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अलवर की पहचान कलाकंद पर मिलावट का साया, ढाई साल में पांच सौ से ज्यादा खाद्य नमूने फेलराजस्थान
13 जून 2026, 2:59 pm (46 दिन पहले)· 0

अलवर की पहचान कलाकंद पर मिलावट का साया, ढाई साल में पांच सौ से ज्यादा खाद्य नमूने फेल

अलवर में बीते ढाई साल में लिए गए 1900 से ज्यादा खाद्य नमूनों में से 500 से अधिक जांच में फेल मिले, जिनमें मशहूर कलाकंद भी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग ने दोषियों पर लाखों की पेनल्टी ठोकी है।

राजस्थान का अलवर अपनी मिठाई कलाकंद के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है, लेकिन अब यही पहचान सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के बाजारों में बिकने वाला कलाकंद भी मिलावट से अछूता नहीं रहा। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की लगातार जांच में सामने आया है कि नामी मिठाई से लेकर रोजमर्रा की खाद्य सामग्री तक में मिलावटखोरी जड़ें जमा चुकी है।

ढाई साल का आंकड़ा डराने वाला

विभाग ने पिछले ढाई साल के दौरान 1900 से अधिक खाद्य सामग्री के नमूने प्रयोगशाला भेजे। इनमें से 500 से ज्यादा नमूने जांच में खरे नहीं उतरे और फेल घोषित किए गए। यह आंकड़ा इस बात का इशारा है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का धंधा बाजार में किसी छोटे-मोटे स्तर पर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है।

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जो नमूने फेल पाए गए, उनमें सिर्फ कलाकंद ही नहीं था। दूध, दूसरी तरह की मिठाइयां, मसाले और यहां तक कि समोसा-कचौरी जैसी आम खाने-पीने की चीजों में भी मिलावट पकड़ी गई। विभाग समय-समय पर कार्रवाई तो कर रहा है, पर अधिकारियों का साफ कहना है कि खरीदारी के वक्त ग्राहकों को भी अपनी ओर से सतर्क रहना उतना ही जरूरी है।

साल दर साल कितने नमूने फेल

अलवर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. योगेन्द्र शर्मा ने बताया कि जिले में मिलावट करने वालों के खिलाफ हर साल अभियान चलाया जाता है। साल 2024 में विभाग ने खाद्य सामग्री के 907 नमूने एकत्र किए, जिनमें से 290 जांच में फेल निकले। इनमें से 106 प्रकरण एडीएम कोर्ट में पेश किए गए और दोषियों पर कुल 34 लाख 72 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई गई।

इसके अगले साल यानी 2025 में भी मिलावटखोरों पर नजर बनी रही। इस अवधि में 779 नमूने लिए गए, जिनमें 233 जांच में फेल साबित हुए। इनमें से 56 मामले एडीएम कोर्ट तक पहुंचे और दोषियों से 11 लाख 30 हजार रुपए की पेनल्टी वसूल की गई। वहीं साल 2026 में जनवरी से मई के बीच विभाग ने 297 नमूने जांच के लिए भेजे, जिनमें से 65 फेल पाए गए।

मैसूर लैब तक पहुंचती है जांच

डॉ. शर्मा के मुताबिक, जो नमूने जिला स्तर की प्रयोगशाला में फेल हो जाते हैं, उन्हें मिलावट की पुख्ता पुष्टि के लिए मैसूर स्थित लैब में भेजा जाता है। साल 2024 से मई 2026 तक ऐसे 156 नमूने मैसूर लैब भेजे गए। इनमें से सिर्फ 36 नमूने ही जांच में पास हो सके, जबकि 120 नमूने वहां भी फेल साबित हुए — जो बताता है कि मिलावट की समस्या कितनी गहरी है।

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