ऊपरी असम के इलाकों में उफनती नदियों और भारी तबाही के बीच शिवसागर, चराईदेव और नाजिरा के कई हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। दूर-दराज के इलाकों में पानी भर जाने से हजारों परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस विनाशकारी आपदा के बीच एक तरफ जहां स्थानीय लोगों की बेबसी के दिल दहला देने वाले मंजर सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक संस्थाएं, महिला समूह और राजनीतिक कार्यकर्ता राहत अभियानों में जुटे हुए हैं।
16 दिनों से ईंटों और पटरों पर टिका बुजुर्ग दंपत्ति का जीवन
असम में आई इस भीषण बाढ़ की सबसे दर्दनाक तस्वीर शिवसागर जिले के भदहरा गांव से सामने आई है, जहां डोरिका नदी के भयानक बहाव ने आवासीय इलाकों को तबाह कर दिया। इस तबाही में एक बुजुर्ग दंपत्ति का घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और मकान का एक हिस्सा नदी की तेज धार में बह गया। 70 वर्षीय बुजुर्ग पति अपनी दृष्टिहीन और सुनने में असमर्थ पत्नी की देखरेख में जुटे हुए हैं। टूटी हुई झोपड़ी में रहने की जगह न बचने के कारण यह दंपत्ति पिछले 16 दिनों से ईंटों के ऊपर रखे लकड़ी के तख्तों के एक कामचलाऊ ढांचे पर रहने को मजबूर है।
सामाजिक संस्थाओं और महिला संगठनों की जमीनी पहल
आपदा की इस कठिन घड़ी में प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने के लिए राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं। असम भाषिक सांख्यालघु परिषद ने शिवसागर, चराईदेव और नाजिरा के जलमग्न इलाकों में खाद्य और आवश्यक सामग्री बांटने का विशेष कार्यक्रम चलाया। इस मानवीय पहल के तहत असम गण परिषद के नेताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शिवसागर जिला एजीपी अध्यक्ष घाना गोगोई और अन्य पार्टी पदाधिकारियों ने खुद मैदान में उतरकर पीड़ित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया।
इसके अलावा स्थानीय महिला संगठनों ने भी एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। महिला समूह 'अपरूपा' की प्रतिनिधि लूना लीला ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि लगभग 76 महिला समूहों से सहायता राशि और सामग्री जुटाकर 22 से 23 महिलाएं खुद पानी में उतरकर मदद पहुंचाने पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ के पानी के बीच खड़े होकर एक-दूसरे की मदद करना समाज के हर वर्ग की नैतिक जिम्मेदारी है।
400 फीसदी अधिक बारिश से बिगड़े हालात, अगले चरण में पुनर्वास अभियान
हालात का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि ऊपरी असम के जिलों में अचानक आई यह बाढ़ ऊपर की तरफ 400 प्रतिशत अधिक बारिश होने के कारण हुई है। इस अत्यधिक वर्षा की वजह से उन इलाकों में भी पानी भर गया जहां आमतौर पर बाढ़ नहीं आती। मुख्यमंत्री ने बताया कि आपदा की शुरुआत से ही उनके तीन साथी लगातार धरातल पर बने हुए हैं और स्थिति की निगरानी की जा रही है।
चराईदेव जिले का दौरा कर जमीनी स्थिति की समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि असम सरकार और भारत सरकार मिलकर प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता मुहैया कराएगी। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री वितरण के साथ-साथ अब अभियान अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसके तहत क्षतिग्रस्त सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का क्रमबद्ध तरीके से पुनर्निर्माण किया जाएगा और प्रत्येक पीड़ित परिवार को पुनरुत्थान के रास्ते पर लाया जाएगा।



















