मुद्रा बाजार में मंगलवार को एशियाई सत्र के दौरान USD/CAD जोड़ी एक तंग दायरे में झूलती नजर आई और 1.4050 के स्तर से थोड़ा नीचे कारोबार करती रही। दिन के लिहाज से इसमें लगभग कोई बदलाव नहीं दिखा, क्योंकि बाजार को एक साथ दो विपरीत दिशाओं में खींचने वाले संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ कच्चे तेल की कीमतों में आई वापसी कनाडाई डॉलर को ताकत दे रही है, तो दूसरी तरफ भू-राजनीतिक अनिश्चितता अमेरिकी डॉलर को सहारा दे रही है। इसी रस्साकशी की वजह से जोड़ी पिछले दिन की मामूली रिकवरी को आगे नहीं बढ़ा पाई।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को कुछ सकारात्मक रफ्तार दी है। चूंकि कनाडाई डॉलर सीधे तौर पर कमोडिटी से जुड़ी मुद्रा है, इसलिए तेल की यह मजबूती लूनी को नीचे से टेक देती है और USD/CAD जोड़ी की तेजी पर ब्रेक लगाती है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर घटता उत्साह सेफ-हेवन माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर के हक में जाता है और इसी वजह से जोड़ी को कुछ सहारा मिल रहा है।
ईरान के रुख ने बढ़ाई उलझन
ताजा घटनाक्रम में ईरान ने सोमवार को साफ कहा कि अमेरिका के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं चल रही है और न ही किसी बैठक की कोई योजना है। ईरान का यह बयान डोनाल्ड ट्रंप के दावे के ठीक उलट है, जिन्होंने बातचीत दोबारा शुरू होने का हवाला देते हुए सप्ताहांत पर होने वाले हमलों को रोकने की बात कही थी। यानी जिस आधार पर हमले टाले गए थे, उसी पर अब सवाल खड़े हो गए हैं।
इसके अलावा कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमलों की गैर-पुष्ट खबरों ने भी माहौल को गरमा दिया है। ऐसी खबरों के चलते कारोबारी एक बार फिर भू-राजनीतिक जोखिम को कीमतों में शामिल करने लगे हैं। इसी वजह से ग्रीनबैक अपनी 17 जून के निचले स्तर से हुई मजबूत रिकवरी को बचाए रखने में कामयाब रहा और USD/CAD में मंदी की तरफ दांव लगाने वालों को नए सौदे बनाने से रोक रहा है।
कनाडाई डॉलर को दिशा देने वाले असली कारक
कनाडाई डॉलर की चाल किन बातों पर निर्भर करती है, यह समझना जरूरी है। सबसे बड़ा कारक बैंक ऑफ कनाडा की तय की गई ब्याज दरें हैं। इसके अलावा तेल की कीमत, जो कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात है, देश की अर्थव्यवस्था की सेहत, महंगाई और व्यापार संतुलन भी अहम भूमिका निभाते हैं। व्यापार संतुलन का मतलब है कनाडा के निर्यात और आयात के मूल्य के बीच का अंतर।
इनके अलावा बाजार की मनोदशा भी बड़ा असर डालती है। जब निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों की ओर झुकते हैं, यानी रिस्क-ऑन का माहौल होता है, तो यह कनाडाई डॉलर के लिए अच्छा माना जाता है। इसके उलट जब निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रहते हैं, यानी रिस्क-ऑफ का दौर होता है, तो लूनी पर दबाव आता है। साथ ही, अमेरिका कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत भी कनाडाई डॉलर को सीधे प्रभावित करती है।
बैंक ऑफ कनाडा की भूमिका
बैंक ऑफ कनाडा ब्याज दरों का स्तर तय करके कनाडाई डॉलर पर बड़ा असर डालता है। दरअसल यह वह दर होती है जिस पर बैंक आपस में एक-दूसरे को कर्ज देते हैं, और इसी से आम लोगों तक ब्याज दरों का स्तर तय होता है। केंद्रीय बैंक का मुख्य मकसद महंगाई को 1 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना है, और इसके लिए वह ब्याज दरें ऊपर-नीचे करता रहता है।
आम तौर पर अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें कनाडाई डॉलर के लिए फायदेमंद रहती हैं। इसके अलावा बैंक ऑफ कनाडा क्रेडिट की स्थितियों को प्रभावित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग जैसे औजारों का भी इस्तेमाल करता है। इनमें ईजिंग कनाडाई डॉलर के लिए नकारात्मक मानी जाती है, जबकि टाइटनिंग इसके लिए सकारात्मक होती है।
तेल और महंगाई का असर
तेल की कीमत कनाडाई डॉलर की चाल तय करने वाला सबसे अहम पहलू है। चूंकि पेट्रोलियम कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात है, इसलिए तेल की कीमत का सीधा और तुरंत असर कनाडाई डॉलर पर पड़ता है। मोटे तौर पर, जब तेल की कीमत चढ़ती है तो कनाडाई डॉलर भी मजबूत होता है, क्योंकि मुद्रा की कुल मांग बढ़ जाती है। जब तेल की कीमत गिरती है तो इसका उल्टा असर होता है। ऊंची तेल कीमतें व्यापार संतुलन के सकारात्मक रहने की संभावना भी बढ़ाती हैं, जो कनाडाई डॉलर को और सहारा देता है।
महंगाई को लेकर पुरानी सोच यही थी कि यह किसी भी मुद्रा के लिए नकारात्मक होती है, क्योंकि इससे पैसे की कीमत घट जाती है। लेकिन सीमा-पार पूंजी पर नियंत्रण ढीले पड़ने के बाद आधुनिक दौर में इसका उल्टा देखने को मिला है। ज्यादा महंगाई होने पर केंद्रीय बैंक अक्सर ब्याज दरें बढ़ा देते हैं, जिससे दुनिया भर के निवेशक अपना पैसा वहां रखना पसंद करते हैं जहां उन्हें बेहतर रिटर्न मिले। इससे स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ती है, और कनाडा के मामले में यह मुद्रा कनाडाई डॉलर है।
आर्थिक आंकड़े क्यों मायने रखते हैं
अर्थव्यवस्था की सेहत नापने वाले आर्थिक आंकड़े भी कनाडाई डॉलर की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। GDP, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता धारणा से जुड़े सर्वे, ये सभी कनाडाई डॉलर को प्रभावित कर सकते हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था कनाडाई डॉलर के लिए अच्छी खबर होती है। यह न सिर्फ ज्यादा विदेशी निवेश खींचती है, बल्कि बैंक ऑफ कनाडा को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए भी प्रेरित कर सकती है, जिससे मुद्रा और मजबूत होती है। इसके उलट, अगर आर्थिक आंकड़े कमजोर रहते हैं तो कनाडाई डॉलर के गिरने की आशंका बढ़ जाती है।
फिलहाल तेल की मजबूती और भू-राजनीतिक अनिश्चितता एक-दूसरे को काट रही हैं, इसलिए USD/CAD जोड़ी में कोई साफ दिशा बनने से पहले बाजार की नजर आगे आने वाले संकेतों पर टिकी रहेगी।



















