काला सागर के अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारे में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन प्रहारों ने वैश्विक समुद्री व्यापार के साथ-साथ वहां तैनात कर्मियों के जीवन को गहरे संकट में डाल दिया है। व्यावसायिक जहाजों पर होने वाले इन हिंसक हमलों में भारतीय नाविक भी चपेट में आए हैं, जिसको लेकर विदेश मंत्रालय ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया है कि निर्दोष समुद्री कर्मियों और गैर-सैन्य जलपोतों पर प्रहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकते। समुद्री जलमार्गों पर असुरक्षा का माहौल बनने से आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह चरमराने की कगार पर पहुंच चुका है। लगातार बिगड़ती परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने सभी संबंधित पक्षों को चेतावनी जारी की है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक पोतों की अबाध आवाजाही हर हाल में फौरन बहाल होनी चाहिए।
चार व्यापारिक पोतों पर घातक प्रहार, कई कर्मी सुरक्षित निकाले गए
हाल के दिनों में काला सागर के जलक्षेत्र में कम से कम चार प्रमुख जलपोतों को सीधे निशाने पर लिया गया है, जहां भारतीय नागरिक भी अपनी सेवाएं दे रहे थे। एमवी रॉयड मम्मदोव नामक पोत पर हुए हमले के समय तीन भारतीय सवार थे, जिनमें से एक नागरिक गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। संबंधित कर्मी को तत्परता से चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई और रोमानिया स्थित भारतीय राजनयिक मिशन इन तीनों नागरिकों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। इसी तरह अल्फा वतन जलपोत भी एक भीषण प्रहार की चपेट में आया, जिसके चालक दल के सदस्यों की मौजूदा स्थिति का संपूर्ण ब्योरा जुटाया जा रहा है।
ड्रोन हमले का शिकार बने एक अन्य जहाज एमवी एबल पर आपातकालीन राहत अभियान चलाया गया। त्वरित कार्रवाई के चलते इस पोत पर मौजूद सभी 18 कर्मियों को सलामत बाहर निकाल लिया गया, जिनमें 7 भारतीय नागरिक शामिल थे। बचाए गए दल में से एक घायल भारतीय नागरिक का फिलहाल अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की ढुलाई में लगे एफ्रामैक्स रियो टैंकर पर हुए हमले से अफरातफरी मच गई थी। हालांकि, राहत की बात यह रही कि उस विशाल टैंकर पर कार्यरत सभी 23 भारतीय नाविकों को बिना किसी बड़े नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
अबू धाबी में कैप्टन स्मित मच्छर का उपचार, स्वास्थ्य में सुधार
विदेश मंत्रालय ने उपचाराधीन कैप्टन स्मित मच्छर की शारीरिक स्थिति को लेकर भी विवरण साझा किया है। कैप्टन स्मित मच्छर इस समय अबू धाबी के एक चिकित्सा केंद्र में भर्ती हैं, जहां भारतीय दूतावास के अधिकारी लगातार डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन से उनकी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। राजनयिक दल लगातार उनके परिजनों से भी संपर्क में है ताकि उन्हें हर प्रकार का नैतिक और प्रशासनिक सहयोग प्राप्त हो सके। मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उनकी शारीरिक स्थिति में निरंतर सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है। इस संवेदनशील जलक्षेत्र में कार्यरत हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी तंत्र पूरी तरह सतर्क बना हुआ है।
अनाज और ऊर्जा आपूर्ति बचाने के लिए भारत की कूटनीतिक पहल
युद्धग्रस्त क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बहाल करने के उद्देश्य से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने देश के दृष्टिकोण को स्पष्टता से प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि इस टकराव को बढ़ने से रोकने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भारत एक सक्रिय सेतु का कार्य कर रहा है। नई दिल्ली की प्राथमिक चिंता यह है कि काला सागर में व्यावसायिक जहाजों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि दुनिया भर में खाद्यान्न और ईंधन का प्रवाह बाधित न हो। रूस और यूक्रेन दोनों की रणनीतिक चिंताओं को सुलझाने के लिए भारत दोनों पक्षों के साथ सतत विचार-विमर्श कर रहा है, जिससे समुद्री मार्गों पर आवागमन निर्बाध रूप से चालू रखा जा सके।
बिश्केक वार्ता के बाद शांति प्रयासों को मिली गति
शुरुआत से ही भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी गंभीर भू-राजनीतिक संकट का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि कूटनीति की मेज पर ही संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात को बार-बार दोहराया है कि वर्तमान युग युद्ध का नहीं हो सकता। बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई द्विपक्षीय भेंट के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि अब समय आ गया है कि अंतहीन संघर्ष से बाहर निकलकर जंग की समाप्ति की दिशा में कदम बढ़ाए जाएं। भारत की इस निष्पक्ष और संतुलित कूटनीति का दोनों ही देशों ने स्वागत किया है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने शांति स्थापना की दिशा में भारत के सक्रिय योगदान को सराहा है।






















