असम के डिब्रूगढ़ में ऑयल इंडिया के टैंक फार्म में लगी भीषण आग, एक की मौत और छह घायलत्योहारी खरीदारी में मिला है खराब सामान, तो इस तरह आसानी से वापस मिल जाएंगे आपके पैसेजमशेदपुर के जलेबी लाइन बाजार में सजी मिठाइयों की महफिल, दिवाली पर बारह तरह के लड्डू और नमकीन की भारी मांगऑनलाइन शॉपिंग और महंगाई की मार, नैनीताल में इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार 30 प्रतिशत तक गिराज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के सभी चुनावी नतीजों की हो व्यापक समीक्षा, जयपुर में सचिन पायलट की बड़ी मांगझारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, JSSC CGL के दो हजार सफल अभ्यर्थियों को राहत और परीक्षा रद्द करने का आदेश खारिजजैसलमेर के रामदेवरा में दीपावली पर अनूठी सजावट, 500 किलो फूलों से महका बाबा रामदेव का दरबारहिमाचल के सम्मू गांव में दिवाली पर क्यों पसरा रहता है सन्नाटा, जानिए सात पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपरासुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश की बड़ी जीत, बीबीएमबी विवाद सुलझा, सालाना 1000 करोड़ तक का होगा फायदासिरमौर के सराहां में धनतेरस पर दर्दनाक हादसा, खाई में बोलेरो गिरने से बड़े भाई की मौत और नौ घायल
अंबाला में तैयार हो रहे भविष्य के जिम्नास्ट, जानिए फ्रांस के आधुनिक उपकरणों के बीच बच्चों को कैसे मिल रही अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंगहरियाणा
12 अक्तू॰ 2026, 4:54 pm (25 दिन पहले)· 2

अंबाला में तैयार हो रहे भविष्य के जिम्नास्ट, जानिए फ्रांस के आधुनिक उपकरणों के बीच बच्चों को कैसे मिल रही अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग

अंबाला छावनी के स्टेडियम में फ्रांस से मंगाए गए आधुनिक उपकरणों के साथ 50 बच्चे हर सुबह जिम्नास्टिक की बारीकियां सीख रहे हैं। कोच सतपाल छाबड़ा ने बताया कि 5 से 6 वर्ष की उम्र में शुरुआत करने से कैसे यह खेल शानदार करियर बना सकता है।

खेल की दुनिया में अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य तलाश रहे अभिभावकों के लिए जिम्नास्टिक एक शानदार विकल्प बनकर उभर रहा है। सही उम्र में मिली वैज्ञानिक ट्रेनिंग और कड़े अनुशासन के बल पर नन्हे खिलाड़ी राज्य स्तर से लेकर वैश्विक मंचों तक अपनी धाक जमा सकते हैं। हरियाणा के अंबाला छावनी स्थित खेल स्टेडियम में इस समय आधुनिक खेल सुविधाओं का एक मजबूत ढांचा तैयार हो चुका है, जहां न केवल स्थानीय बच्चे बल्कि आसपास के अन्य क्षेत्रों के उभरते खिलाड़ी भी खेल के गुर सीख रहे हैं।

फ्रांस से पहुंचे ओलंपिक स्तर के उपकरण

अंबाला छावनी के खेल परिसर में स्थापित जिम्नास्टिक हॉल उत्तर भारत के सबसे समृद्ध प्रशिक्षण केंद्रों में गिना जाने लगा है। इस हॉल की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद खेल संसाधन हैं, जिन्हें विशेष रूप से फ्रांस से मंगवाया गया है। यह साजोसामान सीधे ओलंपिक मानकों के अनुरूप है, जिससे बच्चों को शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के माहौल में अभ्यास करने का अवसर मिलता है। हर सुबह 5:30 बजे करीब 50 नन्हे खिलाड़ी अपनी ट्रेनिंग के लिए स्टेडियम पहुंच जाते हैं और कड़े अभ्यास सत्र में पसीना बहाते हैं।

ये भी पढ़ें

ट्रेनिंग शुरू करने की सही उम्र और 10 साल की तपस्या

जिम्नास्टिक कोच सतपाल छाबड़ा के अनुसार इस खेल में शीर्ष स्तर पर पहुंचने के लिए प्रारंभिक चरण बेहद अहम होता है। उनका स्पष्ट मानना है कि अगर बच्चे को 5 से 6 साल की उम्र में इस खेल से जोड़ दिया जाए, तो उसके शरीर का लचीलापन और संतुलन बहुत तेजी से विकसित होता है। जिम्नास्टिक कोई ऐसा खेल नहीं है जिसमें दो या तीन साल की ट्रेनिंग के बाद अंतरराष्ट्रीय पदक की उम्मीद की जा सके। शारीरिक मजबूती, संतुलन और जटिल तकनीकी कौशल को पूरी तरह साधने में लगभग 10 साल का समय लग जाता है। यदि कोई नन्हा एथलीट पांच वर्ष की आयु से नियमित अभ्यास शुरू करता है, तो 20 वर्ष का होते-होते वह दुनिया की शीर्ष प्रतियोगिताओं में मुकाबला करने की स्थिति में पहुंच जाता है।

पढ़ाई और खेल के बीच तालमेल जरूरी

अक्सर अभिभावकों को यह चिंता सताती है कि गंभीर खेल अभ्यास से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। कोच छाबड़ा ने स्पष्ट किया कि सुबह के समय लगभग एक घंटे का नियमित अभ्यास दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्कूल की पढ़ाई को भी बिना किसी रुकावट के जारी रखा जा सकता है। शुरुआती दिनों में बच्चों की लगन बनाए रखने के लिए माता-पिता और प्रशिक्षक दोनों की संयुक्त प्रेरणा जरूरी होती है। एक बार जब खेल के प्रति बच्चों की रुचि और अनुशासन स्थापित हो जाता है, तो वे स्वयं सुबह मैदान में आने के लिए उत्साहित रहते हैं।

अंबाला की समृद्ध विरासत और करियर की संभावनाएं

अंबाला की धरती ने जिम्नास्टिक को कई बड़े नाम दिए हैं। इस केंद्र से जुड़ी अंजू दुआ और सुनीता शर्मा को देश के प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा योगेश्वर भी राष्ट्रीय चैंपियन रहने के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जिन्हें सतपाल छाबड़ा ने स्वयं कोचिंग दी थी।

इस खेल में शानदार प्रदर्शन करने वाले युवाओं के लिए आगे चलकर रोजगार के कई मजबूत अवसर खुलते हैं। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ी खेल कोटे के जरिए सरकारी नौकरियों के हकदार बनते हैं। इसके अलावा हरियाणा में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के रहने के लिए स्पोर्ट्स हॉस्टल और उचित खान-पान से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे खिलाड़ी बिना किसी आर्थिक दबाव के अपने खेल पर ध्यान केंद्रित रख सकें।

सवाल-जवाब

जिम्नास्टिक की ट्रेनिंग किस उम्र से शुरू करनी चाहिए?
कोच सतपाल छाबड़ा के अनुसार बच्चों को 5 से 6 वर्ष की उम्र में ही जिम्नास्टिक का बुनियादी अभ्यास शुरू कर देना चाहिए।
अंबाला के जिम्नास्टिक हॉल में उपकरण कहां से मंगाए गए हैं?
अंबाला छावनी स्टेडियम के जिम्नास्टिक हॉल में ओलंपिक स्तर के उपकरण फ्रांस से मंगवाए गए हैं।
एक शीर्ष जिम्नास्ट तैयार होने में कितना समय लगता है?
जिम्नास्टिक में तकनीक, लचीलापन और शारीरिक क्षमता विकसित करने में लगभग 10 वर्ष का नियमित अभ्यास लगता है।
क्या खेल के अभ्यास से बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है?
नहीं, सुबह लगभग एक घंटे के अभ्यास के बाद बच्चे नियमित रूप से अपने स्कूल और पढ़ाई को जारी रख सकते हैं।
अंबाला से किन प्रमुख खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड मिल चुका है?
अंबाला से जुड़ी जिम्नास्ट अंजू दुआ और सुनीता शर्मा को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
जिम्नास्टिक में बेहतर प्रदर्शन करने पर क्या लाभ मिलते हैं?
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ी खेल कोटे से सरकारी नौकरियों और सरकारी हॉस्टल व खान-पान की सुविधाओं के पात्र बनते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·24 दिन पहले

अंबाला में ओलंपिक स्तर के उपकरण तो आ गए, पर क्या छोटे शहरों के इन बच्चों को आगे चलकर स्पॉन्सरशिप और कॉर्पोरेट मदद समय पर मिल पाएगी?

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

पाँच साल के बच्चों से सुबह साढ़े पाँच बजे उठकर कड़ा अभ्यास कराना थोड़ा ज्यादा लगता है। बचपन भी कुछ होता है भाई।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

अ अर्जुन भाई, बात तो सही है आपकी, पर ओलंपिक मेडल ऐसे ही थोड़ी मिलते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

अंबाला स्टेडियम में सुबह साढ़े पाँच बजे बच्चों को पसीना बहाते देखना अपने बचपन की उन सर्द सुबहों की याद दिला देता है जब हम भी मैदान पर पसीना बहाते थे। फ्रांस जैसे देशों से आए ऐसे आधुनिक उपकरण हमारे समय में कहाँ मिलते थे, बस अपनी मेहनत पर भरोसा होता था। इन बच्चों की लगन देखकर लगता है कि ये देश का नाम ज़रूर रोशन करेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

रोहन जी, बात तो सही है, बिना सुविधाओं के भी हमारे समय के खिलाड़ियों ने खूब नाम कमाया, पर अब आधुनिक तकनीक मिलने से बच्चों को ग्लोबल मंच पर मुकाबला करने में आसान राह मिल रही है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp