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बासमती धान लगाने के तुरंत बाद खरपतवार नियंत्रण क्यों जरूरी है और किसान 3 से 7 दिनों में क्या कदम उठाएंभारत
13 अग॰ 2026, 6:55 am (22 घंटे पहले)· 0

बासमती धान लगाने के तुरंत बाद खरपतवार नियंत्रण क्यों जरूरी है और किसान 3 से 7 दिनों में क्या कदम उठाएं

बासमती धान की रोपाई के शुरुआती 3 से 7 दिन खरपतवार प्रबंधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। समय पर प्री-इमर्जेंस खरपतवार नाशक के प्रयोग से फसल में पोषक तत्वों की कमी रोकी जा सकती है।

शाहजहांपुर सहित देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बासमती धान की रोपाई की प्रक्रिया इस समय पूरे जोर-शोर से जारी है। कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, बासमती किस्मों की रोपाई के लिए यह समय बहुत उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, रोपाई संपन्न होते ही किसानों के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी हो जाती है। खेत में धान के छोटे पौधों के साथ ही कई तरह के अवांछित खरपतवार तेजी से उगने लगते हैं। यह खरपतवार मिट्टी में मौजूद खाद, उर्वरक, पानी और धूप को सोख लेते हैं, जिससे मुख्य फसल का पोषण छिन जाता है। यदि रोपाई के तुरंत बाद इन जंगली घासों पर नियंत्रण न पाया जाए, तो बासमती धान के कुल उत्पादन के साथ-साथ उसकी दानेदार गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। इसी वजह से शुरुआती दिनों में ही प्रभावी खरपतवार नियंत्रण बेहद आवश्यक है।

शुरुआती 3 से 7 दिनों में खरपतवार नियंत्रण का महत्व

बासमती धान की फसल में रोपाई के बाद शुरुआती 3 से 7 दिनों की अवधि को खरपतवार प्रबंधन के नजरिए से सबसे संवेदनशील माना जाता है। इस विषय पर जानकारी देते हुए प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि रोपाई के महज 2 से 3 दिनों के भीतर ही किसानों को प्री-इमर्जेंस खरपतवार नाशक का इस्तेमाल कर लेना चाहिए। समय रहते दवा का छिड़काव करने से खरपतवार के बीज मिट्टी के भीतर ही नष्ट हो जाते हैं और वे अंकुरित होकर बाहर नहीं आ पाते। दवा का प्रयोग करते समय खेत में 2 से 3 इंच पानी की मौजूदगी सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि किसान सही समय पर उचित दवा और सही तकनीक का चयन करते हैं, तो पौधों का विकास तेजी से होता है तथा फसल को विभिन्न कीटों और रोगों के प्रकोप से भी सुरक्षा मिलती है।

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कौन सी खरपतवार नाशक का करें चुनाव

धान के पौधों को खरपतवारों के नुकसान से बचाने का सबसे सुलभ तरीका यही है कि रोपाई के तुरंत बाद दवाओं का प्रयोग किया जाए। विशेषज्ञ रोपाई के 2 से 3 दिनों के अंदर प्रेटीलाक्लोर, बूटाक्लोर या पायराज़ोसल्फ्यूरॉन जैसी प्रमुख खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव की सिफारिश करते हैं। यह रसायनों की दवाएं मिट्टी की ऊपरी परत पर एक पारदर्शी सुरक्षात्मक आवरण का निर्माण कर देती हैं। इसके परिणामस्वरूप, मिट्टी में छिपे खरपतवार के बीज जमने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। यदि किसान दवा छिड़कने में देरी करते हैं और खरपतवार बड़े हो जाते हैं, तो इन शुरुआती खरपतवार नाशक दवाओं का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए समय सीमा का पालन करना बेहद अनिवार्य है।

दवा के सही छिड़काव की सुरक्षित तकनीक

खेत में खरपतवार नाशक का प्रयोग करते समय सही विधि और तकनीक अपनाना बहुत आवश्यक है। दवा की निर्धारित मात्रा को आवश्यकतानुसार पानी में अच्छी तरह घोल लें। इसके बाद स्प्रेयर मशीन में कट-नोजल लगाकर पूरे खेत में एकसमान रूप से छिड़काव करें। कुछ किसान रसायन को सूखी बालू रेत या यूरिया खाद में मिलाकर भी खेत में बिखेरते हैं। इस विधि का उपयोग करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि मिश्रण खेत के हर हिस्से में बराबर मात्रा में पहुंचे। यदि खेत के किसी एक हिस्से में दवा की अधिक सांद्रता गिर जाती है, तो धान के नाजुक पौधों को क्षति पहुंच सकती है और उनकी पत्तियां पीली पड़ सकती हैं।

छिड़काव के दौरान सावधानियां और पानी का प्रबंधन

दवा डालते समय और उसके बाद खेत में जल प्रबंधन तथा मौसम की परिस्थितियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। दवा के छिड़काव के वक्त खेत में 2 से 3 इंच पानी भरा रहना आवश्यक है, और छिड़काव के बाद अगले 3 से 4 दिनों तक खेत में नमी बनाए रखना अनिवार्य होता है। तेज हवा चलने की स्थिति में कभी भी रसायनों का छिड़काव न करें, क्योंकि हवा के साथ दवा उड़कर नष्ट हो जाती है और आसपास की अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अतिरिक्त, तेज धूप या कड़क दोपहर में छिड़काव करने से बचना चाहिए। दवा का प्रयोग केवल प्रातःकाल या सायं काल के शांत समय में ही करें। अपनी सुरक्षा के लिए छिड़काव के दौरान चेहरे पर मास्क या कपड़ा बांधें और हाथों को दस्तानों से ढंककर रखें।

20 से 25 दिनों बाद का प्रबंधन और बेहतर पैदावार

यदि रोपाई के 20 से 25 दिनों बाद भी खेत में कुछ खरपतवार दिखाई देते हैं, तो किसानों को हाथों से निराई-गुड़ाई करवानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों के परामर्श से पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवार नाशक का प्रयोग किया जा सकता है। जब खेत पूरी तरह से खरपतवार मुक्त रहता है, तब धान के पौधों को खाद, पानी, हवा और सूर्य का प्रकाश पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होता है। इससे पौधों में कल्ले अधिक संख्या में फूटते हैं, जड़ें मजबूत और गहरी होती हैं, और अंततः किसान को बासमती धान की बंपर पैदावार प्राप्त होती है जिससे बाजार में फसल की उच्च कीमत मिलती है।

सवाल-जवाब

रोपाई के कितने दिनों के भीतर खरपतवार नाशक का प्रयोग करना चाहिए?
रोपाई के 2 से 3 दिनों के भीतर प्री-इमर्जेंस खरपतवार नाशक का प्रयोग कर लेना चाहिए ताकि खरपतवार के बीज अंकुरित न हो सकें।
धान के खेत में दवा छिड़कते समय कितना पानी होना चाहिए?
खरपतवार नाशक का छिड़काव करते समय खेत में 2 से 3 इंच पानी भरा होना चाहिए और अगले 3 से 4 दिनों तक नमी बनाए रखनी चाहिए।
बासमती धान के लिए कौन सी प्रमुख खरपतवार नाशक दवाएं बताई गई हैं?
रोपाई के शुरुआती दिनों में प्रेटीलाक्लोर, बूटाक्लोर या पायराज़ोसल्फ्यूरॉन जैसी खरपतवार नाशक दवाओं का प्रयोग किया जाता है।
दवा छिड़कने के दौरान किसानों को किन मुख्य सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?
तेज हवा, तेज धूप या दोपहर के समय छिड़काव न करें। सुबह या शाम के समय मुंह ढककर और मास्क लगाकर ही दवा का छिड़काव करें।
रोपाई के 20 से 25 दिनों बाद खेत में खरपतवार दिखने पर क्या करना चाहिए?
रोपाई के 20 से 25 दिनों बाद अगर खरपतवार दिखें तो हाथ से निराई-गुड़ाई कराएं या विशेषज्ञ की सलाह से पोस्ट-इमर्जेंस दवा का प्रयोग करें।
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