सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी विप्रो ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। अजीम प्रेमजी समर्थित इस दिग्गज तकनीकी कंपनी के आंकड़े बाजार अनुमानों के मुकाबले लाभ, गाइडेंस और राजस्व के मोर्चे पर कमजोर साबित हुए हैं। सितंबर में समाप्त हुई इस तिमाही के दौरान कंपनी के समेकित शुद्ध लाभ में तिमाही आधार पर 4.5 प्रतिशत और सालाना आधार पर 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद शुद्ध लाभ घटकर 3,200.6 करोड़ रुपये पर आ गया। नतीजों और आगामी तिमाही के निराशाजनक परिदृश्य के सामने आते ही अमेरिकी बाजार में कंपनी के डिपॉजिटरी रसीदों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
राजस्व में सालाना स्तर पर बढ़त, लेकिन मुनाफे पर दबाव
मुनाफे में गिरावट के उलट, विप्रो के कुल राजस्व में सालाना आधार पर संतोषजनक सुधार दर्ज हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व सालाना आधार पर 9 प्रतिशत से अधिक और तिमाही आधार पर 1.1 प्रतिशत बढ़कर 24,752.7 करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा 24,478.6 करोड़ रुपये था, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही यानी वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के दौरान कुल राजस्व 22,697.3 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
मुनाफे के पिछले आंकड़ों पर गौर करें तो विप्रो ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 3,352 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ अर्जित किया था। वहीं एक साल पहले वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 3,246.2 करोड़ रुपये रहा था। इन तुलनात्मक आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कंपनी अपने परिचालन राजस्व को बढ़ाने में तो सफल रही है, लेकिन मार्जिन और लाभप्रदता के स्तर पर क्रमिक दबाव बना हुआ है।
डॉलर आय और आईटी सेवा कारोबार की स्थिति
डॉलर के संदर्भ में आईटी सेवा खंड के प्रदर्शन का विश्लेषण करें तो दूसरी तिमाही में विप्रो की आईटी सेवा सेगमेंट आय 2,611.5 मिलियन डॉलर रही। यह आंकड़ा पिछली तिमाही की तुलना में 0.1 प्रतिशत कम है, हालांकि सालाना आधार पर इसमें 0.3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज हुई है। गैर-जीएएपी स्थिर मुद्रा के आधार पर आईटी सेवा सेगमेंट का राजस्व क्रमिक रूप से सपाट रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
ऑर्डर बुक के मोर्चे पर कंपनी के लिए यह तिमाही सुस्त साबित हुई। विप्रो ने इस दौरान कुल 2,595 मिलियन डॉलर की बुकिंग हासिल की, जो स्थिर मुद्रा के आधार पर पिछली तिमाही के मुकाबले 22.9 प्रतिशत कम है। सबसे अधिक चिंताजनक गिरावट बड़े सौदों में आई, जहां कुल बड़े सौदे घटकर 674 मिलियन डॉलर रह गए। इसमें स्थिर मुद्रा के संदर्भ में तिमाही आधार पर 58.6 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो नए कारोबारी अनुबंधों की रफ्तार धीमी पड़ने का संकेत देती है।
नेतृत्व का भरोसा: एआई और परामर्श रणनीति से भविष्य की उम्मीद
कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति पर बोलते हुए विप्रो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक श्रीनि पल्लिया ने कहा, "हम जो रणनीतिक निवेश कर रहे हैं, उनके नतीजे दिखने लगे हैं। वे नए बाजारों में जीतने, नए ग्राहकों को जोड़ने और मौजूदा संबंधों को आगे बढ़ाने की हमारी क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। इसके साथ ही, हमारी कंसल्टिंग-आधारित और एआई-संचालित रणनीति हमें बड़े बदलाव के अवसर बनाने में मदद कर रही है।"
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी और व्यापार परिवर्तन के लिए बाजार के दायरे को बढ़ाएगी। श्रीनि पल्लिया के अनुसार कंपनी की एआई-नेटिव यूनिट और एआई समाधान पोर्टफोलियो में पहले से ही अच्छी गति दिख रही है, जो भविष्य के विकास का एक प्रमुख माध्यम साबित होगी।
ऑपरेटिंग मार्जिन, कैश फ्लो और प्रति शेयर आय
परिचालन दक्षता के स्तर पर विप्रो के आईटी सेवा सेगमेंट का ऑपरेटिंग मार्जिन दूसरी तिमाही में 16.5 प्रतिशत रहा। इसमें तिमाही आधार पर 0.5 प्रतिशत का सुधार हुआ, हालांकि सालाना आधार पर 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। तिमाही के दौरान प्रति शेयर आय 3.23 रुपये (0.03 डॉलर) रही, जो तिमाही आधार पर 0.9 प्रतिशत और सालाना आधार पर 4.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
कंपनी के लिए सबसे मजबूत पक्ष उसका नकदी प्रवाह रहा। तिमाही के दौरान परिचालन नकदी प्रवाह 53.0 बिलियन रुपये (553.6 मिलियन डॉलर) दर्ज किया गया, जिसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 61.3 प्रतिशत की जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज हुई। यह राशि तिमाही के शुद्ध लाभ का 165.8 प्रतिशत रही।
वित्तीय आंकड़ों पर मुख्य वित्तीय अधिकारी अपर्णा अय्यर ने कहा, "तिमाही के लिए हमारा ऑपरेटिंग मार्जिन 16.5 प्रतिशत रहा, जो क्रमिक रूप से 0.5 प्रतिशत का विस्तार है। हमने अपने व्यवसाय और कर्मचारियों में निवेश जारी रखते हुए भी यह सुधार हासिल किया है। हम नकदी प्रवाह रूपांतरण को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। दूसरी तिमाही एक और ऐसी तिमाही रही जहां हमारा परिचालन नकदी प्रवाह मजबूत रहा और यह शुद्ध लाभ का 166 प्रतिशत रहा।"
तीसरी तिमाही का मार्गदर्शन और शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
बाजार के निराश होने का सबसे बड़ा कारण कंपनी द्वारा दिसंबर 2026 तिमाही के लिए दिया गया आईटी सेवा सेगमेंट का राजस्व मार्गदर्शन रहा। विप्रो ने तीसरी तिमाही में आईटी सेवा राजस्व वृद्धि -1.5 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान लगाया है। डॉलर के संदर्भ में यह मार्गदर्शन 2,571 मिलियन डॉलर से 2,625 मिलियन डॉलर के राजस्व के बराबर बैठता है। नकारात्मक दायरे वाला यह अनुमान दर्शाता है कि आईटी उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
इस सुस्त परिदृश्य का असर विदेशी बाजारों में तुरंत दिखा। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर प्री-मार्केट सत्र में विप्रो का अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट (एडीआर) लगभग 3 प्रतिशत तक गिर गया। नियमित बाजार खुलने पर इसमें मामूली सुधार हुआ लेकिन यह लाल निशान में बना रहा और 1.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.7795 डॉलर पर कारोबार करता नजर आया।
घरेलू बाजार में नतीजे आने से पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर विप्रो का शेयर 1.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 173.70 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ था, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1,72,055.81 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। अब घरेलू निवेशक शुक्रवार के कारोबारी सत्र में इन वित्तीय परिणामों और कमजोर तीसरी तिमाही के मार्गदर्शन पर अपनी सीधी प्रतिक्रिया देंगे।



















