ओपेक प्लस के यथास्थिति फैसले और जी7 की आपातकालीन निकासी से कच्चे तेल में फिसलन, डब्ल्यूटीआई 89 डॉलर के करीबकश्मीर घाटी में अक्टूबर की तपिश से टूटे दशकों पुराने रिकॉर्ड, सेब की खेती पर भारी मारगढ़मुक्तेश्वर में पुलिस और गोकशों के बीच मुठभेड़, 3 घायल समेत 6 आरोपी पकड़े गएसुल्तानपुर के ऐतिहासिक राहुल टॉकीज को दोबारा जिंदा करने की तैयारी, 2016 से बंद पड़े सिनेमा हॉल की बदलेगी सूरतपटना के महावीर मंदिर में नवरात्र पर नाम और गोत्र से होगी कलश स्थापना, जानें विभिन्न पूजा अनुष्ठान और तय शुल्कचुनाव आयोग की स्वायत्तता पर फारूक अब्दुल्ला ने जवाहरलाल नेहरू के फैसले पर उठाए सवालबरमूडा से बोस्टन जा रहा एयर एम्बुलेंस जेट लापता, पायलट ने कहा 'कुछ दिखाई नहीं दे रहा'बिना मैदा के घर पर तैयार करें गेहूं और आलू का क्रिस्पी रोल स्नैकअलमारी में जगह की कमी दूर करने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्सशेयर, म्यूचुअल फंड, एफडी या सोना: वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से पोर्टफोलियो तैयार करने का सही फॉर्मूला
चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर फारूक अब्दुल्ला ने जवाहरलाल नेहरू के फैसले पर उठाए सवालभारत
5 अक्तू॰ 2026, 8:32 am (18 मिनट पहले)· 0

चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर फारूक अब्दुल्ला ने जवाहरलाल नेहरू के फैसले पर उठाए सवाल

मतदाता सूची में संशोधन को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि स्वतंत्र संस्था को पूर्ण स्वायत्तता न देना एक ऐतिहासिक चूक थी।

मतदाता सूची के संशोधन और चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने के तौर-तरीकों पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के संचालन को लेकर चुनाव आयोग के प्रशासनिक निर्णयों पर असंतोष जताया जा रहा है, जिससे निर्वाचन प्रणाली की स्वतंत्रता को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है।

विपक्षी दलों के आरोप और प्रशासनिक सवाल

विपक्षी खेमे ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के प्रशासनिक कदमों और निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं का दावा है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने या जोड़े जाने से चुनावी प्रक्रिया की शुचिता प्रभावित हो सकती है, जिसके विरोध में कई दलों ने मुखर रुख अपनाया है।

ये भी पढ़ें

फारूक अब्दुल्ला ने पुरानी व्यवस्था पर साधा निशाना

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने इस विवाद में एक नया ऐतिहासिक दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं के निर्माण काल के निर्णयों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वतंत्र संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता न देना व्यवस्था की एक बड़ी कमी रही है। अब्दुल्ला ने सीधे तौर पर कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यदि चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वायत्त बनाया होता, तो आज संस्था की कार्यप्रणाली पर ऐसे सवाल खड़े न होते।

संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता का मुद्दा

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने इस बात पर बल दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निर्वाचन संस्था का पूर्ण नियंत्रण मुक्त होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, शीर्ष प्रशासनिक नियुक्तियों और संस्थागत निर्णयों में कार्यपालिका के प्रभाव की आशंकाओं को समाप्त किया जाना चाहिए था, ताकि किसी भी दौर में संस्था की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा न डगमगाए।

सवाल-जवाब

फारूक अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग को लेकर क्या बयान दिया?
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यदि चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वायत्त बनाया होता, तो आज यह विवाद पैदा नहीं होता।
विपक्षी दल चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगा रहे हैं?
विपक्षी दल विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के तौर-तरीकों को मनमाना बता रहे हैं।
इस विवाद में मुख्य चुनाव आयुक्त का क्या संदर्भ है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दलों द्वारा एकतरफा और मनमाने निर्णय लेने का आरोप लगाया जा रहा है।
एसआईआर (SIR) अभियान क्या है?
यह मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के लिए चलाया गया विशेष पुनरीक्षण अभियान है, जिसके तहत नाम जोड़े और हटाए जाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp