अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की भारी मांग देखने को मिल रही है, जिसके चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) में सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान कमजोरी दर्ज की गई। AUD/USD की जोड़ी 0.15% की गिरावट के साथ 0.6935 के आसपास फिसल गई। बाजार में अमेरिकी मुद्रा का दबदबा साफ नजर आ रहा है, जिसे यूरोप में फ्रांस के बजटीय संकट और जारी वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से लगातार मजबूती मिल रही है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, यह जोड़ी 0.6941 के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.6929 से मामूली 0.17% ऊपर है, लेकिन व्यापक रुझान अभी भी मंदी का बना हुआ है।
फ्रांस के बजटीय संकट ने बढ़ाया डॉलर का आकर्षण
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण यूरोपीय संघ की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में गहराता राजकोषीय संकट है। फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर द्वारा पेश किए गए साल 2027 के बजट प्रस्ताव को लेकर वित्तीय बाजारों में भारी अविश्वास देखा जा रहा है। निवेशकों को संदेह है कि देश की संसद इस बजट विधेयक को बिना किसी बड़े बदलाव के पारित करेगी।
ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन (BBH) के रणनीतिकार एलियास हद्दाद के अनुसार, फ्रांस के सामने भारी वित्तीय चुनौतियां खड़ी हैं। हद्दाद ने आगाह किया है कि महत्वपूर्ण रियायतें दिए बिना संसद से इस प्रस्ताव का पारित होना बेहद मुश्किल है, जो राजकोषीय अनुशासन के रास्ते में गंभीर राजनीतिक बाधाओं को रेखांकित करता है। उन्होंने तर्क दिया है कि 18 अप्रैल 2027 को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच समझौते की गुंजाइश सीमित है, ऐसे में साल 2026 के बजट को ही आगे बढ़ाना सबसे संभावित परिणाम दिखाई देता है। राजनीतिक अनिर्णय और बजट अटकलों ने यूरो पर भारी दबाव डाला है, जिसका सीधा लाभ डॉलर को सुरक्षित निवेश के तौर पर मिला है।
डॉलर सूचकांक 17 महीने के उच्चतम स्तर पर
छह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को दर्शाने वाला अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) 0.5% की बढ़त के साथ 102.50 के स्तर तक पहुंच गया। यह पिछले 17 महीनों से अधिक समय में डॉलर का उच्चतम स्तर है। मुद्रा हीटमैप पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर ने सभी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले बढ़त बनाई, जिसमें यूरो सबसे अधिक कमजोर साबित हुआ।
अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी यह प्रभाव साफ देखा गया। EUR/USD की जोड़ी फिसलकर 1.1312 पर आ गई, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और यह अपने जनवरी के उच्चतम स्तर 1.2082 से काफी नीचे आ चुकी है। यूरोप की ऊर्जा संकट के प्रति संवेदनशीलता और डॉलर की चौतरफा मजबूती ने यूरो को कमजोर किया है। इसी बीच, जापानी येन के मुकाबले USD/JPY ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) की दरों में वृद्धि की संभावना और संभावित बाजार हस्तक्षेप की आशंका येन को कुछ सहारा दे सकती है।
AUD/USD का तकनीकी विश्लेषण और अहम स्तर
तकनीकी चार्ट पर AUD/USD के लिए परिदृश्य मंदी की ओर झुका हुआ है। ऊपर की तरफ, पहला मजबूत प्रतिरोध 20-दिवसीय घातीय गतिशील औसत (EMA) पर 0.7040 के पास स्थित है। लाइव आंकड़ों के मुताबिक 20-दिवसीय EMA 0.7048 और 50-दिवसीय EMA 0.7073 पर है। यह स्तर किसी भी सुधारात्मक उछाल को सीमित कर रहा है और यह वही रेखा है जिसे पार करने के बाद ही लिवालों का भरोसा लौट सकता है। इससे पहले, 0.7000 का मनोवैज्ञानिक स्तर भी एक कड़ा अवरोध बना हुआ है। पिवट स्तर 0.6945 पर स्थित है, जबकि R1 प्रतिरोध 0.6955 और R2 0.6970 पर दर्ज है।
नीचे की ओर, यदि जोड़ी 0.6900 के तात्कालिक समर्थन स्तर को बचाने में विफल रहती है, तो गिरावट का दायरा बढ़कर 0.6866 तक पहुंच सकता है। लाइव डेटा में 14-दिवसीय आरएसआई (RSI) 28 पर है, जो अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) क्षेत्र का संकेत देता है। स्टोकेस्टिक संकेतक पर फास्ट लाइन 15 और सिग्नल लाइन 14 पर चल रही है। औसत दिशात्मक सूचकांक (ADX) 37 पर है, जो एक मजबूत मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बॉलिंगर बैंड्स 0.6901 से 0.7265 के दायरे में हैं, जहां मध्य रेखा 0.7083 पर स्थित है। दैनिक अस्थिरता के लिए 14-दिवसीय एटीआर (ATR) 0.01 पर है, जो स्टॉप-लॉस निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण बफर प्रदान करता है।
कमोडिटी बाजार और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
कच्चे तेल के बाजार में भी मंदी का असर देखने को मिला। वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई और यह एशियाई कारोबार में 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद G7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति बनने के बाद कीमतों में यह नरमी आई है। जी7 देशों ने ऊर्जा निर्यात पर कोई प्रतिबंध न लगाने की प्रतिबद्धता भी जताई है। दूसरी ओर, सोने की कीमतें 4,150 डॉलर प्रति औंस के करीब सीमित दायरे में बनी हुई हैं, हालांकि डॉलर की मजबूती के कारण सोने का तकनीकी परिदृश्य भी अल्पकालिक कमजोरी का संकेत दे रहा है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की मौद्रिक नीति के मोर्चे पर, अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं काफी कमजोर पड़ गई हैं। फेड के दो मुख्य अधिदेश हैं: मुद्रास्फीति को 2% के लक्ष्य पर नियंत्रित रखकर मूल्य स्थिरता हासिल करना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। जब महंगाई बढ़ती है, तो फेड दरें बढ़ाता है जिससे डॉलर मजबूत होता है; लेकिन जब बेरोजगारी बढ़ती है या महंगाई घटती है, तो दरों में कटौती डॉलर पर दबाव बनाती है। असाधारण वित्तीय संकट के समय फेड क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) के तहत नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिए डॉलर छापकर बॉन्ड खरीदता है, जो 2008 के वित्तीय संकट में देखा गया था और जिससे डॉलर कमजोर होता है। इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में बॉन्ड खरीद रोक दी जाती है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है।
व्यापक बाजार दृष्टिकोण और आगे की दिशा
मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव अभी भी वैश्विक जोखिम धारणा पर हावी हैं। विदेशी मुद्रा कारोबारियों की नजर अब तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के आगामी नीतिगत संकेतों पर टिकी है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को 52-सप्ताह के दायरे 0.6422 से 0.7277 के बीच देखा जा रहा है। यदि 0.6905 के 20-दिवसीय समर्थन का उल्लंघन होता है, तो ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में नए सिरे से बिकवाली का दबाव गहरा सकता है, जिससे जोखिम वाली संपत्तियों पर असर जारी रहेगा।




















