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3BHK की ओर झुका भारतीय होमबायर्स का मिज़ाज, 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की श्रेणी आई आगेहरियाणा
18 सित॰ 2026, 6:16 pm (4 दिन पहले)· 0

3BHK की ओर झुका भारतीय होमबायर्स का मिज़ाज, 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की श्रेणी आई आगे

H1 2026 के सर्वेक्षण में 3BHK घरों की पसंद अहमदाबाद में 57% तक पहुंची, जबकि 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की श्रेणी सबसे अधिक पसंद की गई. खरीदार जगह और सुविधाओं को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन 65% ने कीमतों को लेकर कम से कम मध्यम चिंता जताई.

घर खरीदने की तैयारी कर रहे भारतीय ग्राहक अब केवल कम कीमत वाले विकल्प को तरजीह नहीं दे रहे. H1 2026 के आंकड़े बताते हैं कि 3BHK वाले विस्तारित घर और 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की श्रेणी मांग के केंद्र में आ गए हैं. खरीदार अधिक जगह, बेहतर प्लानिंग, अतिरिक्त सुविधाएं और लंबे समय तक उपयोगी रहने वाली विस्तारित जगह को एक साथ महत्व दे रहे हैं. यह पसंद केवल एक शहर तक सीमित नहीं है; शामिल बाजारों में 3BHK का हिस्सा 39% से 57% के दायरे में दिखाई देता है. ऊंची कीमतें उत्साह पूरी तरह खत्म नहीं कर पाई हैं, लेकिन कई लोग समय, इलाका या अस्थायी रहने की योजना बदल रहे हैं.

शहरों में 3BHK को मिली अलग-अलग पसंद

अहमदाबाद ने इस पसंद में सबसे आगे रहते हुए 57% हासिल किए. चेन्नई तथा दिल्ली-एनसीआर में नतीजा 53-53% रहा और हैदराबाद में 52% लोगों ने 3BHK को चुना. बेंगलुरु तथा कोलकाता में यह हिस्सा 46% था, जबकि पुणे में 47% प्रतिभागियों की पसंद यही रही. एमएमआर में 39% के साथ यह पसंद सर्वे में शामिल बाजारों में सबसे कम दिखी. इन आंकड़ों से साफ है कि लगभग आधे खरीदारों की पहली पसंद तीन बेडरूम वाले विस्तारित विकल्प हैं, लेकिन स्थानीय बाजार के अनुसार पसंद की तीव्रता बदलती है.

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यह क्रम दो बातें साफ करता है. पहली, 3BHK पसंद केवल एक शहर में सीमित नहीं; दूसरी, स्थानीय बाजार के अनुसार तीव्रता बदलती है. अहमदाबाद में सबसे मजबूत समर्थन है और एमएमआर में भी 39% हिस्सा बना हुआ है. डेवलपर्स के लिए इसका अर्थ है कि बड़े आकार की मांग को पहचानने के साथ हर शहर की लोकेशन और कीमत की स्थिति को अलग से समझना होगा.

बजट की ऊपरी श्रेणी अब अधिक आकर्षक

कीमत के लिहाज से 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का सेगमेंट सबसे अधिक पसंद किया गया. यह बदलाव बताता है कि खरीदार बेहतर लोकेशन, बड़ा आकार और बेहतर गुणवत्ता के लिए अधिक राशि लगाने को तैयार हैं. पिछले कुछ वर्षों में ₹45 लाख से कम के घरों की पसंद घटी है, जबकि ऊंची कीमत वाली श्रेणियों में खरीदारों का हिस्सा बढ़ा है. प्रीमियम मकानों की मांग अब केवल निवेशकों तक सीमित नहीं है; खुद रहने वाले आम ग्राहक भी इस दिशा में तेजी से आगे आ रहे हैं. आवास कीमतों के लगातार बढ़ने के माहौल में यह बदलाव खास इसलिए है कि खरीदार महंगे विकल्प को लंबे समय की सुविधा और मूल्य से जोड़कर देख रहे हैं.

यह ऊपर की ओर हुआ बदलाव इस बात का संकेत नहीं कि सभी खरीदारों ने बजट बढ़ा दिया है. सर्वे के चिंता वाले आंकड़े दिखाते हैं कि अफोर्डेबिलिटी अभी भी फैसले को बांधे हुए है. असल में मिश्रण बदला है: कम कीमत वाली श्रेणी की पसंद घटी है, ऊंची श्रेणी में हिस्सेदारी बढ़ी है और बीच में 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का वर्ग सबसे आगे आ गया है.

डेवलपर्स के लिए बजट का यह बदलाव सप्लाई की योजना में भी अहम है. निचली कीमत वाले प्रोजेक्ट को अपना मूल्य स्पष्ट करना होगा, जबकि ऊंची श्रेणी में लोकेशन, प्लानिंग और सुविधाओं का संवेदनशील मेल जरूरी है. सर्वे यह नहीं कहता कि हर महंगा घर बिक जाएगा; यह बताता है कि पसंद उस वर्ग की तरफ बढ़ी है जहां अधिक जगह और लंबे समय का मूल्य साथ दिखाई देते हैं.

मांग की बुनियाद निवेश नहीं, खुद का रहना

सर्वेक्षण में 68% प्रतिभागियों ने घर अपने उपयोग के लिए खरीदने की बात कही, जबकि 32% ने निवेश को उद्देश्य बताया. इस बंटवारे से बड़े घरों की मांग को सट्टा मात्र समझना सही नहीं होगा. अधिकांश हिस्सेदारी उन लोगों की है जिन्हें वास्तविक आवासीय जरूरतों के हिसाब से जगह, सुविधा और भविष्य की उपयोगिता चाहिए. फिर भी, किराये और दोबारा बिक्री की संभावना भी खरीदारी के फैसले में अहम भूमिका निभा रही है.

यह बंटवारा प्रीमियम मांग और कीमत की चिंता को एक साथ समझने में मदद करता है. अधिकांश खरीदार खुद रहने के लिए आ रहे हैं, इसलिए वे जगह और सुविधा को लेकर लंबे समय की गणना कर रहे हैं. वहीं निवेश वाले 32% हिस्से में रेंटल इनकम और रीसेल वैल्यू जैसे वित्तीय संकेत भी फैसले को प्रभावित करते हैं.

रियल एस्टेट संचालन से जुड़े नाम इस बदलाव को कैसे पढ़ते हैं

एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी H1 2026 के आंकड़ों में प्रीमियम दिशा को स्पष्ट देखते हैं. उनके लिए 3BHK की मजबूत पसंद, ऊंचे बजट की श्रेणी और 4BHK तथा उससे बड़े घरों में बढ़ता आकर्षण एक साथ संकेत देते हैं कि कीमत ऊपर जाने पर भी खरीदार अधिक जगह और बेहतर गुणवत्ता को ऊपर रख रहे हैं. पुरी इस मांग को एंड-यूजर्स से चलने वाला बदलाव मानते हैं. उनके लिए बड़ा घर अब केवल महंगी खरीदारी नहीं, बल्कि लंबे समय की लाइफस्टाइल और मूल्य का सवाल है. डेवलपर्स के सामने मौका भी है और जिम्मेदारी भी कि सही लोकेशन, उपयुक्त कॉन्फिगरेशन और कीमत के अनुसार सही मूल्य मिले.

व्हाइटलैंड कॉरपोरेशन के डायरेक्टर-स्ट्रेटजी सुदीप भट्ट बड़े घरों की पसंद को आज के खरीदारों की बदलती इच्छाओं से जोड़ते हैं. एनारॉक H1 2026 सर्वे में करीब आधे प्रतिभागियों की पसंद 3BHK रही और दिल्ली-एनसीआर में यह अनुपात 53% था. भट्ट के अनुसार, अब खरीदार केवल कमरों की संख्या नहीं गिनते; वे अधिक जगह, आराम और भविष्य की जरूरतों के अनुसार बने जीवन विकल्प को अहमियत देते हैं. इसलिए बड़ा घर परिवार की वर्तमान जरूरत और आगे की योजना, दोनों का हिस्सा बन गया है.

पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरीवाल के अनुसार, परिवार अधिक जगह, बेहतर सुविधा और आराम देने वाले घरों की तरफ बढ़ रहे हैं. गुरुग्राम में यह बदलाव साफ दिखाई देता है. खरीदार ऐसे पहले से सोचे-समझे विकल्प ढूंढ रहे हैं जहां विस्तारित लिविंग स्पेस, प्रीमियम सुविधाएं और बेहतर लाइफस्टाइल का अनुभव एक साथ मिले. यह पसंद दिखाती है कि ग्राहक घर को अलग-अलग सुविधाओं के योग के रूप में परख रहे हैं.

अनहद डेवलपर्स के CEO आदिल अल्ताफ कहते हैं कि ग्राहक अब यह तय करने में पहले से अधिक स्पष्ट हैं कि उन्हें रहने के लिए कैसा घर चाहिए. करीब आधे लोगों की पहली पसंद 3BHK है और दिल्ली-एनसीआर में 53% ने इसे ऊपर रखा. अल्ताफ के अनुसार, अधिक स्पेस, आराम और बेहतर जीवन शैली के साथ लिविंग अनुभव, प्राइवेसी और प्रीमियम सुविधाएं भी फैसले का हिस्सा बन गए हैं. ऊंची कीमत वाले घरों की मांग से प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के प्रति एंड-यूजर्स की स्वीकार्यता भी सामने आती है.

कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग इसे एनसीआर के खरीदारों की सोच में आए बड़े बदलाव से जोड़ते हैं. दिल्ली-गुरुग्राम के साथ गाजियाबाद में भी उन्हें समान रुझान दिखाई देता है. एंड-यूजर्स अब बड़े और बेहतर तरीके से योजनाबद्ध घरों में अपग्रेड करना चाहते हैं. उनके अनुसार, महंगे घरों की ओर झुकाव पूरे इलाके में बढ़ती आकांक्षाओं और बदली हुई लाइफस्टाइल जरूरतों को दिखाता है. यह बदलाव केवल दिल्ली-गुरुग्राम तक नहीं, बल्कि आसपास के बाजारों में भी दिख रहा है.

सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का बड़े कॉन्फिगरेशन, अधिक स्पेस और बेहतर सुविधाओं वाले घरों में मांग वृद्धि देखते हैं. उनके लिए 3BHK जैसे विकल्प वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की उपयोगिता भी संभालते हैं. कीमतें बढ़ने से खरीदार बजट और लोकेशन को लेकर अधिक सावधान हो गए हैं, लेकिन मकान खरीदने की बुनियादी जरूरत कायम है. सिक्का के अनुसार, डेवलपर्स को कीमत, सुविधा, स्थान और गुणवत्ता को मिलाकर ऐसा संतुलन बनाना होगा जो खरीदारों की वास्तविक जरूरत से मेल खाता हो.

एसकेए ग्रुप के निदेशक संजय शर्मा एनारॉक कंज्यूमर सेंटिमेंट सर्वे को खरीदारों की पसंद में लगातार बदलाव का संकेत मानते हैं. महंगाई के कारण ग्राहक अपनी राशि, इलाका और खरीद की तारीख फिर से तय कर रहे हैं, लेकिन घर खरीदने की मूल इच्छा बड़ी हद तक बरकरार है. 68% प्रतिभागी मकान को स्वयं के उपयोग में लाने की योजना में हैं, इसलिए मांग अभी भी जरूरत पर केंद्रित है. शर्मा के लिए डेवलपर्स को लंबे समय के मूल्य, बजट, स्थान और गुणवत्ता के बीच सही संतुलन उपलब्ध कराना अहम है.

सभी प्रतिक्रियाओं में एक साझा संकेत

इन सभी टिप्पणियों में एक बात साझा है: खरीदार अधिक कीमत चुकाने के लिए केवल ब्रांड या ऊंचे दाम को कारण नहीं मान रहे. उन्हें बड़ी जगह, सही योजना, प्राइवेसी, सुविधाएं और भविष्य में उपयोगी रहने वाला विकल्प चाहिए. इसलिए प्रीमियम मांग को बेहतर उत्पाद से जोड़ा जा रहा है. साथ ही, बजट और लोकेशन पर सावधानी दिखाती है कि खरीदार बिना सोचे खर्च नहीं बढ़ा रहे; वे अपने लंबे समय के उपयोग और मूल्य के हिसाब से विकल्प छांट रहे हैं.

कीमतों की बढ़ोतरी ने चिंता कम नहीं की

बड़े घरों के प्रति झुकाव के बावजूद मौजूदा कीमतें खरीदारों की प्रमुख चिंता हैं. 65% उत्तरदाताओं ने कीमतों में हो रही वृद्धि को लेकर कम से कम मध्यम स्तर की चिंता जताई. 40% प्रतिभागियों का मानना है कि यह ऊपर की दिशा लंबे समय तक चलने वाला रुझान है. फिर भी, 44% खरीदार अपनी पहले से तय योजना के अनुसार आगे बढ़ना चाहते हैं. 38% खरीदारी में थोड़ी देरी कर सकते हैं, जबकि 18% इसे अनिश्चित अवधि के लिए मुल्तवी करने या पूरी तरह रद्द करने पर विचार कर रहे हैं. इसलिए ऊंची कीमत ने इच्छा को समाप्त नहीं किया, पर फैसले की गति और तैयारी को प्रभावित जरूर किया है.

चिंता और कार्रवाई के आंकड़े एक साथ देखे जाएं तो स्पष्ट होता है कि महंगाई हर खरीदार को एक जैसा प्रभावित नहीं कर रही. 44% का अपनी योजना पर चलना दिखाता है कि कुछ लोग कीमत को स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहते हैं. वहीं 38% और 18% समूह दिखाते हैं कि तैयारी, भुगतान क्षमता और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर फैसला अलग-अलग हो रहा है.

अफोर्डेबिलिटी और विकल्पों की कमी बदल रही योजना

जो लोग खरीदारी टाल या रद्द कर रहे हैं, उनके लिए सबसे बड़ी रुकावट घर खरीदने की क्षमता है. 44% ने अफोर्डेबिलिटी को मुख्य कारण बताया. 32% ने अपने बजट में उपलब्ध प्रॉपर्टी के सीमित विकल्पों को दूसरा बड़ा कारण चुना. इस दबाव के चलते कुछ खरीदार शहर के बाहरी हिस्सों में तलाश कर रहे हैं, कुछ खरीद की तारीख आगे बढ़ा रहे हैं और कुछ फिलहाल किराए के घर में रहने का रास्ता अपना रहे हैं. मकान खरीदने की इच्छा घटने के बजाय खरीदार अब रास्ता बदल रहे हैं, जिससे कीमतों का असर उनकी रणनीति पर दिखता है.

बाहरी इलाकों की तलाश, समय आगे बढ़ाना और किराए पर बने रहना तीन अलग रणनीतियां हैं. पहला रास्ता बजट के अनुसार अधिक विकल्प खोजने से जुड़ा है, दूसरा खरीदार को तैयारी के लिए समय देता है और तीसरा तुरंत खरीदारी के दबाव को टालता है. सर्वे इन विकल्पों को अलग-अलग खरीदारों की स्थिति के अनुसार दिखाता है, कोई एक सार्वभौमिक फैसला नहीं.

नए प्रोजेक्टों की ओर पसंद तेज

बड़े घरों का रुझान नए लॉन्च हो रहे प्रोजेक्टों में भी दिखाई देता है. करीब 34% प्रतिभागियों ने न्यू लॉन्च प्रोजेक्टों को पहले रखा, जबकि 18% ने रेडी-टू-मूव-इन यानी RTM घर पसंद किए. H1 2026 में RTM और न्यू लॉन्च का अनुपात 18:34 रहा. H1 2022 में यही अनुपात 30:25 था, जिससे नए प्रोजेक्टों की पकड़ में बदलाव साफ होता है. नए विकल्पों में निर्माता की विश्वसनीयता को 34% ने पहले स्थान पर रखा. 21% ने शुरुआती कीमत के फायदे को अहम माना, जिसमें अर्ली-बर्ड प्राइसिंग या शुरुआत में कम वित्तीय जिम्मेदारी जैसे विकल्प शामिल हैं.

अनुपात में बदलाव इस बात की ओर इशारा करता है कि नए प्रोजेक्टों की सापेक्ष पसंद बढ़ी है. H1 2022 में RTM का हिस्सा अधिक था, जबकि H1 2026 में न्यू लॉन्च आगे निकले. फिर भी 18% RTM पसंद दिखाती है कि तुरंत उपलब्ध घरों की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई. डेवलपर की साख और शुरुआती वित्तीय लाभ दोनों नए प्रोजेक्ट की अपील को समझाते हैं.

घर को रहने की जगह और वित्तीय एसेट दोनों माना जा रहा है

रियल एस्टेट में निवेश का रुझान बढ़ रहा है, फिर भी निवेश के विकल्प के रूप में रेजिडेंशियल रियल एस्टेट को 60% प्रतिभागियों ने पसंद किया. स्टॉक यानी शेयर बाजार की हिस्सेदारी 20% रही, गोल्ड को 11% ने चुना और फिक्स्ड डिपॉजिट को 9% प्रतिभागियों ने पसंद किया. यह आंकड़ा आवासीय प्रॉपर्टी की मजबूत स्थिति दिखाता है. रियल एस्टेट के अलावा अन्य एसेट्स में निवेश करने वाले 44% प्रतिभागियों की योजना है कि भविष्य में मिलने वाला लाभ घर खरीदने में लगाया जाए.

दूसरी ओर, कम से कम 77% खरीदार किराये से आने वाली रेंटल इनकम को महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, चाहे वे घर खुद रहने के लिए ही खरीद रहे हों. नियमित किराये की आय और कीमत बढ़ने की संभावना दोनों आकर्षक हैं. 67% ने संभावित रीसेल वैल्यू को भी महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण बताया. इसलिए घर का फैसला अब स्वयं के रहने, नियमित आय और लंबे समय के मूल्य के मिले-जुले हिसाब पर हो रहा है. यह दोहरा नजरिया खरीदारों को एक ही प्रॉपर्टी से दो तरह के लक्ष्य जोड़ने पर मजबूर करता है.

मांग कमजोर नहीं, खरीदारी का तरीका बदला

सर्वे का मुख्य निष्कर्ष यही है कि कीमतों में वृद्धि ने आवासीय मांग को कमजोर नहीं किया. असर इस बात पर पड़ रहा है कि खरीदार कौन सा घर चुनेंगे, किस लोकेशन को तरजीह देंगे और खरीद कब करेंगे. बड़े आकार, 3BHK, ऊंची बजट श्रेणी और नए प्रोजेक्टों की पसंद एक साथ दिखाती है कि ग्राहक अधिक मूल्य चाहते हैं. साथ ही, अफोर्डेबिलिटी, सीमित विकल्प और कीमतों की चिंता उन्हें अधिक सावधानी से कदम उठाने पर मजबूर कर रही है.

सवाल-जवाब

H1 2026 सर्वे में 3BHK की पसंद कहां सबसे अधिक रही?
अहमदाबाद में 57% प्रतिभागियों ने 3BHK को पसंद किया, जो सर्वे में शामिल बाजारों में सबसे अधिक है.
खरीदारों की सबसे लोकप्रिय बजट श्रेणी कौन सी है?
90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की श्रेणी सबसे अधिक पसंद की गई. ₹45 लाख से कम के घरों की पसंद पिछले कुछ वर्षों में घटी है.
क्या बढ़ती कीमतों ने घर खरीदने की इच्छा खत्म कर दी?
नहीं, 44% खरीदार अपनी योजना के अनुसार आगे बढ़ना चाहते हैं. 38% थोड़ी देरी और 18% अनिश्चित समय के लिए टालने या रद्द करने पर विचार कर सकते हैं.
खरीदारी टालने या रद्द करने के प्रमुख कारण क्या हैं?
44% ने अफोर्डेबिलिटी को मुख्य कारण बताया. 32% ने अपने बजट में उपलब्ध प्रॉपर्टी के सीमित विकल्पों को दूसरा बड़ा कारण बताया.
नए प्रोजेक्ट और RTM घरों में खरीदार किसे अधिक पसंद कर रहे हैं?
34% ने न्यू लॉन्च प्रोजेक्ट और 18% ने RTM घरों को पसंद किया. H1 2026 में RTM और न्यू लॉन्च का अनुपात 18:34 था, जबकि H1 2022 में यह 30:25 था.
खुद रहने और निवेश के लिए खरीदारी का बंटवारा क्या है?
68% प्रतिभागी घर को खुद के उपयोग के लिए खरीद रहे हैं. 32% खरीदारी को निवेश के उद्देश्य से कर रहे हैं.
रेंटल इनकम और रीसेल वैल्यू को कितनी अहमियत मिली?
77% लोग किराये से होने वाली आय को महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं. 67% ने संभावित रीसेल वैल्यू को भी महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण बताया.
निवेश विकल्पों में रियल एस्टेट की स्थिति कैसी रही?
60% ने रियल एस्टेट को पसंद किया, जबकि स्टॉक को 20%, गोल्ड को 11% और फिक्स्ड डिपॉजिट को 9% मिला. रियल एस्टेट के अलावा अन्य एसेट्स में निवेश करने वाले 44% भविष्य के लाभ को घर खरीदने में लगाना चाहते हैं.
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टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

यह रुझान केवल रीयल एस्टेट का नहीं, बल्कि शहरी मध्यम वर्ग की बदलती क्रय शक्ति और जीवनशैली की आकांक्षाओं का संकेत है। हालांकि 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के सेगमेंट में मांग बढ़ी है, लेकिन कीमतों और मुद्रास्फीति को लेकर 65% खरीदारों की मध्यम चिंता इस बात का प्रमाण है कि भविष्य की सरकारी नीतियों और आवास ऋण दरों में स्थिरता इस बाजार को बनाए रखने में निर्णायक होगी।

Aisha Khan@aisha-khan·3 दिन पहले

मनोरंजन और पॉप कल्चर रिपोर्टर के तौर पर मैं देख रही हूँ कि कैसे हमारे टीवी शो और वेब सीरीज़ में अब बड़े अपार्टमेंट्स और शहरी जीवनशैली को स्टेटस सिंबल की तरह दिखाया जाने लगा है, जो सीधे तौर पर इस 3BHK और प्रीमियम आवास के बढ़ते रुझान से जुड़ता है। जब आम परिवार स्क्रीन पर बेहतर लाइफस्टाइल देखते हैं, तो असल जिंदगी में भी 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के सेगमेंट में निवेश करने की उनकी लालसा बढ़ जाती है। हालांकि, 65% खरीदारों की महंगाई को लेकर चिंता यह बताती है कि यह सपना तभी पूरा होगा जब उनकी क्रय शक्ति और मनोरंजन जैसे अन्य खर्चों के बीच संतुलन बना रहेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

यह रियल एस्टेट रुझान शहरी मध्यम वर्ग की बदलती प्राथमिकताओं और बढ़ती क्रय शक्ति को स्पष्ट करता है। हालांकि 65% खरीदारों में कीमत को लेकर चिंता बनी हुई है, फिर भी 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक के बजट में 3BHK की ओर झुकाव यह बताता है कि लोग भविष्य की सुरक्षा और बेहतर जीवनशैली के लिए बड़े निवेश करने को तैयार हैं। डेवलपर्स को इस मांग को भुनाने के लिए पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण योजनाएं लानी होंगी।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

अहमदाबाद से लेकर एनसीआर तक 3BHK और डेढ़ करोड़ तक के सेगमेंट में दिख रहा यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि शहरी भारतीय अब रियल एस्टेट को केवल छत के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संपत्ति और जीवनशैली के अपग्रेड के रूप में देख रहे हैं। हालांकि 65% खरीदारों की अफोर्डेबिलिटी संबंधी चिंताएं इस बात का संकेत हैं कि डेवलपर्स को प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में वैल्यू फॉर मनी और पारदर्शी मूल्य निर्धारण पर विशेष ध्यान देना होगा, अन्यथा बढ़ती लागत इस सकारात्मक रुझान की गति को प्रभावित कर सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

यह रुझान सिर्फ महानगरों के रियल एस्टेट का नहीं, बल्कि बदलते शहरी सामाजिक ढांचे का संकेत है। उत्तर प्रदेश जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों के बड़े शहरी केंद्रों—जैसे नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ—में भी मध्यम वर्ग की प्राथमिकताएं अब छोटे मकानों से हटकर बेहतर जीवन स्तर और सुविधाओं वाले 3BHK की ओर तेज़ी से बढ़ रही हैं, हालांकि लगातार बढ़ती कीमतें और सामर्थ्य (अफोर्डेबिलिटी) इस बदलाव के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

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