मंगलवार, 20 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां ब्रिटिश पाउंड प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में सबसे मजबूत स्थिति में कारोबार करता दिखा। श्रम बाजार से जुड़े सकारात्मक आंकड़ों के बाद पाउंड स्टर्लिंग में तेज लिवाली दर्ज की गई, और इसने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सर्वाधिक बढ़त हासिल की। दूसरी तरफ, सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में सीमित सुधार दिखाने के बाद अमेरिकी डॉलर पर एक बार फिर मंदी का दबाव हावी हो गया। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने डॉलर की तेजी पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे वैश्विक मुद्रा विनिमय के विभिन्न जोड़ों में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।
ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से अमेरिकी डॉलर बैकफुट पर
सप्ताह की शुरुआत में मामूली गिरावट का सामना करने के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स ने सोमवार को ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में सुधार के सहारे वापसी की थी और दिन का कारोबार बिना किसी बड़े बदलाव के समाप्त किया था। हालांकि, मंगलवार के शुरुआती कारोबारी घंटों में 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पीछे हटकर 5.1 प्रतिशत की दिशा में लुढ़क गई। यील्ड में आई इस कमजोरी ने अमेरिकी मुद्रा पर दोबारा बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया। डॉलर इंडेक्स गिरकर 101.80 के स्तर के नीचे नकारात्मक दायरे में बना रहा। विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाले करेंसी हीट मैप के अनुसार, आधार मुद्रा और उद्धृत मुद्रा के बीच के बदलते अनुपातों में डॉलर अधिकांश प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के सामने कमजोर पड़ता दिखाई दिया। निवेशक इस समय अमेरिकी ऋण बाजार में पैदा हो रहे ब्याज दर परिदृश्य और आने वाले वृहद आर्थिक संकेतों का बारीकी से आकलन कर रहे हैं।
फ्रांस के राजनीतिक संकट से यूरो क्षेत्र के सामने नीतिगत उलझन
यूरोपीय महाद्वीप में आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ती अनिश्चितता ने वित्तीय विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। राबोबैंक के विश्लेषकों ने स्पष्ट किया है कि फ्रांस में चल रही राजनीतिक उठापटक ने यूरो क्षेत्र को एक अत्यंत जटिल नीतिगत दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। विश्लेषकों ने इस स्थिति को एक दबी-छिपी व्यावहारिक राजनीति की ऐसी दोहरी चुनौती बताया है, जहां यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) को बेहद कठिन फैसले लेने होंगे। ईसीबी के सामने पहला विकल्प यह है कि यदि जरूरत पड़े तो वह यूरो की साख की कीमत पर और जर्मनी के भारी विरोध का जोखिम उठाकर फ्रांस को आर्थिक संकट से बाहर निकाले। वहीं दूसरा विकल्प यह है कि ईसीबी फ्रांस को किसी भी तरह की वित्तीय सहायता देने से पूरी तरह परहेज करे, लेकिन ऐसा करने से यूरोपीय संघ की समग्र आर्थिक, राजनीतिक और वित्तीय स्थिरता गंभीर खतरे में पड़ जाएगी।
राबोबैंक ने इस बात पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं कि क्या ईसीबी के लिए यह संभव होगा कि वह फ्रांस के संकट के असर से बाकी सदस्य देशों को तो सुरक्षित निकाल ले और पेरिस को अपनी समस्याएं खुद सुलझाने के लिए उसके हाल पर छोड़ दे। विश्लेषकों का मानना है कि फ्रांस से शुरू होने वाली यह उथल-पुथल पूरे यूरोपीय ब्लॉक में फैलने की प्रबल आशंका रखती है। उनके आकलन के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में बाजार में किसी सामान्य स्थिति में लौटने के बजाय और अधिक अस्थिरता देखने को मिलने की संभावना कहीं अधिक है। यही कारण है कि फ्रांस से जुड़े जोखिमों के किसी भी नए स्तर पर पहुंचने और उस पर ईसीबी के संभावित कदमों को लेकर वित्तीय बाजार अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और पाउंड स्टर्लिंग की बुनियादी ताकत
विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड का एक अत्यंत समृद्ध और ऐतिहासिक महत्व रहा है। पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा मानी जाती है, जिसका इतिहास वर्ष 886 ईस्वी से जुड़ा हुआ है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और वैश्विक स्तर पर चौथी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा इकाई है। वर्ष 2022 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा लेन-देन में इसकी कुल हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है, जो प्रतिदिन औसतन 630 अरब डॉलर के विशाल कारोबार के बराबर बैठती है। व्यापारिक दृष्टि से इसके सबसे महत्वपूर्ण युग्मों में GBP/USD शामिल है, जिसे ट्रेडर्स 'केबल' के नाम से भी पुकारते हैं और यह पूरे वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसके अलावा GBP/JPY, जिसे ट्रेडर्स समुदाय में 'ड्रैगन' के रूप में जाना जाता है, 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि EUR/GBP की कुल विदेशी मुद्रा बाजार में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज है।
पाउंड स्टर्लिंग के विनिमय मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे प्रमुख कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है, क्योंकि यही केंद्रीय बैंक इस मुद्रा को जारी करने का वैधानिक अधिकार रखता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड अपने नीतिगत फैसले मुख्य रूप से मूल्य स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य को ध्यान में रखकर लेता है, जिसका मानक लगभग 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर को बनाए रखना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का मुख्य हथियार नीतिगत ब्याज दरों में समायोजन करना होता है। जब अर्थव्यवस्था में महंगाई दर बहुत अधिक हो जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके ऋण की लागत को महंगा करता है, जिससे व्यक्तियों और व्यापारिक घरानों के लिए उधारी लेना कठिन हो जाता है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर पाउंड के लिए बेहद सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि दुनिया भर के निवेशक अपने धन को अधिक प्रतिफल वाले ब्रिटेन के वित्तीय बाजारों में निवेश करने के लिए आकर्षित होते हैं।
इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से बहुत नीचे गिर जाती है, तो इसे आर्थिक विकास में सुस्ती का संकेत माना जाता है। ऐसे हालात में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है ताकि बाजार में कर्ज सस्ता हो सके और निजी कंपनियां विकासोन्मुख परियोजनाओं में अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित हों। इसके साथ ही, अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को आंकने वाले आंकड़े जैसे कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई (PMI), तथा रोजगार रिपोर्ट सीधे तौर पर पाउंड के रुझान को संचालित करते हैं। यदि आर्थिक आंकड़े मजबूत आते हैं, तो वे न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करते हैं बल्कि केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें ऊंची रखने या बढ़ाने का आधार भी प्रदान करते हैं, जो सीधे पाउंड को मजबूत करता है। वहीं, आर्थिक कमजोरी पाउंड के मूल्य में गिरावट लाती है। इसके अतिरिक्त, व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) भी पाउंड के लिए एक अहम संकेतक है। जब कोई देश आयात की तुलना में अपने उत्पादों का निर्यात अधिक करता है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उन उत्पादों को खरीदने के लिए पाउंड की मांग बढ़ जाती है, जिससे शुद्ध व्यापार अधिशेष मुद्रा को शक्ति प्रदान करता है।
येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कमोडिटी बाजार का रुख
जापानी येन से जुड़े मोर्चे पर, USD/JPY मुद्रा जोड़ी मंगलवार को बैकफुट पर रही और 158.00 के स्तर की दिशा में फिसलती नजर आई, जबकि पिछले सप्ताह शुक्रवार को यह हरे निशान में बंद हुई थी। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान यह जोड़ी 158.50 के आसपास स्थिर बनी रही। इस बीच, जापानी वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि रक्षा खर्च में होने वाली संभावित बढ़ोतरी के वित्तपोषण को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार वित्तीय स्थिरता और राजकोषीय अनुशासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए आवश्यक धन जुटाने के उपायों पर विचार करेगी। शुक्रवार को जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति आंकड़े जारी होने हैं, जिसके चलते अधिकांश ट्रेडर्स कोई नया आक्रामक दांव लगाने के बजाय किनारे बैठकर इंतजार करना पसंद कर रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों ने येन के मुकाबले डॉलर को नीचे के स्तरों पर हल्का सहारा जरूर प्रदान किया है।
एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने भी अपनी स्थिति सुधारी और बाजार के सुधरते मिजाज के बीच AUD/USD 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ बढ़ता दिखाई दिया। अमेरिकी डॉलर की रिकवरी थमने से भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मजबूती मिली। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम और बड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रौद्योगिकी कंपनियों के आगामी तिमाही वित्तीय नतीजों को लेकर बनी सतर्कता इस जोड़ी की बढ़त को सीमित रख सकती है।
कमोडिटी और परिसंपत्ति बाजार पर नजर डालें तो यूरोपीय कारोबार की शुरुआत में सोने की कीमत फिसलकर 4,120 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गई। बहुमूल्य धातु को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ा। अमेरिकी हाइपरस्केलर्स द्वारा अपने तीसरे तिमाही (Q3) के नतीजों की रिपोर्ट पेश किए जाने से पहले यील्ड में उतार-चढ़ाव दिखा। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 0.35 प्रतिशत घटकर 5.13 प्रतिशत के आसपास कारोबार करती देखी गई। दूसरी ओर, डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र में नियर प्रोटोकॉल (NEAR Protocol) की कीमत में मंगलवार को लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले दिन की 2 प्रतिशत की कमजोरी का ही क्रम था। इस गिरावट के बावजूद संस्थागत निवेशकों की मांग स्थिर बनी हुई है, जिसका प्रमाण बिटवाइज़ के नियर-केंद्रित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में सोमवार को हुआ 50 लाख डॉलर (5 मिलियन डॉलर) से अधिक का शुद्ध निवेश है।

















