वैश्विक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की बादशाहत एक बार फिर देखने को मिल रही है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उम्मीद से बेहतर मजबूती और लगातार बनी हुई महंगाई के कारण डॉलर ने इस साल का एक नया रिकॉर्ड स्तर हासिल कर लिया है। मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने की उम्मीदों को बल दिया है। इसके साथ ही, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हो रही बढ़ोतरी ने डॉलर से जुड़ी संपत्तियों के आकर्षण को और बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ग्रीनबैक को भारी समर्थन मिल रहा है।
डॉलर की मजबूत रफ्तार और आने वाले महत्वपूर्ण आंकड़े
कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में शानदार तेजी देखी गई और यह 0.70 प्रतिशत की दैनिक बढ़त के साथ 102.18 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सितंबर के महीने में डॉलर इंडेक्स में पहले ही 2.07 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की जा चुकी थी, और अब अक्टूबर की शुरुआत में भी यह अपनी रफ्तार बनाए रखने में कामयाब रहा है। इस समय वैश्विक मुद्रा बाजार के तमाम खिलाड़ी और ट्रेडर्स शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल (NFP) आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि रोजगार के ये आंकड़े उम्मीद से अधिक मजबूत आते हैं, तो डॉलर को और अधिक पंख मिल सकते हैं। इसके विपरीत, यदि आंकड़े कमजोर रहते हैं, तो ट्रेडर्स की तरफ से मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है, जिससे डॉलर की इस तेज दौड़ पर कुछ समय के लिए ब्रेक लग सकता है।
तकनीकी विश्लेषण: डबल बॉटम और ओवरबॉट की स्थिति
अगर चार्ट और तकनीकी दृष्टिकोण से देखें, तो अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का झुकाव स्पष्ट रूप से तेजी की तरफ बना हुआ है। सितंबर की शुरुआत में 98.50 के स्तर के पास एक मजबूत डबल बॉटम पैटर्न बनाने के बाद से डॉलर इंडेक्स ने लगातार रिकवरी दिखाई है। इस रिकवरी के दौरान इसने अपने प्रमुख दैनिक सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) को फिर से हासिल कर लिया है। वर्तमान में डॉलर इंडेक्स अपने 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय SMA से काफी ऊपर कारोबार कर रहा है, जो वर्तमान में 99.29 से 100.12 के दायरे में बने हुए हैं। इन महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज से ऊपर बने रहना डॉलर के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
बाजार के मोमेंटम संकेतक भी पूरी तरह से खरीदारों के पक्ष में नजर आ रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) इस समय 78 के स्तर के पास पहुंच गया है, जो स्पष्ट रूप से बाजार के ओवरबॉट होने का संकेत दे रहा है। इसके साथ ही, मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) भी सकारात्मक दायरे में बना हुआ है, जो ऊपर की ओर मजबूत मोमेंटम की पुष्टि करता है। वहीं, एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 35 के स्तर के करीब है, जो यह दर्शाता है कि मौजूदा तेजी का ट्रेंड काफी मजबूत है। हालांकि, RSI का 78 के पास होना यह भी चेतावनी देता है कि इस बड़ी रैली के बाद बाजार में थोड़ी थकान आ सकती है और आगे की बड़ी बढ़त से पहले कुछ समय के लिए कंसॉलिडेशन या गिरावट देखने को मिल सकती है।
ट्रेडर्स के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
आने वाले समय में डॉलर इंडेक्स के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। यदि डॉलर इंडेक्स 102.00 के स्तर से ऊपर मजबूती से टिका रहता है, तो इसका अगला तात्कालिक रेजिस्टेंस लक्ष्य 102.50 का होगा। इस स्तर को पार करने के बाद डॉलर के लिए 103.50 के क्षेत्र की ओर बढ़ने का रास्ता साफ हो जाएगा। दूसरी ओर, यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और इंडेक्स 102.00 के स्तर से नीचे फिसल जाता है, तो नीचे की तरफ पहला प्रमुख सपोर्ट 101.50 पर मिलेगा। यदि बाजार में बड़ी गिरावट आती है और यह सपोर्ट भी टूट जाता है, तो डॉलर इंडेक्स दोबारा 100.50 के स्तर तक नीचे आ सकता है।
अमेरिकी डॉलर का वैश्विक इतिहास और प्रभुत्व
अमेरिकी डॉलर (USD) संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है, लेकिन इसके साथ ही यह दुनिया के कई अन्य देशों में भी वहां की स्थानीय करेंसी के समानांतर मुख्य मुद्रा के रूप में चलन में है। वैश्विक स्तर पर यह सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के कुल विदेशी मुद्रा कारोबार में अकेले अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक है, जो रोजाना औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेनदेन के बराबर है। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा के रूप में अपनी जगह बनाई थी। लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर को सोने (गोल्ड) का समर्थन प्राप्त था, लेकिन 1971 में हुए ब्रेटन वुड्स समझौते के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड को समाप्त कर दिया गया और डॉलर पूरी तरह से फिएट करेंसी में तब्दील हो गया।
फेडरल रिजर्व की नीतियां और ब्याज दरों का खेल
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के पास मुख्य रूप से दो बड़ी जिम्मेदारियां हैं: पहली, देश में कीमतों को स्थिर रखना यानी महंगाई को नियंत्रित करना और दूसरी, रोजगार के अवसरों को बढ़ाना। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का सबसे मुख्य हथियार ब्याज दरें हैं। जब अमेरिका में महंगाई दर फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो केंद्रीय बैंक बाजार को ठंडा करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी डॉलर के मूल्य को मजबूत बनाती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या देश में बेरोजगारी दर बढ़ने लगती है, तो फेडरल रिजर्व अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर के मूल्य में कमजोरी आती है।
असाधारण या संकट की स्थितियों में फेडरल रिजर्व अधिक डॉलर छापने और क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) जैसी नीतियां अपनाने का फैसला भी कर सकता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग का सहारा तब लिया जाता है जब वित्तीय प्रणाली पूरी तरह से ठप हो जाती है और बैंक एक-दूसरे को कर्ज देने से कतराने लगते हैं। यह केंद्रीय बैंक का अंतिम हथियार होता है, जिसका उपयोग केवल ब्याज दरों को शून्य के करीब लाने के बाद भी सुधार न होने पर किया जाता है। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय फेडरल रिजर्व ने इसी नीति का इस्तेमाल किया था। इसके तहत केंद्रीय बैंक नए डॉलर प्रिंट करता है और वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदता है। हालांकि, क्वांटिटेटिव ईजिंग की इस प्रक्रिया से बाजार में डॉलर की तरलता बहुत बढ़ जाती है, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की प्रक्रिया में फेडरल रिजर्व बॉन्ड की खरीद बंद कर देता है और अपने पोर्टफोलियो को सिकोड़ता है, जो आमतौर पर डॉलर को मजबूत बनाने का काम करता है।
अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़े और डॉलर का असर
डॉलर की इस चौतरफा मजबूती का असर अन्य वैश्विक मुद्राओं पर भी साफ देखा जा सकता है। जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) एशियाई कारोबारी सत्र में 158.00 के स्तर से ऊपर अपने साप्ताहिक उच्च स्तर के पास बना हुआ है। हालांकि अमेरिका में हाल ही में आए पीसीई (PCE) महंगाई के आंकड़े थोड़े नरम रहे हैं, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनाए रखा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को बढ़ाया है। जापानी केंद्रीय बैंक (BoJ) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों और जापानी सरकार द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के दावों के बावजूद डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.6900 के स्तर के मध्य में अपने दो महीने के निचले स्तर के पास कंसॉलिडेट हो रहा है। अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का ट्रेड सरप्लस भारी गिरावट के साथ केवल 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया है, जिसने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बनाए रखा है।
कमोडिटी और क्रिप्टोकरेंसी बाजारों की हलचल
विदेशी मुद्रा बाजार के साथ-साथ कमोडिटी बाजार में भी डॉलर की मजबूती का सीधा असर दिख रहा है। सोने की कीमतें लगातार बिना किसी स्पष्ट दिशा के हिचकोले खा रही हैं और प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बनी हुई हैं। एक तरफ जहां डॉलर की मजबूती सोने की कीमतों पर दबाव बना रही है, वहीं दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष इसे सुरक्षित निवेश के तौर पर सहारा दे रहा है। इसी खींचतान की वजह से सोने की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार की बात करें तो वहां भी दबाव साफ महसूस किया जा रहा है। बिटकॉइन (BTC) इस समय 82,500 डॉलर के सपोर्ट और 85,000 डॉलर के रेजिस्टेंस स्तर के बीच सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इसी तरह इथेरियम (ETH) भी दबाव में है और 2,700 डॉलर के स्तर से नीचे बना हुआ है, जबकि इसे 2,600 डॉलर के स्तर पर तात्कालिक सपोर्ट मिल रहा है। वहीं, रिपल (XRP) भी अपने महत्वपूर्ण 1.50 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल चुका है। फेडरल रिजर्व को लेकर बाजार की उम्मीदें बहुत तेजी से बदल रही हैं। केवल एक सप्ताह पहले तक निवेशक अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की पूरी उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन उम्मीद से नरम आए महंगाई के आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के सतर्क बयानों के बाद अब ब्याज दरों पर विराम लगने की संभावना सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है।

















