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धौलपुर की मानसरोवर कॉलोनी में दूषित पानी और सांपों का खौफ, तीन दशकों से तरस रहे पक्की सड़क को निवासीराजस्थान
1 सित॰ 2026, 1:45 pm (24 दिन पहले)· 2

धौलपुर की मानसरोवर कॉलोनी में दूषित पानी और सांपों का खौफ, तीन दशकों से तरस रहे पक्की सड़क को निवासी

राजस्थान के धौलपुर शहर स्थित वार्ड नंबर 10 की मानसरोवर कॉलोनी के लोग सीवर के बहते बदबूदार पानी, कीचड़ और जहरीले सांपों के खतरे के बीच जीने को मजबूर हैं। पिछले 30 सालों से सड़क निर्माण न होने और बंद नालियों के कारण क्षेत्र की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है।

राजस्थान के धौलपुर शहर के वार्ड नंबर 10 के अंतर्गत आने वाली मानसरोवर कॉलोनी में नागरिक सुविधाओं की बदहाली ने स्थानीय निवासियों का जीना दूभर कर दिया है। यहां जलभराव और सीवर का ओवरफ्लो होना महज एक मौसमी बाधा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का एक गंभीर संकट बन चुका है। कॉलोनी की गलियों में चौबीसों घंटे सीवर का गंदा और बदबूदार पानी जमा रहता है। मानसून के दौरान स्थितियां इतनी विकराल रूप ले लेती हैं कि यह गंदा पानी सीधे लोगों के ड्राइंग रूम और आंगनों तक पहुंच जाता है। इस लगातार बने रहने वाले जलजमाव के कारण कॉलोनी के लोग अपने ही घरों में कैद रहने को विवश हैं और रोजमर्रा के कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

दो सालों से पूरी तरह ठप हैं रास्ते और बढ़ा खरपतवार का जमावड़ा

कॉलोनी के आंतरिक रास्तों की स्थिति इतनी दयनीय है कि कई गलियां पिछले करीब दो वर्षों से आवागमन के लिए पूरी तरह बंद पड़ी हैं। सड़कों पर दूषित पानी के लगातार जमा रहने से पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहनों का निकलना भी असंभव हो गया है। लंबे समय से पानी ठहरे रहने के कारण जलभराव वाले हिस्सों में झाड़ियां और खरपतवार उग आए हैं, जिससे कई जगहों पर पक्की या कच्ची सड़क का अस्तित्व ही नजर नहीं आता। कच्ची सड़क होने के कारण जरा सी बारिश या सीवर के बहाव से गहरा और फिसलन भरा कीचड़ जम जाता है। इसके चलते स्थानीय नागरिकों को रोज खतरनाक परिस्थितियों में आवाजाही करनी पड़ रही है।

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ज़हरीले जीवों का बढ़ता खतरा और बच्चों की पढ़ाई पर असर

जलजमाव केवल बदबू और गंदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जानमाल का गंभीर खतरा भी पैदा हो गया है। दूषित पानी और आसपास उगी झाड़ियों के कारण कॉलोनी में अक्सर जहरीले सांप घूमते दिखाई देते हैं। कई मौकों पर ये सांप लोगों के घरों में दाखिल हो जाते हैं, जिससे परिवारों में भय का माहौल बना रहता है। इस डर के कारण अभिभावक अपने छोटे बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं देते। स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को रोज इस बदबूदार कीचड़ और दूषित पानी को तैरकर या पार करके जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ जाने पर बच्चे कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते, जिससे उनकी पढ़ाई का काफी नुकसान होता है।

28 से 30 वर्षों से सड़क का इंतजार और मंदिर की बदहाली

कॉलोनी के पुराने बाशिंदों के अनुसार, मूलभूत सुविधाओं की यह उपेक्षा पिछले कई दशकों से चली आ रही है। वर्ष 1998 से मानसरोवर कॉलोनी में रह रहे भगवती सिंह परमार का कहना है कि करीब 28 साल गुजर जाने के बाद भी इस इलाके में एक बार भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। आज भी पूरी कॉलोनी कच्ची सड़कों के सहारे है। नालियों और सीवर लाइनों की नियमित सफाई न होने से वे पूरी तरह जाम हो चुकी हैं। हालात इतने चिंताजनक हैं कि कॉलोनी का धार्मिक स्थल भी इस दूषित जलभराव की चपेट में आ गया है। मंदिर के चारों तरफ सीवर का गंदा पानी फैला रहने से श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

पड़ोसी कॉलोनियों के पानी का दबाव और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा

वर्ष 2002 से कॉलोनी में निवास कर रहे राजकुमार सेंगर ने बताया कि पिछले 4 से 5 वर्षों के दौरान सीवर की समस्या अत्यधिक गंभीर हो गई है। कॉलोनी में जल निकासी की कोई सुनियोजित व्यवस्था नहीं है। पूर्व में जो कच्चे नाले बनाए गए थे, वे उचित रखरखाव के अभाव में पूरी तरह अवरुद्ध हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, पास स्थित जगदंबा कॉलोनी और आनंद नगर कॉलोनी का गंदा पानी भी बहकर मानसरोवर कॉलोनी के निचले हिस्सों में एकत्र हो जाता है, जिससे समस्या दोगुनी हो जाती है। वर्ष 1996 से रह रहे राकेश परमार ने दुख जताते हुए कहा कि करीब 30 वर्षों के लंबे अंतराल में प्रशासन ने यहां सड़क बनाने के लिए मिट्टी या गिट्टी तक नहीं डलवाई। चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वोट मांगने तो आते हैं, लेकिन जीत दर्ज करने के बाद कोई भी इस क्षेत्र की सुध नहीं लेता।

अंतिम यात्रा पर भी बदहाली का साया और प्रशासन से गुहार

कॉलोनी के निवासियों ने बताया कि स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि यदि किसी नागरिक की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी अंतिम यात्रा को भी इसी बदबूदार और दूषित पानी से होकर ले जाना पड़ता है। स्थानीय निवासी राहुल के अनुसार, न तो नालियों का ढांचा सही है और न ही सीवर नेटवर्क काम कर रहा है। पूरे क्षेत्र में महामारी फैलने और सांपों के काटने का डर लगातार बना रहता है। परेशान मानसरोवर कॉलोनीवासियों ने धौलपुर जिला प्रशासन और नगर निकाय से गुहार लगाई है कि क्षेत्र में तुरंत पक्की सड़कों का निर्माण शुरू कराया जाए। साथ ही ब्लॉक पड़ी नालियों और सीवर लाइनों की व्यापक सफाई करवाकर जल निकासी का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि नागरिकों को इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।

सवाल-जवाब

मानसरोवर कॉलोनी धौलपुर के किस वार्ड में स्थित है?
मानसरोवर कॉलोनी राजस्थान के धौलपुर शहर के वार्ड नंबर 10 के अंतर्गत आती है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार कितने समय से पक्की सड़क नहीं बनी है?
स्थानीय बाशिंदों के अनुसार, पिछले करीब 28 से 30 वर्षों से कॉलोनी में सड़क निर्माण नहीं हुआ है।
जलभराव के कारण निवासियों को किन मुख्य खतरों का सामना करना पड़ रहा है?
सड़कों पर सीवर का पानी भरने से कीचड़, बीमारी फैलने का डर, और रुके हुए पानी में सांपों के घरों तक पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
मानसरोवर कॉलोनी में किन अन्य कॉलोनियों का पानी एकत्र होता है?
मानसरोवर कॉलोनी में जगदंबा कॉलोनी और आनंद नगर कॉलोनी का गंदा पानी आकर जमा होता है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से क्या मांगें रखी हैं?
निवासियों ने तुरंत पक्की सड़क बनाने, बंद पड़ी नालियों व सीवर लाइनों की सफाई कराने और जल निकासी का स्थायी इंतजाम करने की मांग की है।
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