मेघालय क्रिकेट में चल रहा प्रशासनिक घमासान अब सीधे तौर पर मैदान पर पहुंच गया है, जहां नगालैंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप मुकाबले के शुरू होने से ठीक पहले घोषित खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। मैच के दिन एक नई टीम को मैदान में उतार दिया गया, जिसके बाद बाहर किए गए खिलाड़ी अपनी मैच किट पहनकर मैदान के बाहर ही खड़े नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य के खेल जगत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, क्योंकि जो टीम बाहर बैठी थी, वह इस सत्र में अब तक शानदार प्रदर्शन कर रही थी।
मैदान के बाहर किट पहनकर खड़े रहे हटाए गए खिलाड़ी
विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई, जब राज्य की शीर्ष परिषद यानी एपेक्स काउंसिल द्वारा चुनी गई टीम को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दी गई। इसकी जगह मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स पीके संगमा द्वारा घोषित बदलावों के आधार पर खिलाड़ियों की एक बिल्कुल नई सूची मैदान पर उतरी। मैच शुरू होते समय हटाए गए कई खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ मैदान के किनारे अपनी खेल पोशाक में मौजूद थे, लेकिन उन्हें खेलने की अनुमति नहीं मिली। इस घटना से खिलाड़ियों के मनोबल को भारी ठेस पहुंची है।
अदालती फैसले के बाद बदला गया पूरा समीकरण
खिलाड़ियों के इस अचानक फेरबदल के पीछे कानूनी पृष्ठभूमि है। मेघालय उच्च न्यायालय ने 30 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 7 सितंबर को आयोजित एपेक्स काउंसिल की बैठक को अमान्य ठहरा दिया था। अदालत के इस आदेश के बाद उस बैठक में पारित सभी प्रस्ताव अवैध हो गए, जिसमें टीम चयन से संबंधित प्रक्रिया भी शामिल थी। इसी आदेश का हवाला देते हुए एसोसिएशन नेतृत्व ने टीम बदलने का कदम उठाया। एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स पीके संगमा ने इस फैसले का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि एपेक्स काउंसिल की उस बैठक में आवश्यक कोरम का अभाव था, जिस कारण उसके सभी फैसले स्वतः ही प्रभावहीन हो गए थे। उन्होंने प्रभावित खिलाड़ियों के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि वास्तविक टीम चयन की जिम्मेदारी चयन समिति की होती है।
शानदार फॉर्म में चल रही थी बाहर की गई टीम
जिस टीम को बाहर किया गया, उसका मैदान पर रिकॉर्ड इस सत्र में बेहद मजबूत रहा था। एपेक्स काउंसिल द्वारा चुनी गई टीम ने मौजूदा सत्र के अपने तीन रणजी ट्रॉफी मुकाबलों में मेघालय का प्रतिनिधित्व किया था। इस दौरान टीम ने एक मैच में जीत दर्ज की और दो मैच ड्रॉ खेले थे। इन नतीजों की बदौलत टीम 12 अंक हासिल कर प्लेट ग्रुप की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर मजबूती से काबिज थी। किनारे किए गए दल के कोच नीतेश शर्मा ने खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि वे बेहद आहत हैं और प्रशासनिक खामियों या खींचतान का खामियाजा खेल प्रतिभाओं को किसी भी हाल में नहीं भुगतना चाहिए।
अंडर-23 टूर्नामेंट तक पहुंची अंदरूनी खींचतान
यह विवाद केवल सीनियर टीम तक ही सीमित नहीं रहा। कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी में भाग ले रही मेघालय की अंडर-23 पुरुष टीम में भी यही स्थिति देखने को मिली। सिक्किम के खिलाफ होने वाले मैच से पहले एपेक्स काउंसिल की चयन प्रक्रिया के तहत तैयार की गई पूरी टीम को अचानक बदल दिया गया। इस तरह राज्य की दो प्रमुख टीमों में एक साथ हुए बदलावों ने यह साफ कर दिया कि क्रिकेट संघ की आंतरिक राजनीति खेल पर पूरी तरह हावी हो चुकी है।
युवा संगठन ने उठाई आवाज, बीसीसीआई से दखल की मांग
खिलाड़ियों के इस तरह दरकिनार किए जाने पर ह्यनिवट्रेप यूथ्स काउंसिल की स्पोर्ट्स सेल ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन के स्पोर्ट्स सेल अध्यक्ष फ्रेंकी खारुमनिद ने कहा कि आंतरिक गुटबाजी के चलते प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को अपमानित किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्रिकेट से जुड़े निर्णय प्रशासनिक कलह के बजाय मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर होने चाहिए। संगठन ने याद दिलाया कि एसोसिएशन के पदाधिकारी खेल के संरक्षक हैं और उनका दायित्व खिलाड़ियों के भविष्य की रक्षा करना है, न कि आपसी मतभेदों से उनका करियर बर्बाद करना। संगठन ने चेतावनी दी कि ऐसे विवादों से राष्ट्रीय स्तर पर मेघालय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है, इसलिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को तुरंत हस्तक्षेप कर राज्य के क्रिकेटरों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।


















