अंतरराष्ट्रीय वित्तीय हलकों में मची उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर बाजार ने अपनी मजबूती का परिचय दिया है। सामान्य तौर पर जब भी पश्चिमी देशों में कोई राजनीतिक फेरबदल होता था या पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता था, घरेलू सूचकांक दबाव में आ जाते थे और निवेशकों की भारी पूंजी डूब जाती थी। इस बार हालात बिल्कुल जुदा नजर आए। जिस समय दक्षिण कोरिया और जापान के प्रमुख सूचकांकों में 4 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की जा रही थी, ठीक उसी समय मुंबई के शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटता दिखा और दोनों मुख्य बेंचमार्क सूचकांक मजबूती के साथ बंद हुए।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के रुझानों और परिणामों के बीच घरेलू इक्विटी बाजार में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त का सिलसिला जारी रहा। सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर को छोड़ दें तो लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स में खरीदारी हावी रही। बाजार के जानकारों का कहना है कि जो विदेशी संस्थागत निवेशक कुछ समय पहले तक भारतीय शेयर बाजार से बिकवाली कर पूंजी निकाल रहे थे, वे अब नए सिरे से पैसा लगाते दिख रहे हैं। इससे घरेलू बाजार का समग्र रुख काफी सकारात्मक हो गया है।
शुरुआती मुनाफावसूली के बाद शानदार रिकवरी
बुधवार के कारोबारी दिन की शुरुआत हल्की बिकवाली और मुनाफावसूली के साथ हुई थी, जिससे एक समय ऐसा लगा कि सूचकांक नीचे फिसल सकते हैं। हालांकि, निचले स्तरों पर निवेशकों की भारी लिवाली ने बाजार को मजबूती दी और दोनों सूचकांकों ने जोरदार वापसी की। दिन के कारोबार में निफ्टी 23900 के अहम आंकड़े को पार कर गया, जबकि बैंक निफ्टी ने भी कई दिनों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 384 अंक चढ़कर 77,301 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 150 अंकों की छलांग लगाकर 23,961 के स्तर पर पहुंच गया। इस ताजा बढ़त के दम पर भारतीय शेयर बाजार करीब दो महीने पुराने स्तरों को दोबारा हासिल करने में कामयाब रहा है। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयरों में भी चौतरफा तेजी देखी गई।
कच्चे तेल में नरमी और डॉलर इंडेक्स की कमजोरी
बाजार में आई इस ताजा तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण आर्थिक और वैश्विक कारक काम कर रहे हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप के कमजोर प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नरमी देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड और कच्चे तेल के भाव फिसलकर 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं, जो कुछ ही समय पहले 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक दबाव के चलते ट्रंप के रुख में नरमी आ सकती है और ईरान के साथ कूटनीतिक समझौतों पर बात आगे बढ़ सकती है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी ने बहुमूल्य धातुओं को पंख लगा दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए बदलावों के कारण सोने और चांदी में जोरदार खरीदारी दर्ज की गई। चांदी की कीमतों में 3 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि सोना 2 प्रतिशत चढ़ गया। कीमती धातुओं में आई तेजी का सीधा फायदा स्वर्ण ऋण देने वाली वित्तीय कंपनियों को मिला, जिसके चलते मुथूट फाइनेंस के शेयरों में 7 प्रतिशत तक की जोरदार बढ़त दर्ज की गई।
दिग्गज शेयरों में लिवाली और कैबिनेट के अहम फैसले
सेक्टर के लिहाज से रियल्टी और रक्षा से जुड़े शेयरों में जबरदस्त मांग देखने को मिली। दिग्गज कंपनियों में रिलायंस और एचडीएफसी बैंक के साथ-साथ एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियों ने निफ्टी को ऊपर खींचने में मुख्य भूमिका निभाई। बेहतर तिमाही और वित्तीय आंकड़ों के दम पर फ्रैक्टल एनालिटिक्स के शेयरों में निवेशकों की भारी रुचि दिखी, जिससे यह शेयर लगभग 13 प्रतिशत की छलांग लगाने में सफल रहा।
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए नीतिगत फैसलों ने भी ऊर्जा और खनन क्षेत्र के शेयरों को गति दी। सरकार ने ग्रिड स्केल एनर्जी स्टोरेज के विकास के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी है, जबकि क्रिटिकल मिनरल कैपेक्स को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ी राशि की नई योजना शुरू की गई है। इस सरकारी घोषणा के बाद जीएमडीसी के शेयरों में 10 प्रतिशत की जोरदार उछाल देखने को मिली।
बाजार की तकनीकी स्थिति और आगामी स्तर
बाजार की चाल और रणनीतिक दिशा पर राय रखते हुए अनुज सिंघल ने बताया कि निचले स्तरों से वैश्विक बाजारों में भी सुधार के संकेत मिले हैं। राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल के सस्ता होने से बाजार को अतिरिक्त ऊर्जा मिली है। उन्होंने रेखांकित किया कि एचडीएफसी बैंक जैसे प्रमुख संस्थान अब बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो पूरे वित्तीय क्षेत्र को नई ताकत दे रहा है। मिडकैप और स्मॉलकैप में शेयरों के चढ़ने और गिरने का अनुपात यानी एडवांस डिक्लाइन रेशियो भी काफी मजबूत बना हुआ है।
तकनीकी स्तरों के विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 23750 से 23800 का दायरा एक मजबूत सपोर्ट जोन का काम कर रहा है, जबकि ऊपरी स्तरों पर 23950 से 24050 पर कड़ा प्रतिरोध देखा जा रहा है। यदि निफ्टी इस बाधा को पार करता है तो इसमें 24050 की ओर नई चाल देखने को मिल सकती है। बैंक निफ्टी के लिए 55300 से 55500 के बीच सपोर्ट मौजूद है, जबकि 56000 से 56200 का स्तर प्रतिरोध बना हुआ है। एक्सपायरी के चलते बाजार में आगे और भी रिकवरी आने की संभावना जताई गई है।


















