संयुक्त राज्य अमेरिका में थोक मूल्य स्तर पर मुद्रास्फीति की रफ्तार में अप्रत्याशित और जोरदार उछाल दर्ज किया गया है। उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई में हुए बदलावों के अनुसार, सितंबर महीने में उत्पादक महंगाई दर बढ़कर 6.3 प्रतिशत के स्तर पर जा पहुंची। इससे ठीक पिछले महीने यानी अगस्त में यह दर 5.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वित्तीय बाजार और अर्थशास्त्री सितंबर के लिए 5.3 प्रतिशत की दर का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन ताजा जारी आंकड़ों ने बाजार के इस अनुमान को काफी बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है। उत्पादन लागत में आई इस तेजी ने संकेत दिया है कि औद्योगिक स्तर पर मूल्य दबाव अभी भी बना हुआ है।
मासिक आधार पर पीपीआई और कोर मुद्रास्फीति की स्थिति
आंकड़ों के बारीक विश्लेषण से पता चलता है कि केवल वार्षिक दर ही नहीं, बल्कि महीने-दर-महीने के आंकड़े भी काफी तेज रहे हैं। मासिक आधार पर सितंबर में पीपीआई में 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी तुलना में विश्लेषक केवल 0.5 प्रतिशत की मासिक वृद्धि की उम्मीद कर रहे थे। इस प्रकार मासिक गति भी अनुमान से दोगुनी से अधिक रही है।
खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को अलग रखकर देखे जाने वाले कोर पीपीआई के आंकड़ों ने भी नीति निर्माताओं और निवेशकों को चौंकाया है। खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर पीपीआई में मासिक आधार पर 0.7 प्रतिशत तथा वार्षिक आधार पर 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ये दोनों ही आंकड़े विशेषज्ञों के पूर्व अनुमानों से काफी ऊपर रहे हैं। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में यह लगातार बढ़त दर्शाती है कि बुनियादी उत्पादन शृंखला में लागत का दबाव व्यापक रूप ले चुका है।
मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की प्रतिक्रिया
थोक महंगाई के इन गर्म आंकड़ों के सामने आने के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में नीचे के स्तरों से तेज सुधार देखने को मिला। मजबूत आंकड़ों ने डॉलर को अपने दिन के अधिकांश नुकसान को मिटाने में मदद की। हालांकि ताजा आंकड़ों के समय डॉलर इंडेक्स दिन के कारोबार में 0.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 102.22 के स्तर पर बना हुआ था। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की चाल मिली-जुली रही, जहां स्विस फ्रैंक के मुकाबले अमेरिकी डॉलर सबसे अधिक कमजोर साबित हुआ।
मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी निराशाजनक ऑस्ट्रेलियाई रोजगार आंकड़ों के कारण 0.6950 के करीब दबाव में रही। इसने गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान अपने मासिक उच्च स्तर से पिछले दिन की गिरावट को और आगे बढ़ाते हुए एक नया साप्ताहिक निचला स्तर छुआ। इस बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने बुधवार को आए मजबूत अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों के बाद बने अप्रैल 2025 के उच्च स्तर से डॉलर को नीचे खींचने का काम किया, जिससे इस जोड़ी का नुकसान सीमित रह सका।
येन, सोना और वित्तीय संपत्तियों का प्रदर्शन
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी ने अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से पिछले दिन की गिरावट को और गहरा कर दिया। गुरुवार के एशियाई कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव बढ़ने से यह जोड़ी 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गई। बाजार के कारोबारी इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को संभालने के लिए बाजार में सीधा हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके साथ ही चीन द्वारा बॉन्ड खरीद से जुड़ी चर्चाओं के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आई, जिसने डॉलर पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
दूसरी ओर, सोने की कीमतों में गुरुवार को नए सिरे से जोरदार लिवाली देखी गई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े निवेशों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी फैल गई। इस कमजोरी ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज गिरावट को जन्म दिया और डॉलर को उसके नए वार्षिक उच्च स्तर से नीचे धकेल दिया। इस दौरान हाजिर सोना यानी एक्सएयू/यूएसडी लगभग 4,155 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जिसमें दिन के आधार पर 1.21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
क्रिप्टो बाजार की रिकवरी और ब्रिटेन का आगामी बजट
डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में विश्लेषकों का रुझान जुलाई से ही तेजी का बना हुआ है। बिटकॉइन, एथेरियम, सोलाना, बीएनबी और एक्सआरपी जैसी शीर्ष पांच क्रिप्टोकरेंसी ने 2022-2023 के बाजार चक्र की तुलना में कहीं अधिक तेज और मजबूत सुधार दिखाया है। क्रिप्टोक्वांट के अनुसार, प्रमुख टोकनों की इस तेज वापसी ने संस्थागत और खुदरा निवेशकों के बीच सकारात्मक धारणा को फिर से स्थापित किया है।
इधर ब्रिटेन में चांसलर द्वारा अपना पहला बजट पेश किए जाने में दो सप्ताह से भी कम समय बचा है। ब्रिटेन के संदर्भ में इस बार का आर्थिक और वित्तीय माहौल काफी उत्साहित करने वाला बना हुआ है। बजट से पहले यूके सरकार के बॉन्डों में तेजी देखने को मिल रही है, एफटीएसई 100 इस सप्ताह प्रमुख शेयर सूचकांकों में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बन गया है, और ब्रिटिश पाउंड भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिरता हासिल करता दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर वैश्विक वित्तीय बाजार उत्पादन लागत में आए इस नए उछाल और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नीतिगत घटनाक्रमों के बीच खुद को समायोजित कर रहे हैं।



















