अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र लंबे समय की सुस्ती के बाद अब पुनरुद्धार की राह पर आगे बढ़ रहा है। रीशोरिंग की पहलों, रक्षा खर्च में बढ़ोतरी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई में भारी निवेश के चलते इस क्षेत्र में नई जान आई है। आईएनजी के विश्लेषकों जेम्स नाइटली और कोको झांग के अनुसार, अगले तीन वर्षों में अमेरिकी विनिर्माण के उत्पादन में सालाना 1.5 से 2 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की जा सकती है। हालांकि यह पूरी प्रगति एक समान नहीं है, बल्कि इस पूरे बदलाव में एक गहरा विभाजन भी साफ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां अत्याधुनिक और स्वचालन पर आधारित उद्योग बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक और श्रम आधारित क्षेत्र अब भी सिकुड़ रहे हैं।
आईएनजी का अनुमान और बीस साल की सुस्ती
विश्लेषकों का मानना है कि पिछले दो दशकों के सुस्त कामकाज को देखते हुए यह 1.5 से 2 प्रतिशत की सालाना अनुमानित वृद्धि काफी अहम मानी जाएगी। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस क्षेत्र में ठोस वापसी के संकेत मिले हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण आईएसएम उत्पादन सूचकांक में देखा गया है, जो पहले पचास अंक से नीचे रहकर संकुचन के दायरे में फंसा था, लेकिन अब पचास के पार जाकर आगे मजबूत विकास के स्पष्ट संकेत दे रहा है। कारोबारी सर्वेक्षणों से भी पता चला है कि कंपनियों की ऑर्डर बुक इस समय बेहद मजबूत स्थिति में है। यही मजबूत ऑर्डर बुक विनिर्माण की इस रिकवरी को लगातार रफ्तार दे रही है।
हाई-टेक और स्वचालित क्षेत्रों को राष्ट्रीय चैंपियन का दर्जा
इस विकास यात्रा में सबसे आगे वे क्षेत्र हैं जो उच्च मूल्यवर्धन और पूर्ण स्वचालन से लैस हैं। एआई और आधुनिक तकनीक की इस नई क्रांति में सरकार इन अग्रणी उद्योगों को राष्ट्रीय चैंपियन के रूप में देख रही है। अमेरिका में श्रमिकों की मजदूरी का स्तर काफी ऊंचा है, लेकिन उच्च मुनाफा और भारी मूल्यवर्धन करने वाले आधुनिक उद्योग इस बढ़ी हुई लागत को आसानी से वहन करने में सक्षम हैं। उद्योगों में एआई के उपयोग से कार्यकुशलता और उत्पादकता में सुधार आने की उम्मीद है, जिससे तकनीकी नवाचार को भी सहारा मिलेगा। इस वजह से फार्मास्यूटिकल, टेक्नोलॉजी, ट्रांसपोर्ट और एयरोस्पेस, इलेक्ट्रिकल और पावर से जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों के आगे भी काफी मजबूती से बढ़ने की पूरी संभावना है।
श्रम आधारित उद्योगों की चुनौतियां और स्टील का स्थान
आधुनिक उद्योगों के उलट कम मूल्यवर्धन वाले पारंपरिक विनिर्माण क्षेत्रों के लिए हालात अब भी काफी कठिन बने हुए हैं। ऐसे उद्योग जहां उत्पादन की कुल लागत में श्रम या मजदूरी का हिस्सा बहुत बड़ा होता है, वे आगे भी संघर्ष करते रहेंगे। जब तक इन उत्पादों को 'मेड इन अमेरिका' के नाम पर अतिरिक्त प्रीमियम मूल्य नहीं मिल जाता, तब तक उनका बने रहना मुश्किल रहेगा। भारी उद्योग जैसे कि स्टील इस विभाजन के बिल्कुल बीच में खड़े दिखाई देते हैं। हालांकि अमेरिकी स्टील उत्पादन में खर्च जरूर बढ़ा है, लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में लागत वृद्धि इससे भी ज्यादा दर्ज की गई है, जिससे इसे तुलनात्मक रूप से कुछ राहत मिल रही है।
टैरिफ, ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था
अमेरिका में विनिर्माण को आकर्षक बनाने में आयात पर लगे टैरिफ और ऊर्जा सुरक्षा जैसे पहलुओं का बहुत बड़ा योगदान है। इसके साथ ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कुल विकास दर भी विनिर्माण की इस वापसी को ठोस सहारा दे रही है। अमेरिका अपनी आर्थिक वृद्धि के मामले में यूरोप जैसे अन्य प्रमुख वैश्विक बाजारों को लगातार पीछे छोड़ रहा है। अगर साल 2023 से 2026 के आंकड़ों को देखें, तो इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने औसतन 2.5 प्रतिशत की वार्षिक दर से विस्तार दर्ज किया है, जबकि इसी अवधि में यूरोप की अर्थव्यवस्था औसतन सिर्फ 0.9 प्रतिशत की गति से ही आगे बढ़ सकी है।
वैश्विक बाजारों की चाल और मुद्रा विनिमय
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की तरफ फिसलता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों के मुताबिक वहां बेरोजगारी की दर 4.5 प्रतिशत के अनुमान से बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, हालांकि रोजगार में 39.5 हजार की बढ़ोतरी दर्ज हुई जो अनुमान से बेहतर थी। इसी बीच, डॉलर के मुकाबले जापानी येन में मजबूती देखी गई और यूएसडी/जेपीवाई तीन हफ्ते के अपने उच्चतम स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब आ गया। जापानी बॉन्ड यील्ड में तेजी और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के डर ने येन को सहारा दिया, जबकि फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण डॉलर इंडेक्स दो महीने के उच्च स्तर के करीब बना रहा।
सोने में नरमी और बैंक ऑफ जापान का बड़ा फैसला
कमोडिटी बाजार में सोने पर लगातार दूसरे दिन दबाव बना रहा। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना गिरकर 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया, जो इसका एक हफ्ते का निचला स्तर है। बाजार प्रतिभागी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक पर नजरें टिकाए हुए हैं। इस बैठक से किसी बड़े ऐलान की उम्मीद तो कम है, लेकिन निवेशक दुर्लभ धातुओं, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम के विस्तार पर किसी ठोस प्रगति का इंतजार कर रहे हैं। वहीं बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। केंद्रीय बैंक के बोर्ड में यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप था।

















