वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास संघर्ष करती दिखी। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में सात हफ्तों से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंची मजबूती और ऑस्ट्रेलिया के विनिर्माण क्षेत्र में आई मंदी ने इस मुद्रा जोड़ी पर दोहरा दबाव बना दिया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशक वाशिंगटन में प्रस्तावित उच्चस्तरीय शिखर वार्ता को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे जोखिम भरी संपत्तियों में लिवाली सुस्त पड़ गई है।
ऑस्ट्रेलियाई पीएमआई आंकड़ों में गिरावट और घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति
सितंबर महीने के लिए जारी किए गए एसएंडपी ग्लोबल के प्रारंभिक कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के आंकड़ों ने आर्थिक सुस्ती के स्पष्ट संकेत दिए हैं। इस अवधि में कंपोजिट पीएमआई घटकर 50.8 पर आ गया, जो कि अगस्त महीने में 52.7 के स्तर पर दर्ज किया गया था। आंकड़ों में यह कमजोरी मुख्य रूप से विनिर्माण उत्पादन में गिरावट और सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी पड़ने के कारण देखी गई। विनिर्माण क्षेत्र का संकुचन की श्रेणी में प्रवेश करना यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला और मांग से जुड़ी चुनौतियां घरेलू उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं, जिसने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया है।
हालांकि उत्तरी अमेरिकी मुद्राओं को छोड़कर अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का रुख मिलाजुला बना रहा, लेकिन अमेरिकी मुद्रा के सामने इसकी कमजोरी साफ नजर आई। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 44.5 के स्तर पर दर्ज किया गया, जो कि इसके मध्य स्तर 50 से नीचे बना हुआ है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाजार में बुलिश रुझान काफी कमजोर है और जोड़ी किसी स्पष्ट दिशात्मक रुझान के बजाय एक सीमित दायरे में फंसी रह सकती है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा स्तर 0.7105 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 0.7119 से 0.20 प्रतिशत की दैनिक गिरावट दर्शाता है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में छह प्रमुख मुद्राओं की बास्केट के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का रुख बेहद आक्रामक रहा। डॉलर इंडेक्स 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 100.73 के स्तर के करीब पहुंच गया, जो कि पिछले सात हफ्तों का सबसे मजबूत स्तर है। करेंसी हीटमैप के रुझान दर्शाते हैं कि अमेरिकी मुद्रा ने न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले सर्वाधिक बढ़त हासिल की। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं द्वारा ऊर्जा झटकों और मजबूत मांग के चलते लगातार बनी रहने वाली महंगाई को लेकर चेतावनी दी गई है, जिससे यह धारणा मजबूत हुई है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।
फेडरल रिजर्व का प्राथमिक अधिदेश कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना है। जब अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो उधार लागत बढ़ाने के लिए नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की जाती है। यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को अमेरिका में पूंजी निवेश करने के लिए आकर्षित करती है, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग और कीमत में स्वाभाविक वृद्धि होती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दो प्रतिशत से नीचे चली जाती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो दरों में कटौती की जाती है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के 12 अधिकारी साल में आठ बार बैठक करके इन आर्थिक स्थितियों की समीक्षा करते हैं।
क्वांटिटेटिव ईजिंग और टाइटनिंग का मुद्रा पर असर
असामान्य आर्थिक संकटों अथवा मंदी के समय फेडरल रिजर्व गैर-पारंपरिक नीतिगत हथियारों का उपयोग करता है। संकट की स्थिति में केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा लेता है, जैसा कि वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान किया गया था। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक अतिरिक्त नकदी सृजित करके वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले बांड खरीदता है, जिससे क्रेडिट प्रवाह सुधरता है लेकिन अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आती है। इसके उलट प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) कहा जाता है, जिसमें केंद्रीय बैंक बांड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बांडों की मूल राशि का पुनर्निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया बाजार से डॉलर की तरलता को घटाती है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है।
तकनीकी चार्ट पर 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 0.7136 पर स्थित है, जो इस मुद्रा जोड़ी के लिए एक कड़ा प्रतिरोध बना हुआ है। इसके अलावा 50-दिवसीय ईएमए 0.7107 और 200-दिवसीय ईएमए 0.6960 पर देखा गया है। लंबी अवधि के आधार पर 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस स्थिति को बनाए रखता है, लेकिन अल्पकालिक गति मंद बनी हुई है। बोलिंजर बैंड्स का दायरा 0.7081 से 0.7241 के बीच है और इसका मध्य स्तर 0.7161 है। औसत दिशात्मक सूचकांक (ADX) 21 पर है, जो प्रवृत्ति की कमजोरी को दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक संकेतक पर फास्ट लाइन 12 और सिग्नल लाइन 19 पर दर्ज की गई है। 20-दिवसीय समर्थन स्तर 0.7087 और प्रतिरोध स्तर 0.7239 पर आंका गया है।
ट्रम्प-शी शिखर वार्ता और अन्य वैश्विक बाजारों की हलचल
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों के प्रतिभागी गुरुवार को वाशिंगटन में होने वाली एक अहम कूटनीतिक बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली यह बैठक वैश्विक व्यापार की भावी दिशा तय कर सकती है। महीनों से जारी व्यापारिक तनाव में ढील के बाद यह चर्चा तय करेगी कि दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस शांति को आगे बढ़ाएंगी या नए अनिश्चित दौर में प्रवेश करेंगी। इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के कारण निवेशकों ने अमेरिका और ईरान के बीच संपन्न हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं को नजरअंदाज कर दिया है।
सर्राफा बाजार में अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतों पर भी बिकवाली का दबाव देखा गया और बुधवार को एशियाई कारोबार में यह 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास संघर्ष करता नजर आया। इससे पहले सोना 4,300 डॉलर से नीचे के स्तर से उछला था, लेकिन ट्रम्प-शी बैठक के मद्देनजर ट्रेडर्स किसी बड़े दिशात्मक दांव से बच रहे हैं। दूसरी ओर, डॉलर-येन (USD/JPY) जोड़ी 157.00 के मध्य स्तर के करीब रही, जो शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य करने के क्रम में 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जिससे जापानी मुद्रा में नरमी बनी हुई है, हालांकि संभावित मुद्रा हस्तक्षेप की आशंकाओं ने डॉलर की बढ़त को सीमित किया है। वहीं डिजिटल परिसंपत्तियों में कार्डानो (ADA) 0.262 डॉलर से ऊपर कारोबार करता दिखा, जिसमें ओपन इंटरेस्ट और व्हेल संचय के दम पर इस सप्ताह 14 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है।


















