज सीमा की लड़ाई और संसदीय जांच जैसे जोखिम अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जरूर बढ़ा सकते हैं।
अन्य वैश्विक मुद्राओं, सोने और आर्थिक परिदृश्य की स्थिति
सोमवार को अन्य अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों में भी कूटनीतिक खबरों और वृहद आर्थिक आंकड़ों का असर साफ महसूस किया गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी ने एशियाई सत्र में आई गिरावट को उलट दिया। अमेरिका-ईरान कूटनीति पर बनी नई उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूती दी, जिससे सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बढ़त मिली। हालांकि हाजिर कीमतें पिछले गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे ही बनी रहीं, क्योंकि तेजी के पक्षधर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के आगामी नीतिगत फैसले से पहले नए सौदे करने से बचते दिखे।
उधर USD/JPY मुद्रा जोड़ी में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रही। यह जोड़ी बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के बाद शुक्रवार को 157.00 से नीचे के निचले स्तर पर लुढ़क गई थी, जहां से इसने जोरदार वापसी की। इस तेजी के चलते एशियाई सत्र के दौरान हाजिर भाव 158.00 के करीब पहुंच गए। जापानी मुद्रा में यह कमजोरी जापान की वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी के बावजूद देखने को मिली।
अमेरिकी कारोबारी घंटों के दौरान सोने की कीमतों में भी सुधार का सिलसिला जारी रहा। अमेरिका-ईरान वार्ताओं की खबरों के बाद कच्चे तेल में आई गिरावट ने कीमती धातु को संभलने का मौका दिया। शुक्रवार को 3,870 डॉलर के नए वार्षिक निचले स्तर को छूने और अक्टूबर महीने को 6.87% की भारी गिरावट के साथ समाप्त करने के बाद सोने ने अपनी जमीन वापस हासिल करने की कोशिश की। फिर भी इस सुधार में दृढ़ विश्वास की कमी दिखती है क्योंकि बुनियादी आर्थिक पृष्ठभूमि इसके लंबे समय तक टिकने पर संदेह पैदा कर रही है।
इस बीच व्यापक आर्थिक मोर्चे पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था 3.4% की वार्षिक दर से आगे बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद ट्रेजरी यील्ड्स में गिरावट आई और नैस्डैक इंडेक्स ने अक्टूबर का अंत मार्च 2025 के बाद के अपने सबसे खराब मासिक प्रदर्शन के साथ किया। वित्तीय बाजार अब कंपनियों के पूंजीगत खर्च को केवल इसलिए पुरस्कृत नहीं कर रहे हैं कि वह वृद्धि को सहारा दे रहा है। निवेशक अब गहराई से इस बात की परख कर रहे हैं कि क्या यह पूंजीगत खर्च वास्तविक नकदी प्रवाह उत्पन्न कर सकता है और पूंजी की कुल लागत से अधिक रिटर्न देने में सक्षम है।


















