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मेघालय के स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की शुरुआत, MPOWER के तहत 31 संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्चमेघालय
26 सित॰ 2026, 2:52 pm (1 घंटे पहले)· 0

मेघालय के स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की शुरुआत, MPOWER के तहत 31 संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च

मेघालय सरकार ने पूर्वी खासी हिल्स जिले के 31 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में गणित और विज्ञान की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए एक नया डिजिटल लर्निंग पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस पहल के तहत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और छात्रों को एआई-संचालित शिक्षण उपकरणों का लाभ मिलेगा।

मेघालय सरकार ने शिक्षा के स्तर को सुधारने और छात्रों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक अभिनव कदम उठाया है। पूर्वी खासी हिल्स जिले के कुल 31 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षण की शुरुआत की जा रही है। इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से गणित और विज्ञान जैसे विषयों में विद्यार्थियों के प्रदर्शन और समझ को बेहतर बनाना है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के स्कूलों को इस प्रयोग के लिए चुना गया है ताकि यह परखा जा सके कि पारंपरिक कक्षाओं में डिजिटल संसाधनों को किस प्रकार प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सकता है।

MPOWER के तहत हो रहा है संचालन

यह पूरा कार्यक्रम मेघालय प्रोग्राम फॉर एडोलसेंट वेलबीइंग, एम्पावरमेंट एंड रेजिलिएंस यानी MPOWER के अंतर्गत कार्यान्वित किया जा रहा है। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए राज्य के शिक्षा विभाग ने CK-12 लर्निंग प्लेटफॉर्म के साथ एक साझेदारी की है। इस तैयारी के हिस्से के रूप में कुल 47 शिक्षकों और चार स्कूल प्रधानाचार्य को डिजिटल शिक्षण विधियों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान शिक्षकों को इंटरएक्टिव लर्निंग सामग्री, आधुनिक डिजिटल शिक्षण उपकरणों और कक्षा के भीतर उनके व्यावहारिक उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया गया ताकि वे बच्चों को आसानी से पढ़ा सकें।

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एआई टूल और डिजिटल संसाधनों से लैस पढ़ाई

इस नई पहल के माध्यम से छठी कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को विज्ञान और गणित के क्षेत्र में उन्नत डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इन संसाधनों में इंटरएक्टिव और एडेप्टिव लर्निंग सामग्री शामिल है, जिससे छात्रों को अपनी गति के अनुसार अध्ययन करने और अभ्यास करने की पूरी स्वतंत्रता मिलती है। इसके अलावा, इस प्लेटफॉर्म में फ्लेक्सी नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्यूटर भी शामिल किया गया है, जो विद्यार्थियों को हर चरण पर स्पष्टीकरण और व्यक्तिगत शिक्षण सहायता प्रदान करता है।

शिक्षकों के लिए भी मददगार साबित होगी तकनीक

केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के लिए भी यह तकनीक बेहद फायदेमंद साबित होने वाली है। शिक्षक एआई-आधारित टूल्स और लर्निंग डेटा का उपयोग करके कक्षा की गतिविधियों को अधिक रोचक बना सकेंगे। इसकी मदद से वे विद्यार्थियों की कमजोरियों और सीखने के अंतराल की पहचान कर सकेंगे, जिससे समय रहते उन बच्चों को अतिरिक्त सहायता प्रदान की जा सकेगी। MPOWER के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संपत कुमार ने इस बारे में विस्तार से बात करते हुए कहा कि तकनीक के प्रयोग से शिक्षा अधिक सुलभ और आकर्षक बनेगी, साथ ही विद्यार्थी पूरी प्रक्रिया के केंद्र में रहेंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस साझेदारी से पारंपरिक कक्षा के अनुभव को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बुनियादी ढांचा और निगरानी की व्यवस्था

राज्य का शिक्षा विभाग इन सभी 31 स्कूलों की भागीदारी का समन्वय करेगा, जबकि MPOWER की तरफ से आवश्यक सूचना और संचार प्रौद्योगिकी यानी आईसीटी बुनियादी ढांचे की व्यवस्था की जाएगी। इसमें डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा MPOWER इस पायलट प्रोजेक्ट की कड़ी निगरानी करेगा, इसके क्रियान्वयन का आकलन करेगा और समय-समय पर परिणामों की समीक्षा करेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से गणित और विज्ञान की अवधारणाओं को समझने में छात्रों को बड़ी मदद मिलेगी और शिक्षक भी डिजिटल डेटा का बेहतर उपयोग कर पाएंगे।

सवाल-जवाब

मेघालय में डिजिटल लर्निंग पायलट प्रोजेक्ट कितने स्कूलों में शुरू किया गया है?
यह पायलट प्रोजेक्ट पूर्वी खासी हिल्स जिले के 31 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में शुरू किया गया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य गणित और विज्ञान विषयों में छात्रों के सीखने के परिणामों और समझ को बेहतर बनाना है।
इस कार्यक्रम के तहत कितने शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है?
इस कार्यक्रम के तहत 47 शिक्षकों और चार स्कूल प्रधानाचार्यों को डिजिटल शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया गया है।
इस प्रोजेक्ट में किस लर्निंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है?
इस प्रोजेक्ट के लिए CK-12 लर्निंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।
इस पहल से किन कक्षाओं के छात्रों को लाभ मिलेगा?
छठी कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को इस डिजिटल पहल से लाभ मिलेगा।
प्रोजेक्ट में एआई ट्यूटर का क्या नाम है?
इस प्लेटफॉर्म में फ्लेक्सी नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्यूटर शामिल है।
MPOWER के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कौन हैं?
संपत कुमार MPOWER के प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं।
स्कूलों में तकनीकी बुनियादी ढांचा कौन प्रदान कर रहा है?
MPOWER स्कूलों को डिवाइस और इंटरनेट कनेक्टिविटी सहित आईसीटी बुनियादी ढांचा प्रदान कर रहा है।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 मिनट पहले

मेघालय में गणित और विज्ञान के लिए एआई टूल और डिजिटल लर्निंग की यह पहल बहुत दिलचस्प है, खासकर तब जब इसे ग्रामीण स्कूलों में भी आजमाया जा रहा है। पर क्या इन पहाड़ी इलाकों के स्कूलों में बिना किसी रुकावट के बिजली और इंटरनेट मिलने की कोई पक्की व्यवस्था हो पाई है?

Michael Anderson@michael-anderson·14 मिनट पहले

अर्जुन, बिजली और इंटरनेट की बात सही है, पर मुझे शक है कि सिर्फ ट्रेनिंग से टीचर इतने भारी एआई टूल को ठीक से संभाल पाएंगे या नहीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 मिनट पहले

मेघालय में बच्चों के लिए डिजिटल पढ़ाई की शुरुआत बढ़िया है, पर स्कूलों में इंटरनेट और टैबलेट की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा ताकि कोई गड़बड़ी न हो सके।

Ravikash Gupta@ravikash·38 मिनट पहले

करण, बात बिल्कुल सही है! आज के समय में स्कूलों में एआई और डिजिटल टूल्स लाना बढ़िया है, पर बिना मजबूत साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी के यह सब संभालना मुश्किल होगा।

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