80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर दिल्ली के लाल किले में आयोजित मुख्य राष्ट्रीय समारोह के दौरान एक नया अध्याय जोड़ा गया। शनिवार को स्वतंत्रता दिवस समारोह की औपचारिक शुरुआत के समय पहली बार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का संपूर्ण संस्करण पूरी गरिमा के साथ बजाया गया। राष्ट्रीय गीत के संपूर्ण गायन और वादन के तुरंत बाद देश का राष्ट्रगान हुआ। इसके पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराकर संपूर्ण राष्ट्र को संबोधित किया। देश के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पूरे स्वरूप को शामिल किया जाना एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक क्षण रहा।
150 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत का जश्न
राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्षों के ऐतिहासिक और प्रेरणादायी इतिहास को सम्मान देने के उद्देश्य से इस वर्ष के आयोजन में इसे विशेष प्राथमिकता दी गई। इस महत्वपूर्ण अवसर का उत्सव मनाने के लिए नेशनल कैडेट कोर (NCC) के लगभग 2,500 कैडेट्स और 'मेरा भारत' (My Bharat) अभियान से जुड़े वॉलंटियर्स ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। लाल किले की प्राचीर के ठीक सामने स्थित ज्ञानपथ पर बैठे इन युवाओं ने एक साथ मिलकर 'वंदे मातरम' शब्द के अक्षरों की एक अत्यंत आकर्षक और सुव्यवस्थित मानव आकृति का निर्माण किया।
'विकसित भारत @2047' थीम और 5000 विशेष अतिथि
ज्ञानपथ के पूरे परिसर को देश के भावी विजन को दर्शाने वाली 'विकसित भारत @2047' की थीम पर सजाया गया था, जहां इस संकल्प से जुड़े अनेक कट-आउट प्रदर्शित किए गए थे। लाल किले के इस भव्य स्वतंत्रता दिवस समारोह की साक्षी बनने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और पेशों से आए लगभग 5,000 खास मेहमानों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। इन अतिथियों ने प्राचीर के समक्ष उपस्थित रहकर इस गौरवशाली क्षण का अनुभव किया।
राष्ट्रपति के संबोधन से हुई थी शुरुआत
स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक एक दिन पहले, यानी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भी इस नई परिपाटी की शुरुआत की जा चुकी थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्र के नाम दिए गए औपचारिक संबोधन के प्रारंभ और समापन, दोनों ही मौकों पर 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण बजाया गया था। यह पहला मौका था जब स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या के किसी भी सरकारी आयोजन में राष्ट्रीय गीत के संपूर्ण वर्शन को आधिकारिक तौर पर बजाया गया।



















