वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार बढ़त बनाए हुए है, जिसे घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन और केंद्रीय बैंक के कड़े मौद्रिक रुख से मजबूत सहारा मिल रहा है। सितंबर के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई आंकड़ों ने अन्य प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में जारी तेज गतिविधियों की वजह से वास्तविक ट्रेजरी यील्ड में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के एलियास हद्दाद के मुताबिक, दुनिया भर की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अमेरिकी आर्थिक रफ्तार कहीं ज्यादा बेहतर नजर आ रही है, जिसने डॉलर इंडेक्स को ऊंचे स्तरों पर टिकाए रखा है।
मुद्रा बाजार के साथ-साथ इस समय भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी निवेशकों की करीबी नजर बनी हुई है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध में संघर्ष विराम की अवधि बढ़ने से तनाव फिलहाल कुछ टलता दिख रहा है, लेकिन वैश्विक जोखिमों को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है।
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों से और दर वृद्धि के संकेत
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी नीति को लेकर नीति निर्माताओं की टिप्पणियों ने बाजार में डॉलर की मांग को और बढ़ा दिया है। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स ने हालिया स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में काफी लचीलापन दिखाई दे रहा है, हालांकि मुद्रास्फीति अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जॉन विलियम्स के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए इस साल के अंत तक एक और ब्याज दर वृद्धि पूरी तरह से उचित हो सकती है। जॉन विलियम्स के साथ-साथ बार की टिप्पणियों ने भी इस बात को पुख्ता किया है कि फेड फंड्स रेट में आगे और बढ़ोतरी की गुंजाइश बनी हुई है।
केंद्रीय बैंक के इस कड़े रुख ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसके चलते लंबे समय तक ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने और जरूरत पड़ने पर उन्हें और बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हुई है। इसी उम्मीद ने वित्तीय बाजारों में डॉलर को अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले काफी बढ़त दिलाई है।
10 साल की ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर
जिस मजबूती के कारण डॉलर में उछाल आया है, वही कारक अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को भी रिकॉर्ड स्तरों की ओर धकेल रहे हैं। इसके असर से दुनिया भर के सरकारी बॉन्ड बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड तेजी से बढ़कर 5.14 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जुलाई 2007 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। बॉन्ड यील्ड का यह उछाल वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल की बड़ी वजह बन रहा है।
बॉन्ड बाजार के विस्तृत आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि कच्चे तेल की मजबूत कीमतों की वजह से 10 साल की ब्रेक-ईवन मुद्रास्फीति दर में मामूली बढ़ोतरी हुई है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई के दबाव को दोबारा बढ़ा सकती हैं, जिससे बॉन्ड निवेशकों की चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच शिखर बैठक और व्यापार समझौता
वैश्विक बाजारों का कूटनीतिक ध्यान पूरी तरह से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली एक दिवसीय शिखर बैठक पर केंद्रित है। इस महत्वपूर्ण वार्ता से ठीक पहले ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने पुष्टि की कि दोनों देशों ने अपने व्यापार युद्ध विराम को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। पहले यह व्यापारिक संघर्ष विराम 10 नवंबर को समाप्त होने वाला था, जिसकी समयसीमा को अब बढ़ाकर 10 जनवरी तक कर दिया गया है।
हालांकि, इस राहत के बीच स्कॉट बेसेंट ने यह सवाल भी उठाया कि क्या चीन के साथ कोई बड़ा और दीर्घकालिक व्यापार समझौता वास्तव में संभव हो पाएगा या नहीं। इस वार्ता में बाजार के खिलाड़ी दुर्लभ खनिजों यानी रेयर अर्थ्स, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार समझौते के विस्तार से जुड़ी प्रगति पर करीबी नजर रख रहे हैं, हालांकि किसी बहुत बड़ी घोषणा की उम्मीदें फिलहाल कम ही हैं।
वैश्विक मुद्राओं का हाल: येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने में हलचल
अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख के बीच गुरुवार को एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों में मिला-जुला और उतार-चढ़ाव भरा रुख देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) 0.7000 के स्तर की ओर फिसलती दिखाई दी। इसका मुख्य कारण ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़े रहे, जिसमें बेरोजगारी दर 4.5 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि कुल रोजगार परिवर्तन 39.5 हजार रहा जो कि उम्मीदों से बेहतर था। ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी भी ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत को लेकर काफी सतर्क बने हुए हैं।
दूसरी ओर, डॉलर और जापानी येन की जोड़ी (USD/JPY) अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर एशियाई सत्र में 158.00 के आसपास सिमट गई। जापान में बॉन्ड यील्ड में आए उछाल और मुद्रा हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन को सहारा दिया, हालांकि फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और अमेरिकी यील्ड के दम पर डॉलर ने दो महीने के उच्च स्तर पर अपनी बढ़त कायम रखी। इस बीच, बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक कदम है और बाजार की पूर्व उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप रहा।
सर्राफा बाजार में भी दबाव देखा गया। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना लगातार दूसरे दिन नकारात्मक दायरे में रहा और 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक सप्ताह के निचले स्तर पर कारोबार करता नजर आया। ऊंची ब्याज दरों की संभावना और मजबूत डॉलर ने सोने की चमक को सीमित कर दिया है।

















