अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों और वैश्विक व्यापार वार्ताओं को लेकर निवेशकों की सतर्कता साफ दिखाई दे रही है। स्वीडन का केंद्रीय बैंक अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर को 1.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रख सकता है, फिर भी आने वाले महीनों में दर वृद्धि के दरवाजे खुले रहने के स्पष्ट संकेत हैं। हालांकि हालिया आंकड़ों में वहां मुद्रास्फीति के दबाव काफी नरम दर्ज किए गए हैं, लेकिन ऊर्जा लागत में लगातार बनी तेजी और पूर्व में घोषित राहत उपायों की समाप्ति के बाद मूल्य वृद्धि दोबारा रफ्तार पकड़ सकती है। इस संभावित फैसले का स्वीडिश क्रोना पर कोई बड़ा या एकतरफा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं दिख रही है।
स्वीडन में मुद्रास्फीति और ब्याज दरों का समीकरण
स्वीडिश अर्थव्यवस्था में हालिया उपभोक्ता मूल्य आंकड़े असामान्य रूप से काफी निचले स्तर पर दर्ज किए गए हैं। अगस्त के महीने में मुख्य वार्षिक मुद्रास्फीति दर 0.3 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि मूल मुद्रास्फीति का आंकड़ा 0.7 प्रतिशत पर रहा। कीमतों में इस अप्रत्याशित नरमी के पीछे सरकार द्वारा उठाए गए कुछ तात्कालिक कदम मुख्य वजह रहे हैं। खाद्य उत्पादों पर लगने वाले मूल्य वर्धित कर यानी वैट को घटाकर आधा कर दिया गया था। इस कर कटौती से आम उपभोक्ताओं के लिए खाने-पीने की चीजें सस्ती हुईं, जिसने समग्र मूल्य वृद्धि को तेजी से नीचे खींच लिया।
हालांकि वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि कर कटौती का यह प्रभाव केवल अल्पकालिक है। जैसे ही यह कर रियायत समाप्त होगी, खाद्य वस्तुओं की कीमतें दोबारा बढ़ेंगी और मुद्रास्फीति में स्वतः उछाल दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, साल 2025 में क्रोना की विनिमय दर में दर्ज हुई मजबूती ने भी घरेलू बाजार में आयातित वस्तुओं के दाम नियंत्रित रखने में मदद की थी। लेकिन मौजूदा वर्ष की शुरुआत से क्रोना के मूल्य में आई क्रमिक गिरावट अब धीरे-धीरे आयात लागत को बढ़ाने लगी है, जिसका पूरा असर आगामी महीनों में खुदरा स्तर पर दिखाई देगा।
ऊर्जा की कीमतों का दोहरा दबाव
स्वीडन के नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी लागत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर बिजली तथा ईंधन की कीमतें पिछले कई महीनों से लगातार ऊंचे स्तरों पर टिकी हुई हैं। यह परिस्थिति घरेलू बजट पर सीधा वित्तीय बोझ डालती है, जिससे बिजली और परिवहन के बिल महंगे होते हैं। इसके साथ ही विनिर्माण और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से अन्य आवश्यक उपभोक्ता सामान भी महंगे हो जाते हैं।
इसी वजह से केंद्रीय बैंक की ओर से अपनी सख्त मौद्रिक नीति को पूरी तरह नरम करने या दर वृद्धि की योजना को अगले साल तक टालने की संभावना खारिज मानी जा रही है। कॉमर्जबैंक की विश्लेषक अंत्जे प्राफके ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा,
"लगातार ऊंची ऊर्जा कीमतों और उनसे जुड़े मूल्य जोखिमों को देखते हुए अब ऐसा होना असंभव लगता है।"उनके अनुसार नीतिगत वक्तव्य में बहुत मामूली फेरबदल देखने को मिलेंगे और केंद्रीय बैंक का रुख समग्र रूप से प्रतिबंधात्मक बना रहेगा। परिणामस्वरूप, इस नीतिगत निर्णय का स्वीडिश क्रोना पर तात्कालिक असर काफी हद तक संतुलित और निष्प्रभावी रहने का अनुमान है।
एशियाई कारोबार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का हाल
वैश्विक मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों पर नजर डालें तो गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ता दिखाई दिया और इसका स्तर 0.7000 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े की ओर लुढ़क गया। इस गिरावट के पीछे ऑस्ट्रेलिया के श्रम बाजार से जुड़े नए आंकड़े प्रमुख कारण रहे। जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बाजार के विश्लेषक इसके 4.5 प्रतिशत पर बने रहने का अनुमान लगा रहे थे।
हालांकि अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन की रफ्तार अनुमानों से बेहतर रही और रोजगार परिवर्तन का आंकड़ा 39.5 हजार दर्ज किया गया। इसके बावजूद बेरोजगारी दर में आई बढ़ोतरी ने नीतिगत ब्याज दरों को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा अमेरिका और चीन के शीर्ष नेताओं के बीच प्रस्तावित महत्वपूर्ण वार्ता को लेकर भी विदेशी मुद्रा व्यापारी अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं, जिसका दबाव ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर साफ महसूस किया गया।
बैंक ऑफ जापान का सख्त कदम और येन की चाल
एशियाई बाजारों में दूसरी सबसे बड़ी गतिविधि जापान से सामने आई, जहां बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया। बैंक की नीतिगत समिति ने सात के मुकाबले दो मतों के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। यह कदम काफी हद तक बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप ही रहा, जिसके बारे में पिछले कई हफ्तों से कयास लगाए जा रहे थे।
दरों में इस बढ़ोतरी के बाद जापानी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में उछाल दर्ज किया गया, जिससे येन को निचली सतह से सहारा मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी मुद्रा मजबूत होकर 158.00 के आसपास कारोबार करती दिखी, जो कि तीन हफ्तों के उच्च स्तर से डॉलर की मामूली वापसी को दर्शाता है। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं ने भी येन की बिकवाली को सीमित रखा, भले ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मजबूती के चलते डॉलर इंडेक्स दो महीने के उच्चतम स्तरों के करीब अपनी बढ़त बनाए हुए है।
वाशिंगटन वार्ता और व्यापार युद्ध विराम का विस्तार
भू-राजनीतिक और व्यापारिक मोर्चे पर एक राहत भरी खबर वाशिंगटन से सामने आई। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच अमेरिकी राजधानी में एक अनिर्धारित द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय चर्चा के बाद दोनों देशों ने अपने व्यापार युद्ध विराम की अवधि को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। पूर्व समझौते के अनुसार यह द्विपक्षीय राहत नवंबर में समाप्त होने वाली थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 जनवरी तक जारी रखने का फैसला किया गया है।
इस व्यापारिक समझौते की पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आगामी आमने-सामने की मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि बाजार के जानकारों को इस शिखर वार्ता से किसी बहुत बड़े नीतिगत बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, उन्नत प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों के नियम और व्यापार विराम की दीर्घकालिक रूपरेखा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी ठोस प्रगति की तलाश की जा रही है।
सोने के भाव में ठहराव
सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान ठहराव देखा गया। पीली धातु अपने एक सप्ताह के निचले स्तर के आसपास सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आई। निवेशक किसी भी बड़ी दिशा में दांव लगाने से पहले ट्रंप और शी के बीच होने वाली वार्ता के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर बरती जा रही सख्ती ने भी फिलहाल सोने की कीमतों में किसी बड़े उछाल को रोक रखा है।

















