अमेरिकी आर्थिक कैलेंडर में इस कारोबारी हफ्ते के दौरान अपेक्षाकृत सीमित संख्या में आंकड़े सामने आने की संभावना है, लेकिन जो प्रमुख संकेतक जारी होने वाले हैं, वे वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विश्लेषकों मुनोज़ और नीर के अनुमान के अनुसार, इस सप्ताह अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े अपेक्षाकृत शांत रहने वाले हैं। इसके बावजूद निवेशकों का मुख्य ध्यान आईएसएम सर्विसेज इंडेक्स, साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन कंज्यूमर सेंटीमेंट और फेडरल रिजर्व के नीतिगत बयानों पर टिका रहेगा।
अमेरिकी श्रम बाजार और आर्थिक आंकड़ों की स्थिति
अमेरिकी लेबर मार्केट के हालिया रुझानों पर गौर करें तो सितंबर महीने के पेरोल आंकड़ों ने पिछली अवधि में अनुमान से कमजोर रहकर बाजार को चौंकाया था। हालांकि, विस्तृत विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि रोजगार बाजार की अंतर्निहित नींव अब भी काफी मजबूत बनी हुई है। नौकरियों की संख्या में आई इस सुस्ती की एक बड़ी वजह मौसमी कारक रहे, विशेष रूप से लेजर और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में इसका असर साफ दिखाई दिया। तीन महीने और छह महीने के औसत रोजगार आंकड़ों को देखें तो नौकरी सृजन अब भी ब्रेक-ईवन के दायरे के भीतर बना हुआ है।
इसी तरह, बेरोजगारी दर में 4.2 प्रतिशत तक की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। मुनोज़ और नीर के अनुसार, बेरोजगारी दर में यह हल्का इजाफा सकारात्मक कारणों से हुआ, क्योंकि इस दौरान श्रम भागीदारी दर और रोजगार से आबादी का अनुपात दोनों ही बढ़ते हुए दिखाई दिए। इसका सीधा मतलब यह है कि अधिक संख्या में नागरिक काम की तलाश में सक्रिय हुए हैं, जिससे आर्थिक आधार के लचीले बने रहने का संकेत मिलता है।
आईएसएम सर्विसेज और कंज्यूमर सेंटीमेंट के अनुमान
सर्विस सेक्टर के मोर्चे पर, आईएसएम सर्विसेज इंडेक्स के सितंबर में गिरकर 54.0 के स्तर पर आने की संभावना जताई गई है, जो कि बाजार के आम सहमति अनुमान 55.0 से नीचे है। अगस्त में इस सूचकांक में अप्रत्याशित बढ़त देखने को मिली थी, जिसे अब विपरीत दिशा में मुड़ते देखा जा सकता है। हाल ही में मजबूत हुए नए ऑर्डर और कारोबारी गतिविधियों के घटक इस गिरावट की अगुवाई कर सकते हैं। इसके विपरीत, रोजगार घटक में लगातार दूसरी रिपोर्ट में सुधार की उम्मीद है, यद्यपि इसके संकुचन के दायरे में ही बने रहने का अनुमान है।
इसके अलावा, पिछले दो महीनों से लगातार बढ़ती कीमतों के कारण प्राइसेज पेड घटक पर भी बाजार भागीदारों की कड़ी नजर रहेगी। अन्य आंकड़ों में, साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स में मामूली बढ़ोतरी का अनुमान है, जबकि यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन सेंटीमेंट इंडेक्स के फिसलकर 47.5 पर आने की संभावना व्यक्त की गई है। इस सप्ताह फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के भाषण भी चर्चा में रहेंगे, जिनमें वॉलर के संबोधन और एफओएमसी की बैठकों के मिनट्स को सबसे अहम माना जा रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर का दबाव और उतार-चढ़ाव
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की नई मजबूती का सीधा दबाव अन्य प्रमुख मुद्राओं पर देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान एयूडी/यूएसडी में नई बिकवाली दर्ज की गई और यह जोड़ी फिसलकर 0.6900 के करीब पहुंच गई। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के व्यापारी अब कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी ब्याज दर अपेक्षाओं पर नजर बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर, यूएसडी/जेपीवाई ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। हालांकि फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हुई हैं, फिर भी भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। इसके बावजूद, बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम जापानी येन को सहारा देकर इस जोड़ी की ऊपरी चाल को सीमित कर सकते हैं। वहीं, यूरो/यूएसडी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 तक लुढ़क गई थी और जनवरी के अपने 1.2082 के शिखर से काफी नीचे कारोबार कर रही है, जिसकी वजह ऊर्जा संकट की चिंताएं और डॉलर का दबदबा है।
सोने की चाल और कच्चे तेल के भंडारों से आपूर्ति
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें हफ्ते की शुरुआत में 4,150 डॉलर प्रति औंस के करीब अपनी सुधार बढ़त को थामे हुए दिखाई दीं और पिछले हफ्ते के दायरे में ही बनी रहीं। कच्चे तेल की गिरती कीमतों, बॉन्ड यील्ड में नरमी और फेड दर वृद्धि की घटती उम्मीदों के बावजूद अमेरिकी डॉलर अपने 17 महीने के उच्चतम स्तर पर लौट आया है, जिसके चलते सोने का तकनीकी परिदृश्य निकट अवधि में नीचे की तरफ झुका हुआ नजर आ रहा है।
कच्चे तेल के मोर्चे पर, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के भाव लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज करते हुए सोमवार को एशियाई कारोबार में 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए। तेल की कीमतों में यह तीव्र गिरावट तब देखी गई जब जी7 देशों ने अपने आपातकालीन भंडारों से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति व्यक्त की। जी7 राष्ट्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से बचने का संकल्प भी लिया, जिसका सीधा असर ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति संतुलन और कीमतों पर पड़ा है।


















