अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में दर्ज की गई गिरावट के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। सामान्य तौर पर जब सरकारी बॉन्ड की यील्ड गिरती है तो मुद्रा पर दबाव बनता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में मुद्रास्फीति के दीर्घकालिक जोखिमों और फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत सख्ती की आशंकाओं ने डॉलर को सहारा दिया है। राबोबैंक की रणनीतिकार मौली श्वार्ट्ज के विश्लेषण के अनुसार, पूरी यील्ड कर्व में गिरावट दर्ज की गई, जिससे दिन के कारोबार में डॉलर जी10 मुद्राओं में तीसरा सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला साबित हुआ, फिर भी अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (डीएक्सवाई) अपने हालिया उच्च स्तर 102 के करीब मजबूती से टिका रहा। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यह इंडेक्स 102.18 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 101.83 के मुकाबले 0.34 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है।
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों का सख्त रुख और ब्याज दर अनुमान
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं की तरफ से आ रहे बयानों ने वित्तीय विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। सैन फ्रांसिस्को फेड की मैरी डेली, जो एक वैकल्पिक वोटिंग सदस्य हैं, ने रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नए व्यापारिक शुल्क (टैरिफ) और ऊर्जा लागतों का संयुक्त दबाव अतिरिक्त दर बढ़ोतरी की जरूरत पैदा कर सकता है। उनके इस विचार का समर्थन करते हुए श्मिट ने भी मुद्रास्फीति के लगातार बने रहने वाले दबावों पर जोर दिया। श्मिट का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस समय न केवल बढ़ती कीमतों और महंगाई पर काबू पाने की लड़ाई लड़ रहा है, बल्कि वित्तीय जगत में अपनी नीतिगत साख और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए भी कड़े कदम उठाने को तैयार है।
राबोबैंक का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व दिसंबर 2026 की एफओएमसी बैठक में नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। विश्लेषकों के अनुसार इस वृद्धि के बाद केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों को 2027 तक लगातार उच्च स्तर पर स्थिर बनाए रख सकता है। बाजार प्रतिभागी अब आगामी एफओएमसी बैठक के मिनट्स, न्यूयॉर्क फेड के एक साल के मुद्रास्फीति अनुमान और अगस्त महीने के उपभोक्ता ऋण आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो भविष्य की दिशा तय करने में अहम साबित होंगे।
बॉन्ड बाजार की चाल और तकनीकी संकेत
अमेरिकी ऋण बाजार में पिछले सत्र के दौरान 2-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में सोमवार के बंद भाव की तुलना में 2.3 आधार अंकों की गिरावट आई, जबकि 10-वर्षीय यील्ड 4.5 आधार अंक टूटकर 5.26 प्रतिशत पर आ गई। यील्ड में इस नरमी से डॉलर पर तात्कालिक दबाव जरूर बना, लेकिन समग्र तकनीकी ढांचा डॉलर के पक्ष में बना हुआ है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का 14-दिवसीय आरएसआई 70 पर है, जो अत्यधिक खरीदारी (ओवरबॉट) की स्थिति दिखाता है। वहीं एमएसीडी 0.64 पर है (सिग्नल लाइन 0.50 और हिस्टोग्राम 0.13), जो तेजड़ियों के दबदबे की पुष्टि करता है।
मूविंग एवरेज के मोर्चे पर, ईएमए 50 (100.45) का ईएमए 200 (99.53) से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस की पुष्टि करता है, जो दीर्घकालिक तेजी का स्पष्ट संकेत है। 20-दिवसीय ईएमए 101.06, एसएमए 50 100.04 और एसएमए 200 99.33 पर स्थित हैं। बॉलिंजर बैंड्स 98.89 से 102.78 के दायरे में फैले हैं और मध्य रेखा 100.83 पर है। एडीएक्स 40 के स्तर पर एक मजबूत ट्रेंड की ओर इशारा कर रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक संकेतक की फास्ट लाइन 85 और सिग्नल लाइन 81 पर है। तकनीकी पिवट 102.10 पर है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस 102.29 और दूसरा रेजिस्टेंस 102.41 पर देखा जा रहा है, जबकि सपोर्ट 101.98 और 101.79 पर स्थित हैं। डॉलर इंडेक्स का 52-सप्ताह का दायरा 95.55 से 102.54 के बीच रहा है।
वैश्विक मुद्राओं पर डॉलर की मजबूती का व्यापक असर
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में दोबारा हलचल शुरू होने से डॉलर में निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय हो गए हैं। इस वजह से अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं को भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई कारोबारी सत्र में 0.7000 के नीचे नकारात्मक रुख के साथ संघर्ष करता दिखा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सख्त नीतिगत संकेतों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा अपनी हालिया रिकवरी को बरकरार रखने में नाकाम रही है।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बैंक ऑफ जापान के नरम रुख और अमेरिकी डॉलर की सुरक्षित निवेश वाली मांग ने इस जोड़ी को सहारा दिया है, जहां कारोबारी 200-दिवसीय एसएमए के स्तर को पार करने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) एक जटिल दुविधा में फंस गया है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति लक्ष्य से लगभग दोगुनी हो, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में तेजी से इजाफा करता है। लेकिन मौजूदा दौर में बॉन्ड बाजार खुद वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर रहा है, जिससे ईसीबी के नीतिगत विकल्पों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है।
भारतीय रुपये में भारी कमजोरी और आरबीआई का फैसला
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति बैठक के फैसलों के बाद भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज गिरावट दर्ज की गई। यूएसडी/आईएनआर (USD/INR) की विनिमय दर उछलकर 96.72 के करीब पहुंच गई, जो पिछले चार महीनों का उच्चतम स्तर है। नीतिगत समीक्षा बैठक में आरबीआई ने अपनी प्रमुख रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने का फैसला किया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है। हालांकि इस नीतिगत सख्ती के बावजूद विदेशी पूंजी के प्रवाह और वैश्विक डॉलर की मजबूती के चलते रुपये को सहारा नहीं मिल सका और इसमें कमजोरी का रुख गहरा गया।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर गहराता दबाव
मजबूत डॉलर और सख्त मौद्रिक नीतियों का असर कमोडिटी और डिजिटल एसेट बाजारों पर भी साफ देखा जा रहा है। शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान सोने की कीमतों में कमजोरी का रुख बना रहा और यह 4,100 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के निचले स्तर के करीब आ गया। डॉलर में मंगलवार की सुस्ती के बाद दोबारा लौटी मांग ने सर्राफा बाजार के निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन (Dogecoin) पर बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है। इस सप्ताह 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ डॉगकॉइन 0.090 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। डेरिवेटिव डेटा से पता चलता है कि मंदी की पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और बाजार ओवरहीटेड परिस्थितियों में है। कमजोर होते मोमेंटम संकेतक आने वाले दिनों में डॉगकॉइन में और नुकसान की संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे सटोरिया निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।























