पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानसंघर्षों को मात देकर सिनेमा में बनाई मुकाम, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्या दत्ता की अनूठी दास्तानअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त, डॉलर मजबूतगोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवालनागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपाय
100 प्रतिशत दृष्टिबाधित शेखर गोप ने लद्दाख की 20 हजार फीट ऊंची डीज़ो-जोंगो चोटी पर फहराया तिरंगा, धीरज कुमार ने भी रचा इतिहासझारखंड
9 सित॰ 2026, 7:51 am (16 दिन पहले)· 2

100 प्रतिशत दृष्टिबाधित शेखर गोप ने लद्दाख की 20 हजार फीट ऊंची डीज़ो-जोंगो चोटी पर फहराया तिरंगा, धीरज कुमार ने भी रचा इतिहास

झारखंड के 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित युवक शेखर गोप ने लद्दाख की लगभग 20 हजार फीट ऊंची कठिन डीज़ो-जोंगो चोटी को फतह कर नया इतिहास रचा है. इस साहसिक अभियान में उनके साथी धीरज कुमार ने भी 16,732 फीट तक चढ़ाई की.

झारखंड के दो दृष्टिबाधित युवाओं ने अपनी अटूट इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के बल पर एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है. पश्चिमी सिंहभूम जिले के रहने वाले शेखर गोप ने लद्दाख की लगभग 20 हजार फीट ऊंची कठिन डीज़ो-जोंगो चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया है. इस चुनौतीपूर्ण अभियान में उनके साथी धीरज कुमार ने भी 16,732 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर अपनी असाधारण क्षमता और साहस का परिचय दिया. दोनों युवा 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित हैं, लेकिन उनकी यह सफलता यह साबित करती है कि हौसले के सामने शारीरिक सीमाएं कभी बाधा नहीं बन सकतीं.

लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में तिरंगा फहराने की चुनौती

हिमालय की गोद में स्थित डीज़ो-जोंगो चोटी की चढ़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है. लगभग 20 हजार फीट की ऊंचाई पर पर्वतारोहियों को अत्यधिक ठंडे मौसम, तेज बर्फीली हवाओं, ऑक्सीजन की भारी कमी और दुर्गम पथरीले रास्तों का सामना करना पड़ता है. इन विषम परिस्थितियों के बावजूद, शेखर गोप ने बिना डिगे हर कदम पर आने वाली कठिनाइयों का मुकाबला किया और अंततः शिखर पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया. वहीं, धीरज कुमार ने भी मजबूत इरादों के साथ 16,732 फीट की ऊंचाई हासिल की. हालांकि, ऊंचाई पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें बेस कैंप से आगे नहीं बढ़ने का फैसला लेना पड़ा, लेकिन उनका यह प्रयास भी सराहनीय रहा.

ये भी पढ़ें

झारखंड के गांवों से शुरू हुआ सशक्तिकरण का सफर

दोनों पर्वतारोही झारखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से संबंध रखते हैं. शेखर गोप पश्चिमी सिंहभूम के तोड़ानहातु गांव के रहने वाले हैं, जबकि धीरज कुमार कड़ाजामदा क्षेत्र के निवासी हैं. वर्ष 2022 में दोनों युवाओं के जीवन में एक बड़ा मोड़ आया जब वे टाटा स्टील फाउंडेशन के सबल कार्यक्रम से जुड़े. इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उन्हें ब्रेल लिपि, स्वतंत्र जीवन जीने के व्यावहारिक कौशल, मोबिलिटी (आवागमन का तरीका) और डिजिटल तकनीक जैसी बुनियादी चीजों का गहन प्रशिक्षण दिया गया. इस संस्थागत सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को एक नई उड़ान दी.

दलमा की पहाड़ियों में विशेष प्रशिक्षण और फुटबॉल का अनुभव

सबल कार्यक्रम से मिले प्रशिक्षण के बाद दोनों युवाओं ने खेल और साहसिक गतिविधियों में अपनी क्षमताओं को तराशना शुरू किया. वे झारखंड की दृष्टिबाधित फुटबॉल टीम का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहे, जिससे उनके भीतर सहभागिता और टीम भावना का विकास हुआ. जब उन्हें लद्दाख की डीज़ो-जोंगो चोटी पर चढ़ाई का अवसर मिला, तो उन्होंने इसे अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं को परखने का जरिया बनाया. इस कठिन अभियान की पूर्व संध्या पर उन्होंने जमशेदपुर के पास स्थित दलमा की पहाड़ियों में विशेष प्रशिक्षण हासिल किया. इस दौरान फिटनेस, शारीरिक स्टेमिना, धैर्य और मानसिक मजबूती पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसका सीधा लाभ उन्हें लद्दाख की भीषण ऊंचाइयों पर मिला.

सवाल-जवाब

शेखर गोप ने लद्दाख की किस चोटी पर तिरंगा फहराया?
शेखर गोप ने लद्दाख की लगभग 20 हजार फीट ऊंची डीज़ो-जोंगो चोटी को सफलतापूर्वक फतह कर तिरंगा फहराया.
धीरज कुमार इस अभियान में कितनी ऊंचाई तक पहुंचे?
धीरज कुमार ने 16,732 फीट की ऊंचाई तक चढ़ाई की, जिसके बाद स्वास्थ्य कारणों से उन्हें आगे की चढ़ाई रोकनी पड़ी.
दोनों पर्वतारोही झारखंड के किन क्षेत्रों के निवासी हैं?
शेखर गोप पश्चिमी सिंहभूम जिले के तोड़ानहातु गांव के निवासी हैं, जबकि धीरज कुमार कड़ाजामदा क्षेत्र से आते हैं.
उन्हें पर्वतारोहण अभियान के लिए पूर्व प्रशिक्षण कहां मिला?
उन्होंने टाटा स्टील फाउंडेशन के सबल कार्यक्रम में जीवन कौशल सीखा और लद्दाख के अभियान से पहले दलमा की पहाड़ियों में विशेष फिटनेस और स्टेमिना प्रशिक्षण प्राप्त किया.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp