वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की हलचल काफी हद तक सीमित दायरे में सिमटती नजर आ रही है, विशेषकर स्विस फ्रैंक के मुकाबले जहां विनिमय दर एक कड़े तकनीकी दायरे में बंधी हुई है। हालांकि व्यापक वित्तीय परिवेश में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के निकट बनी हुई है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं निवेशकों के मिजाज को सतर्क रखे हुए हैं। इस पृष्ठभूमि में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की घटती संभावनाओं के बावजूद डॉलर अपनी समग्र मजबूती बनाए रखने में सफल रहा है, जिसका सीधा असर जापानी येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने जैसी परिसंपत्तियों पर पड़ रहा है।
स्विस फ्रैंक के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का तकनीकी दायरा
अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक (USD/CHF) मुद्रा जोड़े में 24 घंटे के दृष्टिकोण पर गौर करें तो उतार-चढ़ाव काफी सीमित रहा है। पहले डॉलर के 0.8245 तक फिसलने का अनुमान लगाया गया था, परंतु वास्तविकता में यह 0.8275 से 0.8323 के दायरे में ही कारोबार करता रहा। मौजूदा मूल्य व्यवहार स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि यह मुद्रा जोड़ी एक सीमित दायरे (रेंज-ट्रेडिंग) के दौर से गुजर रही है। दैनिक सत्र के दौरान इस जोड़ी के 0.8290 से 0.8335 के बीच गतिशील रहने का आकलन है।
मध्यम अवधि यानी एक से तीन सप्ताह के परिदृश्य पर नजर डालें तो पिछले शुक्रवार (02 अक्टूबर) को जब हाजिर भाव 0.8310 पर था, डॉलर को लेकर दृष्टिकोण सकारात्मक से बदलकर तटस्थ कर दिया गया था। उस समय यह रेखांकित किया गया था कि डॉलर संभवतः 0.8245 और 0.8365 के बीच एक रेंज-ट्रेडिंग चरण में प्रवेश कर चुका है। इसके बाद डॉलर गिरकर 0.8245 के निचले स्तर तक आया और कुछ समय के लिए 0.8245 से नीचे फिसलकर 0.8225 का निचला स्तर भी छुआ, किंतु यह गिरावट अत्यंत क्षणिक थी। मंदी की रफ्तार में कोई वृद्धि नहीं देखी गई है, जिसके चलते डॉलर के फिलहाल 0.8245 और 0.8365 के दायरे में ही बने रहने की संभावना बरकरार है।
बॉन्ड यील्ड और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मंगलवार को AUD/USD जोड़ी में नरमी दर्ज की गई, जिससे पिछले सप्ताह दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिवसीय सुधार प्रक्रिया थम गई। फिक्स्ड इनकम बाजार में लगातार जारी बिकवाली ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा है। यह उच्च प्रतिफल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराती अनिश्चितता दोनों मिलकर अमेरिकी डॉलर के रुझान को मजबूत बनाए रख रहे हैं। हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड द्वारा अक्टूबर में नीतिगत दरें बढ़ाने की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं, फिर भी डॉलर दबाव में नहीं आया है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक (RBA) द्वारा चालू महीने में एक और ब्याज दर वृद्धि की संभावनाएं ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए एक सहारा साबित हो सकती हैं।
जापानी येन 158.00 के पार और हस्तक्षेप का साया
यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में मंगलवार को USD/JPY की दर एक बार फिर 158.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर निकल गई। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों और संभावित सरकारी मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद जापानी येन को कोई खास गति या प्रेरणा नहीं मिल पा रही है। वहीं दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई मजबूती अमेरिकी डॉलर को उसके इस साल के उच्चतम स्तर के पास टिकाए हुए है। अक्टूबर में फेड द्वारा दर वृद्धि की संभावना कम होने के बावजूद डॉलर को मिला यह सहारा येन के मुकाबले डॉलर की बढ़त को कायम रखे हुए है।
सोने के भाव में नरमी और $4,100 का स्तर
यूरोपीय सत्र की ओर बढ़ते हुए बहुमूल्य धातु सोने के हाजिर भाव में मामूली दैनिक गिरावट देखी गई, हालांकि यह $4,100 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। गौरतलब है कि मंगलवार को ही सोने ने दो महीने का निचला स्तर छुआ था। डॉलर की लगातार बनी हुई मजबूती बिना ब्याज देने वाली इस सुरक्षित धातु की मांग को दबा रही है। इसके विपरीत, फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि न करने की बढ़ती उम्मीदें सोने के लिए एक सुरक्षा कवच का काम कर रही हैं, जिससे इसकी गिरावट को सीमित रखने में मदद मिल रही है।
यूरोपीय अनिश्चितता और ईसीबी के सामने नीतिगत उलझन
आर्थिक आंकड़ों के लिहाज से आज किसी प्रमुख टीयर-1 आर्थिक रिपोर्ट के जारी होने का कार्यक्रम नहीं है। निवेशकों का पूरा ध्यान मुख्य रूप से यूरोपीय बाजारों के घटनाक्रमों और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा। विशेष रूप से फ्रांस में आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि सोशलिस्ट्स और मरीन ले पेन की नेशनल रैली पार्टी बजट प्रस्ताव को लेकर सरकार गिराने के लिए तैयार होने का संकेत देती हैं या नहीं।
इधर यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष एक अनूठी दुविधा खड़ी हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो उसका सीधा और स्वाभाविक जवाब नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन वर्तमान आर्थिक हालात सामान्य नहीं हैं। इस समय बॉन्ड बाजार पहले ही यील्ड बढ़ाकर वित्तीय सख्ती का एक हिस्सा खुद ही अंजाम दे रहा है, जिससे ईसीबी के लिए मौद्रिक नीति के मोर्चे पर निर्णय लेना बेहद पेचीदा और चुनौतीपूर्ण हो गया है।















