पंजाब में धार्मिक ग्रंथों के अनादर को रोकने के मकसद से तैयार किए गए ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ पर अब व्यापक विमर्श का दौर शुरू होने जा रहा है। इस संबंध में राज्य प्रशासन की ओर से गठित सात सदस्यीय समन्वय समिति 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने जा रही है। इस औपचारिक विचार-मंथन का मुख्य केंद्र बिंदु नए विधायी प्रावधानों के हर तकनीकी पहलू का बारीकी से अध्ययन करना तथा सिख पंथ की सर्वोच्च पीठ श्री अकाल तख्त साहिब से प्राप्त परामर्शों को सम्मिलित करना है।
समिति में शामिल प्रमुख चेहरे
प्रशासन की ओर से स्थापित इस उच्चस्तरीय समिति में धार्मिक विद्वानों, पूर्व जजों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का संतुलित प्रतिनिधित्व रखा गया है। समिति में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के साथ दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा और संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा शामिल हैं। इसके अलावा न्यायिक दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जसपाल सिंह और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गुरबीर सिंह को भी इस पैनल का हिस्सा बनाया गया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी जतिंदर सिंह औलख तथा विधि अधिकारी प्रीत इंदर पाल सिंह कानूनी और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने में सहयोग दे रहे हैं।
सार्थक संवाद और तालमेल की कार्ययोजना
यह समन्वय समिति न केवल नए कानून के विभिन्न अनुभागों की छानबीन करेगी, बल्कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा बनाए गए विशेष पैनल के साथ नियमित संपर्क तंत्र भी तैयार करेगी। बातचीत का उद्देश्य विभिन्न संबंधित पक्षों से आने वाली राय और दृष्टिकोण को सम्मानपूर्वक सुनना है, ताकि प्रस्तावित संशोधनों में किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे। 6 अक्टूबर को होने वाली इस बैठक के माध्यम से सरकार और धार्मिक प्रतिनिधियों के मध्य एक साझा आधार तैयार करने की दिशा तय होगी। कानून की मूल भावना और उसकी गरिमा को अक्षुण्ण रखना इस पूरी संवाद प्रक्रिया की प्राथमिक शर्त निर्धारित की गई है।
सख्त सजा के प्रावधानों पर अडिग रुख
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस पूरे मामले को लेकर रविवार को इस उच्चस्तरीय समन्वय समिति के साथ पहले ही एक प्रारंभिक बैठक पूरी की थी। उस दौरान उन्होंने समिति को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आम राय कायम करते हुए मूल वैधानिक ढांचे में किसी प्रकार की शिथिलता न आने दी जाए। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ज़ोर देकर कहा, “बेअदबी करने वालों के लिए आजीवन कारावास और भारी जुर्माने जैसे प्रावधान इस कानून की मुख्य नींव हैं।” उनका मानना है कि अपराध करने वालों के खिलाफ कड़े दंड का भय ही ऐसे संवेदनशील मामलों को रोकने के लिए सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकता है।
धार्मिक भावनाओं का सम्मान और भविष्य की दिशा
अतीत में बार-बार सामने आई धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की घटनाओं ने सिख समाज के भीतर गहरी चिंता और पीड़ा पैदा की थी। राज्य के नेतृत्व का कहना है कि यह नया कानून सिख संगत की भावनाओं को मरहम लगाने और उन्हें सुरक्षा का स्पष्ट आश्वासन देने का प्रयास है। अकाल तख्त साहिब के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श आगे बढ़ाते हुए यह ख्याल रखा जाएगा कि कानून का मूल ध्येय कमजोर न पड़ने पाए। आगामी बैठक में सभी पक्षों के विचारों का गहराई से विश्लेषण करके आगे का विधायी रोडमैप सुनिश्चित किया जाएगा।



















