देश की राजधानी में रहने वाले लाखों परिवारों और किराएदारों के लिए जलापूर्ति व्यवस्था में एक बड़ा नीतिगत बदलाव सामने आया है। दिल्ली जल एवं सीवर (टैरिफ और मीटरिंग) विनियम, 2026 को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है। यह नया ढांचा वर्ष 2012 से चले आ रहे पुराने नियमों की जगह लेगा। इस संशोधन का प्राथमिक मकसद नए वैध पानी कनेक्शन जारी करने की रफ्तार बढ़ाना और शहर में चल रहे अनधिकृत कनेक्शनों को नियमित करने की राह में आने वाली व्यावहारिक अड़चनों को दूर करना है। सबसे खास बात यह है कि संयुक्त मीटर के कारण पानी के बंटवारे और बिल को लेकर अक्सर होने वाले आपसी विवादों से अब किराएदारों को मुक्ति मिल सकेगी।
इमारतों की ऊंचाई और कनेक्शन की संख्या पर लगी पुरानी पाबंदियां हटीं
साल 2012 के पुराने नियमों के तहत किसी भी आवासीय इमारत में अधिकतम 6 पानी के कनेक्शन ही दिए जा सकते थे। नए विनियम 2026 में इस बंदिश को पूरी तरह हटा दिया गया है। अब तकनीकी रूप से व्यवहार्य होने और तय मानकों पर खरा उतरने के बाद किसी भी बहुमंजिला इमारत के हर अलग फ्लैट अथवा गैर-घरेलू इकाई को अपना स्वतंत्र पानी का मीटर मिल सकेगा। इसके लिए इमारत की कुल ऊंचाई अब कोई बाधा नहीं बनेगी, बशर्ते 17.5 मीटर से नीचे पानी के पर्याप्त भंडारण की उचित व्यवस्था की गई हो। स्वतंत्र कनेक्शन की पात्रता के लिए एक प्रमुख शर्त यह रखी गई है कि संबंधित ड्वेलिंग यूनिट में अपनी अलग रसोई यानी किचन की सुविधा होनी चाहिए। इस बदलाव से एक ही इमारत के अलग-अलग तलों पर रहने वाले परिवारों को काफी सहूलियत होगी।
40 से 50 दिनों की लंबी कागजी प्रक्रिया अब होगी तेज
दिल्ली जल बोर्ड की मौजूदा व्यवस्था के तहत नया कनेक्शन हासिल करने में उपभोक्ताओं को अमूमन 40 से 50 दिन का लंबा इंतजार करना पड़ता है। पुरानी प्रक्रिया के अनुसार, आवेदन जमा होने के 7 से 15 दिनों के भीतर जूनियर इंजीनियर मौके पर जाकर साइट का मुआयना करता है। इसके 3 से 5 दिनों बाद डिमांड नोट तैयार किया जाता है और उपभोक्ता द्वारा तय राशि जमा कराने के बाद भी कनेक्शन चालू होने में 15 से 30 दिन का वक्त और लग जाता है।
प्रशासन अब इस पूरी कार्यप्रणाली को उलटकर तेज करने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत आवेदन मिलने पर पहले कनेक्शन की मंजूरी जारी की जाएगी और साइट का भौतिक निरीक्षण बाद में पूरा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आवेदन में लगने वाले कागजातों की फेहरिस्त भी बहुत छोटी कर दी गई है। अब नए कनेक्शन के लिए केवल तीन मूल दस्तावेज ही पर्याप्त होंगे, जिसमें पहचान के मुख्य प्रमाण के रूप में आधार या पैन कार्ड को स्वीकार करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पानी की मौजूदा दरों, कनेक्शन शुल्क अथवा आवेदन शुल्क में कोई फेरबदल प्रस्तावित नहीं है।
दोषपूर्ण मीटर, टैंकर व्यवस्था और जल संरक्षण पर स्पष्ट दिशा-निर्देश
अक्सर उपभोक्ताओं को मीटर खराब होने, बंद पड़ने या मीटर रीडर की पहुंच से बाहर होने पर अनाप-शनाप बिलिंग की दिक्कतों से जूझना पड़ता था। नए विनियमों में ऐसी तमाम परिस्थितियों के लिए बिलिंग का पारदर्शी और सुस्पष्ट फार्मूला तय किया गया है। इसके साथ ही आपातकालीन टैंकर आपूर्ति और शोधित या रीक्लेम्ड पानी के उपयोग को लेकर भी नए नियम कायदे तय किए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण तकनीक अपनाने वाले आवासीय परिसरों को जल बोर्ड द्वारा विशेष छूट दी जाएगी। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत निवारण व सेवा अनुरोधों को गति दी जाएगी।



















